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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   28-Year-Old University: Why Was RGPV Split into Three Parts? Find Out Who Benefits and Why Congress Is Upset.

28 साल पुरानी यूनिवर्सिटीः आरजीपीवी क्यों बंटी तीन हिस्सों में? जानिए किसे मिलेगा फायदा, कांग्रेस क्यों नाराज

Wed, 02 Sep 2026 02:58 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 02 Sep 2026 02:58 PM IST
सार

आरजीपीवी अब तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में बंटेगी। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नए विश्वविद्यालय बनेंगे और राजीव गांधी का नाम हटेगा। सरकार इसे तकनीकी शिक्षा के विकेंद्रीकरण का फैसला बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक कदम बताते हुए विरोध कर रही है।

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28-Year-Old University: Why Was RGPV Split into Three Parts? Find Out Who Benefits and Why Congress Is Upset.
आरजीपीवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी यूनिवर्सिटी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी आरजीपीवी अब एक नहीं, तीन विश्वविद्यालयों में बंटेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में इसके पुनर्गठन को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी हटेगा। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में तीन क्षेत्रीय तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालय काम करेंगे। लेकिन सवाल बड़ा है आखिर 28 साल से प्रदेश की तकनीकी शिक्षा का केंद्र रही आरजीपीवी को तीन हिस्सों में बांटने की जरूरत क्यों पड़ी? इससे विद्यार्थियों को कितना फायदा होगा और क्या इसके पीछे प्रशासनिक जरूरत के साथ राजनीति भी है?
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कब बनी थी आरजीपीवी?
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना 1998 में मध्यप्रदेश विधानसभा अधिनियम क्रमांक 13, 1998 के तहत हुई थी। इसे बनाने का उद्देश्य प्रदेश के इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए एक ऐसी विश्वविद्यालय व्यवस्था तैयार करना था, जिससे तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार हो, पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था बेहतर हो तथा शोध और उद्योग से जुड़ाव बढ़े। यानी आरजीपीवी सिर्फ डिग्री देने वाली संस्था के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश की तकनीकी शिक्षा को एक व्यवस्था के तहत संचालित करने के लिए बनाई गई थी।
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कितने बड़े परिसर में है?
भोपाल के गांधी नगर स्थित आरजीपीवी का परिसर करीब 241.64 एकड़ में फैला है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों के साथ इंजीनियरिंग, फार्मेसी, एमसीए, वास्तुकला और पॉलिटेक्निक संस्थान जुड़े रहे हैं। विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और शोध स्तर की शिक्षा से जुड़ा है।
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यहां क्या पढ़ाया जाता है?
आरजीपीवी के दायरे में इंजीनियरिंग की अलग-अलग शाखाओं के साथ फार्मेसी, एमसीए, वास्तुकला, पॉलिटेक्निक और शोध कार्यक्रम संचालित होते हैं। विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि विज्ञान, नैनो तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा तकनीक, सिविल, विद्युत और यांत्रिक अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग के अनुसार आरजीपीवी से प्रदेश के इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, फार्मेसी और एमसीए संस्थान संबद्ध रहे हैं। इन संस्थानों की पाठ्यचर्या, परीक्षा और डिग्री-डिप्लोमा व्यवस्था में भी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अब तीन विश्वविद्यालय कौन से होंगे?
1- भोपाल -मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयइसके अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग बताए गए हैं।
2- जबलपुर - महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय इसके दायरे में रीवा, शहडोल, जबलपुर और सागर क्षेत्र शामिल किए जाएंगे।
3- उज्जैन - मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय इसके अंतर्गत इंदौर और उज्जैन संभाग रहेंगे।

सरकार क्यों बांट रही है?
सरकार का मुख्य तर्क क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा और प्रशासन को आसान बनाना है। अभी पूरे प्रदेश के तकनीकी संस्थानों का बड़ा हिस्सा भोपाल स्थित आरजीपीवी से संचालित होता है। सरकार का कहना है कि तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालय बनने से विद्यार्थियों और संस्थानों को शैक्षणिक व प्रशासनिक काम के लिए भोपाल पर निर्भरता कम होगी। सरकार के अनुसार इससे क्षेत्रीय स्तर पर पढ़ाई और निगरानी बेहतर होगी, विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा और नए विश्वविद्यालय बनने से नए पद तथा रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

कितने छात्रों को फायदा?
सरकार के फैसले से जुड़े विवरण के अनुसार आरजीपीवी के दायरे में 3 लाख से ज्यादा विद्यार्थी और 585 संस्थाएं बताई गई हैं। सरकार का दावा है कि इन विद्यार्थियों को क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं ज्यादा आसानी से मिल सकेंगी।

