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Bhopal News: एमपी में नर्सिंग फैकल्टी भर्ती पर हाईकोर्ट की सख्ती, गजट उल्लंघन के आरोपों पर सरकार से जवाब तलब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 09 Jan 2026 06:02 PM IST
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सार
नर्सिंग फैकल्टी भर्ती में गजट अधिसूचना के उल्लंघन के आरोपों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा है, जिससे अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को राहत मिली।
ईएसबी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा जारी नर्सिंग फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। वर्ष 2024 की राजपत्र (गजट) अधिसूचना के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने साफ किया है कि यह भर्ती प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी, जिससे अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को बड़ी राहत मिली है।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और अंशुल तिवारी ने दलील दी कि 2024 की गजट अधिसूचना के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर के सभी पद पदोन्नति से भरे जाने थे, लेकिन इसके विपरीत चयन मंडल ने 40 पदों को सीधी भर्ती के तहत विज्ञापित कर दिया। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए निर्धारित 60 प्रतिशत पदोन्नति और 40 प्रतिशत सीधी भर्ती के प्रावधान को नजरअंदाज कर सभी पद सीधी भर्ती से भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
फैकल्टी संकट में ली सेवाएं, अब नजरअंदाज
याचिका में यह भी बताया गया कि सीबीआई जांच के बाद विभाग में फैकल्टी की भारी कमी उत्पन्न हो गई थी। उस दौरान शासन ने इन्हीं अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को अस्थायी प्रभार देकर वर्षों तक असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे पदों पर कार्य कराया। बावजूद इसके न तो उन्हें पदोन्नति दी गई और न ही नियमित किया गया, और अब सीधी भर्ती के जरिए उनके अवसर खत्म किए जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें-गोमांस विवाद पर कांग्रेस का निगम घेराव, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
67 नर्सिंग ऑफिसरों की याचिका
इस मामले में 67 नर्सिंग ऑफिसरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पास 10 से 25 वर्षों का अनुभव है और वे लंबे समय से संबंधित पदों पर अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे हैं।
यह भी पढ़ें-हाईकोर्ट के फैसले से कर्मचारियों में जोश, सरकार को अल्टीमेटम, आदेश नहीं माना तो मंत्रालय घेराव
तीन सप्ताह में जवाब के निर्देश
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ में हुई। अदालत ने प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पर
अंतिम फैसला न्यायालय के निर्णय के बाद ही प्रभावी माना जाएगा। अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश को प्रदेश के नर्सिंग समुदाय में अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों के अधिकारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित पदोन्नति और सीधी भर्ती को लेकर उठे सवाल अब सीधे न्यायिक समीक्षा के तहत आ गए हैं।
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याचिका में यह भी बताया गया कि सीबीआई जांच के बाद विभाग में फैकल्टी की भारी कमी उत्पन्न हो गई थी। उस दौरान शासन ने इन्हीं अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को अस्थायी प्रभार देकर वर्षों तक असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे पदों पर कार्य कराया। बावजूद इसके न तो उन्हें पदोन्नति दी गई और न ही नियमित किया गया, और अब सीधी भर्ती के जरिए उनके अवसर खत्म किए जा रहे हैं।
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67 नर्सिंग ऑफिसरों की याचिका
इस मामले में 67 नर्सिंग ऑफिसरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पास 10 से 25 वर्षों का अनुभव है और वे लंबे समय से संबंधित पदों पर अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे हैं।
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अंतिम फैसला न्यायालय के निर्णय के बाद ही प्रभावी माना जाएगा। अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश को प्रदेश के नर्सिंग समुदाय में अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों के अधिकारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित पदोन्नति और सीधी भर्ती को लेकर उठे सवाल अब सीधे न्यायिक समीक्षा के तहत आ गए हैं।

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