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Bhopal News: जेपी अस्पताल की दवा पर फंगस, मरीज की बाल-बाल बची जान, सप्लाई सिस्टम पर सवाल, CMHO से शिकायत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 03 Jan 2026 05:23 PM IST
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सार

भोपाल के जेपी अस्पताल में फफूंद लगी दवा मिलने का मामला सामने आया है। मरीज को फार्मेसी से दी गई डिक्लोफेनाक टैबलेट एक्सपायरी के भीतर होने के बावजूद खराब पाई गई, जिससे दवा भंडारण और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं।

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मरीज को दी गई फफूंद वाली दवा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी के जिला अस्पताल (जेपी) से दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। अस्पताल की फार्मेसी से मरीज को दी गई दर्द निवारक गोली में फफूंद पाई गई, जिससे सरकारी अस्पतालों में दवा भंडारण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार शाम ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे सतीष सेन को पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते एक्स-रे और दर्द की दवा लिखी गई। अस्पताल की फार्मेसी से मिली डिक्लोफेनाक टैबलेट जब मरीज ने घर जाकर देखी, तो पूरी स्ट्रिप की ज्यादातर गोलियों पर सफेद फंगस जमी हुई थी। मरीज का कहना है कि यदि वह दर्द में जल्दबाजी में दवा खा लेता, तो गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता था।
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एक्सपायरी नहीं, स्टोरेज पर सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दवा में फफूंद पाई गई, उसकी एक्सपायरी जून 2027 है। यह बैच (DSM 25002) अक्टूबर 2025 में एमपी पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHSCL) के जरिए जेपी अस्पताल को सप्लाई किया गया था। इससे साफ है कि मामला एक्सपायरी का नहीं, बल्कि स्टोरेज और सप्लाई चेन की लापरवाही का है।
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ओपीडी में सीनियर डॉक्टर नहीं, इंटर्न के भरोसे इलाज
पीड़ित मरीज के अनुसार, हड्डी रोग विभाग में लंबे इंतजार के बाद भी कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं था। अंततः इंटर्न डॉक्टरों ने जांच कर दवा लिखी। इसके बाद अस्पताल परिसर की फार्मेसी से दवा दी गई, जहां किसी ने दवा की हालत पर ध्यान नहीं दिया।

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CMHO को भेजी शिकायत, फोटो किए अटैच
मरीज ने मामले की शिकायत मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा को ई-मेल के जरिए भेजी है और खराब दवा की तस्वीरें भी संलग्न की हैं। शिकायत में इसे “लापरवाही नहीं, बल्कि मरीज की जान से खिलवाड़” बताया गया है।

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क्या गरीब मरीज ही बनेंगे प्रयोगशाला?
सरकारी अस्पतालों की दवाओं पर सबसे ज्यादा भरोसा गरीब और मध्यम वर्ग करता है। मरीज का कहना है कि वह सतर्क था, इसलिए दवा देख ली, लेकिन हर मरीज इतना जागरूक नहीं होता। अगर यह दवा किसी बुजुर्ग, बच्चे या गंभीर मरीज को दी जाती, तो परिणाम जानलेवा हो सकते थे।भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीश शर्मा और जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन के मामले में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होने फोन तक नहीं उठाया।

 
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