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एम्स भोपाल: 9 महीने के बच्चे के दोनों कानों में एक साथ कॉक्लियर प्रत्यारोपण, मध्य भारत में सबसे कम उम्र का केस

Fri, 28 Aug 2026 06:23 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 28 Aug 2026 06:23 PM IST
सार

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने 9 माह के बच्चे के दोनों कानों में एक साथ सफल कॉक्लियर प्रत्यारोपण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की। टीम के मुताबिक, यह मध्य भारत में सबसे कम उम्र में किया गया कॉक्लियर प्रत्यारोपण है। समय से पहले जन्मे बच्चे को मस्तिष्क ज्वर के बाद सुनने की समस्या हुई थी। नवीनतम तकनीक और स्मार्टनैव प्रणाली से सर्जरी सफल रही।

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AIIMS Bhopal: Simultaneous cochlear implants in both ears of a 9-month-old infant; youngest case in Central In
एम्स की टीम बच्चे के साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स भोपाल में डॉक्टरों ने महज 9 माह के बच्चे के दोनों कानों में एक साथ सफल कॉक्लियर प्रत्यारोपण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उपचार टीम के अनुसार, यह मध्य भारत में कॉक्लियर प्रत्यारोपण कराने वाला सबसे कम उम्र का बच्चा है। साथ ही, मध्य प्रदेश में नवीनतम पीढ़ी की कॉक्लियर प्रत्यारोपण तकनीक पाने वाला भी यह पहला बच्चा है। बच्चा समय से पहले पैदा हुआ था और जन्म के बाद एक माह से अधिक समय तक नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती रहा। उसे मस्तिष्क ज्वर भी हुआ था। मस्तिष्क ज्वर के बाद सुनने की क्षमता प्रभावित होने पर उपचार में देरी खतरनाक हो सकती है। इसके कारण कान के अंदर का वह हिस्सा, जहां प्रत्यारोपण का इलेक्ट्रोड लगाया जाता है, धीरे-धीरे कठोर या हड्डी जैसा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बाद में इलेक्ट्रोड डालना मुश्किल हो जाता है।
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सर्जरी के दौरान ही इलेक्ट्रोड की जांच
डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए समय पर दोनों कानों में प्रत्यारोपण किया। सर्जरी में नवीनतम तकनीक के साथ स्मार्टनैव निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। इससे ऑपरेशन के दौरान इलेक्ट्रोड की स्थिति की तत्काल जानकारी मिलती रही और उसे सही स्थान पर लगाने में मदद मिली। इलेक्ट्रोड की जांच भी सर्जरी के दौरान ही की गई। सर्जरी एम्स भोपाल के नाक, कान एवं गला विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास गुप्ता और डॉ. गणकल्याण बहेरा ने की। टीम में डॉ. रिम्शा खान, डॉ. ट्विशा चटर्जी,ऑडियोलॉजिस्ट सनी खुराना तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. ज़ैनब अहमद, डॉ. मणि और डॉ. आकृति शामिल रहीं। नर्सिंग टीम के राजाराम और बृजपाल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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अब सुनने और बोलने की दिशा में आगे बढ़ेगा बच्चा
अब प्रत्यारोपित उपकरण को सक्रिय कर उसकी प्रोग्रामिंग की जाएगी। इसके बाद बच्चे को नियमित श्रवण पुनर्वास दिया जाएगा। इससे उसके सुनने की क्षमता विकसित होने के साथ आगे चलकर बोलने और भाषा सीखने में मदद मिलने की उम्मीद है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल ने पूरी टीम और बच्चे के परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बेहतर रोगी देखभाल और उन्नत सर्जरी सेवाएं उपलब्ध कराने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कॉक्लियर प्रत्यारोपण से जुड़े कौशल विकास कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी जोर दिया। नाक, कान एवं गला विभागाध्यक्ष डॉ. अपर्णा चव्हाण ने भी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


 
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