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Bhopal News: भोपाल में वॉटर ट्रीटमेंट पर बड़ा सवाल,कांग्रेस का आरोप- रॉ वाटर सीधे बड़े तालाब में मिलाया जा रहा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 06 Jan 2026 05:11 PM IST
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सार
भोपाल में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षद दल ने आरोप लगाया कि फिल्ट्रेशन के बाद निकलने वाला रॉ वाटर नियमों के खिलाफ सीधे बड़े तालाब में मिलाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने प्लांट में केमिस्ट की अनुपस्थिति, गुणवत्ता जांच की कमी और जर्जर पाइपलाइनों के कारण गंदा पानी सप्लाई होने का दावा किया।
श्यामला हिल्स स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर में दूषित पानी से हुई घटना के बाद राजधानी भोपाल की जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि शहर के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों में पानी का शुद्धिकरण तय मानकों के अनुसार नहीं किया जा रहा। इसी को लेकर मंगलवार को कांग्रेस पार्षद दल ने श्यामला हिल्स स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। नगर निगम परिषद में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने प्लांट का दौरा किया। इस दौरान पार्षद गुड्डू चौहान समेत अन्य कांग्रेसी नेता भी मौके पर मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि फिल्ट्रेशन के बाद निकलने वाला रॉ वाटर नियमों के खिलाफ सीधे बड़े तालाब में छोड़ा जा रहा है।
रॉ वाटर के लिए अलग टैंक जरूरी
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के दिशा-निर्देशों के अनुसार रॉ वाटर के लिए अलग टैंक होना चाहिए, लेकिन श्यामला हिल्स प्लांट में ऐसा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसके आदेश से यह पानी सीधे बड़े तालाब में मिलाया जा रहा है और इसके लिए नगर निगम के पास कोई वैध अनुमति या प्रमाण पत्र भी मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्टर किया गया पानी भी पूरी तरह साफ नहीं है। पानी में गंदगी की मोटी परत साफ दिखाई दे रही है, जो वापस तालाब में जा रही है। ऐसे में नागरिकों को सुरक्षित पेयजल मिलने पर सवाल खड़े होते हैं।
न केमिस्ट, न गुणवत्ता जांच
कांग्रेस पार्षद दल ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान प्लांट में कोई केमिस्ट मौजूद नहीं था। पानी की गुणवत्ता की जांच कौन करता है, इसका भी स्पष्ट जवाब अधिकारियों के पास नहीं था। केवल दो कर्मचारियों के नाम बताए गए, लेकिन मौके पर कोई मौजूद नहीं मिला।
यह भी पढ़ें-भोपाल में अमृत-2.0 का लक्ष्य अधूरा, कई इलाकों में गंदा पानी, 641 करोड़ की योजनाएं फाइलों में अटकी
सीवेज और पीने के पानी की लाइनें मिक्स
कांग्रेस नेताओं ने बड़े तालाब में सीवेज मिलने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि शहर की 20 से 25 साल पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिसके कारण कई इलाकों में सीवेज और पीने के पानी की लाइनें आपस में मिक्स हो रही हैं। गंगानगर सहित कई क्षेत्रों में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।
यह भी पढ़ें- शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग, भोपाल में 2 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी सड़कों पर, DPI का किया घेराव
सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन
कांग्रेस ने बताया कि 2023 की रिपोर्ट में भी जल आपूर्ति व्यवस्था की खामियां उजागर हुई थीं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस पार्षद दल ने मांग की है कि तुरंत रॉ वाटर के लिए अलग टैंक बनाया जाए, सभी प्लांटों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए और प्रत्येक प्लांट में केमिस्ट की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे पर बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।
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रॉ वाटर के लिए अलग टैंक जरूरी
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के दिशा-निर्देशों के अनुसार रॉ वाटर के लिए अलग टैंक होना चाहिए, लेकिन श्यामला हिल्स प्लांट में ऐसा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसके आदेश से यह पानी सीधे बड़े तालाब में मिलाया जा रहा है और इसके लिए नगर निगम के पास कोई वैध अनुमति या प्रमाण पत्र भी मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्टर किया गया पानी भी पूरी तरह साफ नहीं है। पानी में गंदगी की मोटी परत साफ दिखाई दे रही है, जो वापस तालाब में जा रही है। ऐसे में नागरिकों को सुरक्षित पेयजल मिलने पर सवाल खड़े होते हैं।
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न केमिस्ट, न गुणवत्ता जांच
कांग्रेस पार्षद दल ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान प्लांट में कोई केमिस्ट मौजूद नहीं था। पानी की गुणवत्ता की जांच कौन करता है, इसका भी स्पष्ट जवाब अधिकारियों के पास नहीं था। केवल दो कर्मचारियों के नाम बताए गए, लेकिन मौके पर कोई मौजूद नहीं मिला।
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सीवेज और पीने के पानी की लाइनें मिक्स
कांग्रेस नेताओं ने बड़े तालाब में सीवेज मिलने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि शहर की 20 से 25 साल पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिसके कारण कई इलाकों में सीवेज और पीने के पानी की लाइनें आपस में मिक्स हो रही हैं। गंगानगर सहित कई क्षेत्रों में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।
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सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन
कांग्रेस ने बताया कि 2023 की रिपोर्ट में भी जल आपूर्ति व्यवस्था की खामियां उजागर हुई थीं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस पार्षद दल ने मांग की है कि तुरंत रॉ वाटर के लिए अलग टैंक बनाया जाए, सभी प्लांटों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए और प्रत्येक प्लांट में केमिस्ट की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे पर बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

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