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भोपाल में 44 भैंस बनीं नगर निगम की मुसीबत: 10 महीने में चारे पर खर्च हुए 16 लाख, कोर्ट केस से अटकी नीलामी

Tue, 06 Oct 2026 07:21 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 06 Oct 2026 07:21 AM IST
सार

भोपाल में कोर्ट केस के चलते 44 भैंसें नगर निगम के लिए लगातार बढ़ते खर्च का कारण बन गई हैं। अरवलिया कांजी हाउस में रखी इन भैंसों के चारे पर 10 महीने में 16 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।

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Bhopal: 47 Seized Buffaloes Burden Civic Body, Rs 16 Lakh Spent on Fodder in 10 Months
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल नगर निगम के लिए 44 भैंसें अब बड़ा खर्च और परेशानी का कारण बन गई हैं। अरवलिया स्थित नगर निगम के कांजी हाउस में रखी इन भैंसों के चारे पर पिछले करीब 10 महीने में 16 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण निगम इनकी नीलामी भी नहीं कर पा रहा है। अब निगम इन भैंसों को वापस इटखेड़ी पुलिस को सौंपने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम के गोवर्धन प्रोजेक्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मांगी है। इसके बाद इटखेड़ी पुलिस को पत्र भेजकर भैंसें वापस लेने का अनुरोध किया जाएगा। साथ ही अब तक इनके चारे और देखभाल पर हुए खर्च की पूरी जानकारी भी पुलिस को दी जाएगी।
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जनवरी से कांजी हाउस में हैं भैंसें
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इटखेड़ी पुलिस ने जनवरी 2026 से अब तक 49 भैंसों को अवैध तरीके से ट्रकों में ले जाते हुए पकड़ा था। पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए ट्रक और भैंसों को जब्त किया था। मामला कोर्ट में पेश होने के बाद ट्रक तो छोड़ दिया गया, लेकिन भैंसें नगर निगम के कांजी हाउस में ही रखी रहीं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण इनकी देखभाल और चारे की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, इस दौरान भैंसों के चारे पर 16 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।
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9 भैंसों की मौत, 4 बछड़े भी हुए
कांजी हाउस में रखी 49 भैंसों में से अब तक 9 की मौत हो चुकी है, जबकि इस दौरान 4 बछड़ों का जन्म भी हुआ। किसी भैंस की मौत होने पर गोवर्धन प्रोजेक्ट को इटखेड़ी पुलिस को सूचना देनी पड़ती है। पुलिस की अनुमति के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होती है। अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में करीब 45 दिनों के भीतर चार भैंसों की मौत हुई। इससे कांजी हाउस में इतनी बड़ी संख्या में पशुओं को लंबे समय तक रखने और उनकी देखभाल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 

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नीलामी की कोशिश भी नहीं हो सकी
नगर निगम ने पहले इन भैंसों की नीलामी के जरिए उनके रखरखाव पर हुए खर्च की भरपाई करने का प्रयास किया था। इसके लिए इटखेड़ी पुलिस से दो बार अनुमति मांगी गई, लेकिन कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर अनुमति नहीं दी गई। अब निगम के सामने भैंसों को लंबे समय तक रखने और लगातार बढ़ रहे चारे के खर्च की चुनौती है। ऐसे में गोवर्धन प्रोजेक्ट अब पुलिस को भैंसें वापस सौंपने की तैयारी कर रहा है। साथ ही अब तक हुए पूरे खर्च का ब्योरा भी पुलिस को दिया जाएगा।
 
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