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Bhopal News: हाईकोर्ट के फैसले से कर्मचारियों में जोश, सरकार को अल्टीमेटम, आदेश नहीं माना तो मंत्रालय घेराव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 09 Jan 2026 04:07 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 2019 में नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में तीन साल तक की गई कटौती को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है और कटी हुई राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं। फैसले से कर्मचारियों में उत्साह है। कर्मचारी मंच ने सरकार से सभी कर्मचारियों पर आदेश लागू करने, एरियर व इंक्रीमेंट जारी करने की मांग की है।
कर्मचारी संगठन की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के फैसले ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 2019 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में पहले तीन वर्षों तक क्रमशः 30, 20 और 10 प्रतिशत की कटौती की जा रही थी। इस निर्णय को कर्मचारी संगठनों ने अपने अधिकारों की निर्णायक जीत बताया है। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पांडेय ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश में अलग-अलग दौर की सरकारों ने कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के फैसले से 28 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी, जबकि 2019 में कमलनाथ सरकार ने नियमित कर्मचारियों के वेतन में जबरन कटौती का आदेश जारी किया।
पूरी राशि प्रभावित कर्मचारियों को लौटाई जाए
पांडेय के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश जारी कर नियुक्ति के पहले वर्ष में 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया था। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को बीते छह वर्षों में करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।अब हाईकोर्ट की डबल बेंच जस्टिस विवेक रसिया और जस्टिस दीपक कुमार ने 6 जनवरी 2026 को इस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि पूरा काम लेने पर पूरा वेतन देना सरकार की जिम्मेदारी है और समान कार्य-समान वेतन का सिद्धांत लागू होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि पिछले छह वर्षों में वेतन से की गई कटौती की पूरी राशि प्रभावित कर्मचारियों को लौटाई जाए।
यह भी पढ़ें-युवती की संदिग्ध मौत के मामले में परिजनों ने किया चक्काजाम, दोस्त को गिरफ्तार करने की मांग
मुफ्त योजनाओं पर सवाल, एरियर जारी करने की मांग
अशोक पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहना समेत अन्य योजनाओं के तहत मुफ्त में धन बांट रही है, जबकि कर्मचारियों के हक का पैसा रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों का बकाया एरियर, जो करीब 20 वर्षों से लंबित है, तत्काल जारी किया जाए। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रखकर प्रदेश के सभी कर्मचारियों पर लागू किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विकास पर फोकस करना चाहिए, ताकि कर्मचारी पूरी क्षमता से प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए, तो 13 जनवरी 2026 को भोपाल में मंत्रालय का घेराव कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह भी पढ़ें-गोमांस विवाद पर कांग्रेस का निगम घेराव, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
बिना गलती इंक्रीमेंट रोके जाने पर नाराजगी
वेतन कटौती से प्रभावित कर्मचारी राहुल शर्मा ने बताया कि 2019 से पहले दो साल का प्रोबेशन पूरा होने पर दो इंक्रीमेंट मिलते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। उन्होंने मांग की कि पुरानी व्यवस्था फिर लागू की जाए। कर्मचारी सागर जैन ने कहा कि 2019 में नियुक्ति के बाद से उन्हें तीन इंक्रीमेंट का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर इंक्रीमेंट किसी गलती पर रोका जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश में बिना किसी गलती के ही यह रोक दी गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार हाईकोर्ट के फैसले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस कदम उठाएगी। कर्मचारी मंच ने साफ कर दिया है कि यदि हाईकोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुए सभी कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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पूरी राशि प्रभावित कर्मचारियों को लौटाई जाए
पांडेय के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश जारी कर नियुक्ति के पहले वर्ष में 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया था। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को बीते छह वर्षों में करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।अब हाईकोर्ट की डबल बेंच जस्टिस विवेक रसिया और जस्टिस दीपक कुमार ने 6 जनवरी 2026 को इस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि पूरा काम लेने पर पूरा वेतन देना सरकार की जिम्मेदारी है और समान कार्य-समान वेतन का सिद्धांत लागू होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि पिछले छह वर्षों में वेतन से की गई कटौती की पूरी राशि प्रभावित कर्मचारियों को लौटाई जाए।
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मुफ्त योजनाओं पर सवाल, एरियर जारी करने की मांग
अशोक पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहना समेत अन्य योजनाओं के तहत मुफ्त में धन बांट रही है, जबकि कर्मचारियों के हक का पैसा रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों का बकाया एरियर, जो करीब 20 वर्षों से लंबित है, तत्काल जारी किया जाए। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रखकर प्रदेश के सभी कर्मचारियों पर लागू किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विकास पर फोकस करना चाहिए, ताकि कर्मचारी पूरी क्षमता से प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए, तो 13 जनवरी 2026 को भोपाल में मंत्रालय का घेराव कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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बिना गलती इंक्रीमेंट रोके जाने पर नाराजगी
वेतन कटौती से प्रभावित कर्मचारी राहुल शर्मा ने बताया कि 2019 से पहले दो साल का प्रोबेशन पूरा होने पर दो इंक्रीमेंट मिलते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। उन्होंने मांग की कि पुरानी व्यवस्था फिर लागू की जाए। कर्मचारी सागर जैन ने कहा कि 2019 में नियुक्ति के बाद से उन्हें तीन इंक्रीमेंट का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर इंक्रीमेंट किसी गलती पर रोका जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश में बिना किसी गलती के ही यह रोक दी गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार हाईकोर्ट के फैसले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस कदम उठाएगी। कर्मचारी मंच ने साफ कर दिया है कि यदि हाईकोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुए सभी कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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