कांग्रेस का विरोध क्यों?
कांग्रेस ने इस फैसले के पीछे प्रशासनिक सुधार से ज्यादा राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने खास तौर पर आरजीपीवी से राजीव गांधी का नाम हटाने पर आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरजीपीवी का नाम बदलने के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि जिनके नाम पर विश्वविद्यालय है, वे प्रौद्योगिकी क्रांति लाने वाले प्रधानमंत्री थे और उन्होंने देश के लिए शहादत दी। ऐसे महापुरुष के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना और ऐसे लोगों के नाम पर रखना, जिनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं रहा, बिल्कुल गलत है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।

भाजपा सरकार का पक्ष क्या है
सरकार का कहना है कि यह फैसला तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से मजबूत करने के लिए है। सरकार के मुताबिक एक बड़े विश्वविद्यालय के माध्यम से पूरे प्रदेश की व्यवस्था संभालने के बजाय तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालय होने से प्रशासनिक काम तेजी से होंगे और विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिलेंगी। नए विश्वविद्यालयों में तकनीकी शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी जोर रहेगा।

इससे किसका फायदा होगा?

1- विद्यार्थियों को संभावित फायदाः क्षेत्रीय विश्वविद्यालय बनने से परीक्षा, दस्तावेज, संबद्धता, शैक्षणिक और अन्य प्रशासनिक कामों के लिए दूर के विद्यार्थियों को भोपाल आने की जरूरत कम हो सकती है। सरकार इसे क्षेत्रीय स्तर पर सुविधा बढ़ने के रूप में देख रही है।
2- संस्थानों को संभावित फायदाः क्षेत्र के कॉलेजों की निगरानी और प्रशासन स्थानीय विश्वविद्यालय के जरिए होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान होने का सरकार का दावा है।
3- सरकार को फायदाः तीन अलग विश्वविद्यालयों के जरिए प्रदेश की तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार संचालित करने का ढांचा तैयार होगा। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि तीन विश्वविद्यालयों के गठन के साथ अलग प्रशासनिक ढांचा और संसाधनों की जरूरत होगी।

 नाम बदला या व्यवस्था बदली?
आरजीपीवी के तीन हिस्सों में बंटने का असर सिर्फ विश्वविद्यालय के नाम और प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के लाखों तकनीकी विद्यार्थियों और सैकड़ों संस्थानों की संबद्धता, परीक्षा, प्रशासन और शैक्षणिक व्यवस्था नए क्षेत्रीय ढांचे में जाएगी। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि तीन विश्वविद्यालय बनने के बाद वास्तव में विद्यार्थियों को सुविधा, फैसलों में तेजी, बेहतर शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण मिलता है या सिर्फ विश्वविद्यालय का नाम और ढांचा बदलकर रह जाता है।


भाजपा बोली- नाम की चिंता नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए काम करते हैं
भाजपा प्रवक्ता अजय धवले ने कांग्रेस की आपत्ति पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय को तीन भागों में बांटकर बेहतर तरीके से अध्ययन-अध्यापन का काम करना चाहती है। धवले ने कहा कि नाम बदलने की बात पर कांग्रेस आपत्ति जता रही है, जबकि कांग्रेस की सरकारों ने अपने कार्यकाल में ही अपने लोगों को भारत रत्न सम्मान देने और उनकी मूर्तियां लगाने का काम किया। अब उन्हें नाम बदलने पर आपत्ति हो रही है। उन्होंने कहा, भाजपा नाम के लिए काम नहीं करती, हम राष्ट्र निर्माण के लिए काम करते हैं। हमें नाम की चिंता नहीं है।


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मुकेश नायक बोले, गोडसे के नाम पर रख दें
 कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष मुकेश नायक ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार चाहे तो विश्वविद्यालय का नाम नाथूराम गोडसे के नाम पर रख दे। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से काम नहीं चलेगा, सरकार को विश्वविद्यालय की व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भारत रत्न से सम्मानित थे और उन्होंने देश में कंप्यूटर क्रांति के साथ ऑप्टिकल फाइबर व्यवस्था और इंटरनेट के विस्तार में योगदान दिया। ऐसे व्यक्ति का नाम विश्वविद्यालय से हटाया जा रहा है। नायक ने कहा कि जिन लोगों ने देश के विकास में योगदान दिया, चाहे जवाहरलाल नेहरू हों, इंदिरा गांधी हों या राजीव गांधी, सरकार उन सभी के नाम हटाना चाहती है।
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