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UGC Bill Row Live Updates: यूजीसी कानून पर गतिरोध जारी, शिक्षा मंत्री ने निष्पक्ष कार्यान्वयन का दिया आश्वासन

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 27 Jan 2026 04:00 PM IST
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खास बातें

UGC Bill 2026 Controversy News Live: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जाति आधारित भेदभाव को कम करने और भारतीय परिसरों में समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पेश किए। सवर्ण समाज ने इन नियमों को अस्पष्ट या एकतरफा बताया है। देशभर में इन नियमों को वापस लेने की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। इस मामले पर लगातार छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
 

UGC Bill Controversy Live Updates: New UGC Rules Protests News in Hindi
यूजीसी विनयम, 2026 से जुड़े ताजा समाचार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स (X-@ugc_india)
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लाइव अपडेट

03:59 PM, 27-Jan-2026

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के नियमों के निष्पक्ष कार्यान्वयन का आश्वासन दिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी 2026 के नए नियमों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा, 'मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा।'

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा देना है और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से इन्हें जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी देश भर में नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बहसों के बीच आई है, जिसमें समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

03:53 PM, 27-Jan-2026

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने विरोध में दिया अपने पद से इस्तीफा

यूजीसी के नए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026' से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और धरने पर बैठ गए।
03:49 PM, 27-Jan-2026

यूजीसी मुख्यालय के बाहर हो रहा विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यालय के बाहर छात्रों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
03:42 PM, 27-Jan-2026

यूजीसी के नियमों पर प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया

राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'भेदभाव को और बढ़ाकर आप उसका समाधान नहीं कर सकते। यूजीसी के दिशानिर्देशों ने भेदभाव को दूर करने के बजाय छात्र परिसरों में नफरत को और बढ़ा दिया है। शिक्षा मंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए।'
 
03:41 PM, 27-Jan-2026

कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया

03:34 PM, 27-Jan-2026

एमपी में विरोध प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के भोपाल में सामान्य जाति समुदाय के एक समूह ने यूजीसी द्वारा जारी नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा, 'एक ऐसा कानून बनाया जहां पर एक वर्ग को सदैव फायदा होने से अपराधी घोषित कर दिया जाए। हमारा संविधान कहता है कि यदि एक पीढ़ी ने अपराध किया है, तो अगली पीढ़ी को उसकी सजा नहीं मिलना चाहिए। पहले ही कानून (एससी/एसटी एक्ट) कम था, जो ब्लैकमेलिंग के लिए एक और नया कानून ला दिया, जहां पर शिक्षण संस्थान में ब्लैकमेलिंग का सबसे उत्तम हथियार दे दिया। एक वर्ग को अपराधी घोषित कर दिया और तीन वर्ग को पीड़ित घोषित कर दिया। इस तरह के कानून से शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव बढ़ जाएगा।'
 
 
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03:33 PM, 27-Jan-2026

देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विरोध

नई दिल्ली , मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, अलवर, मधुबनी और अन्य क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि इन नियमों को सावधानीपूर्वक लागू किया जाए, तो ये समानता के ढांचे को मजबूत कर सकते हैं।
03:22 PM, 27-Jan-2026

सोशल मीडिया पर भी हो रहा विरोध

सोशल मीडिया पर #RollbackUGC जैसे हैशटैग चल रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है और समाज में जातिगत बंटवारा और बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने तो इन नियमों को ऑनलाइन 'यूजीसी का काला कानून' तक कह दिया है।
03:22 PM, 27-Jan-2026

प्रतिनिधित्व को लेकर जताई चिंता

इन नियमों के अनुसार, समानता समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई स्पष्ट प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है, जिससे शिकायतों की सुनवाई में असंतुलन हो सकता है।
03:21 PM, 27-Jan-2026

नियमों के गलत इस्तेमाल का सता रहा डर

नियमों में 'भेदभाव' की परिभाषा काफी खुली और अस्पष्ट बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कौन-सा व्यवहार गलत माना जाएगा। उन्हें डर है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है और बेगुनाह छात्रों पर झूठे आरोप लग सकते हैं।
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