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Bhopal: निजी विश्वविद्यालय विधेयक पर एबीवीपी का विरोध, बोले-शिक्षा नहीं बिकने देंगे, संशोधन वापस लेने की मांग

Sun, 19 Jul 2026 06:34 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 19 Jul 2026 06:34 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 का एबीवीपी ने विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे शिक्षा का व्यापारीकरण बढ़ेगा और विश्वविद्यालय खोलने के मानकों में ढील देकर भ्रष्टाचार व मनमानी को बढ़ावा मिलेगा। परिषद ने विधेयक वापस लेने और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता व पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की।

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Bhopal: ABVP protests against the Private Universities Bill, vows not to let education be commodified, and dem
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्य प्रदेश सरकार के प्रस्तावित मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने आरोप लगाया कि यह संशोधन उच्च शिक्षा को मजबूत करने के बजाय शिक्षा के व्यापारीकरण का रास्ता खोलेगा और निजी व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देगा। संगठन ने विधेयक को वापस लेने की मांग की है।
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मानकों में ढील से बढ़ेगा भ्रष्टाचार
अभाविप का कहना है कि वर्तमान कानून के तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि का प्रावधान है, लेकिन प्रस्तावित संशोधन में पर्याप्त भूमि जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। परिषद का आरोप है कि यह अस्पष्ट प्रावधान भविष्य में नियमों की मनमानी व्याख्या, पक्षपात और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकता है।
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शिक्षा राष्ट्र निर्माण का माध्यम, व्यापार नहीं
परिषद ने कहा कि शिक्षा को कभी भी व्यापारिक गतिविधि नहीं बनाया जा सकता। उच्च शिक्षा का विस्तार जरूरी है, लेकिन यह गुणवत्ता, पारदर्शिता और तय मानकों से समझौता करके नहीं होना चाहिए। केवल निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और विद्यार्थियों को मिलने वाला माहौल अधिक महत्वपूर्ण है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
अभाविप ने अपने विरोध के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि विश्वविद्यालय की स्थापना केवल कागजी मंजूरी का विषय नहीं है। इसके लिए पर्याप्त भूमि, समुचित परिसर और आवश्यक शैक्षणिक अधोसंरचना अनिवार्य है। ऐसे में भूमि संबंधी मानकों को कमजोर करना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल सकता है।


विद्यार्थियों के भविष्य से समझौता नहीं
परिषद ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय खोलने के मानकों में ढील दी गई तो इसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों के भविष्य और राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को होगा। संगठन ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि व्यावसायिक लाभ को।

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राष्ट्रीय महामंत्री बोले- शिक्षा को बाजार नहीं बनने देंगे
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। पर्याप्त भूमि जैसे अस्पष्ट प्रावधान शिक्षा के व्यापारीकरण और निजी हितों को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बाजार की वस्तु नहीं बनाया जा सकता और अभाविप इस संशोधन विधेयक का स्पष्ट एवं दृढ़ता से विरोध करती है।
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