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कृषक कल्याण वर्ष: हर विस क्षेत्र में होंगे कृषि सम्मेलन,किराए पर मिलेंगे यंत्र; CM बोले-योजनाएं जमीन पर उतारें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 16 Mar 2026 09:47 PM IST
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सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए कई पहल की जा रही हैं। हर विधानसभा में कृषि सम्मेलन आयोजित होंगे और छोटे किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के दौरान विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और योजनाओं का लाभ सीधे उनके परिवारों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां किसानों को केवल 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जो किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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मुख्यमंत्री भोपाल में स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में आयोजित कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला समेत कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और एफपीओ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में कृषि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 5 लाख रुपये उपलब्ध कराएगा। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन आयोजित कर सकेंगे, जिससे किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और उद्योगों को साथ जोड़कर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कृषक कल्याण वर्ष के माध्यम से मध्यप्रदेश कृषि विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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लघु किसानों को किराए पर मिलेंगे कृषि यंत्र
सरकार छोटे किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा क्षेत्रों में कृषि यंत्रों की दुकानें खोली जाएंगी, जहां से छोटे किसान किराये पर कृषि यंत्र ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है।
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दूध उत्पादन में तेजी से वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश में दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर हो गया है। सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाना है। दूध के दाम में भी 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जिससे दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसा बनाने की मशीनें उपलब्ध करा रही है। साथ ही स्कूली बच्चों को पोषण देने के लिए माता यशोदा योजना के तहत नि:शुल्क दूध वितरण की पहल भी की जा रही है।
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सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए लगातार काम हो रहा है। आने वाले वर्षों में इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से सौर ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील भी की।
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दलहन उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभर रहा है। प्रदेश मसाले और दलहन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में वर्तमान में 4 हजार से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हो रही हैं। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 47 कंपनियों ने 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश के प्रस्ताव दिए हैं। प्रदेश का एग्री निर्यात अभी 18 हजार करोड़ रुपये है, जिसे वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।
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मछुआ समृद्धि योजना में 100 करोड़ का प्रावधान
कार्यशाला में मत्स्य विभाग ने बताया कि मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के तहत केज कल्चर योजना लागू की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग ने जानकारी दी कि किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
मखाने की खेती अब 10 और जिलों में होगी
ऊर्जा विभाग ने बताया कि एक हेक्टेयर तक भूमि वाले अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को पांच हॉर्सपावर तक के कृषि पंप पर मुफ्त बिजली दी जा रही है। साथ ही बकाया भुगतान पर सरचार्ज में छूट देने के लिए समाधान योजना भी चलाई जा रही है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार करने की योजना है। फल, सब्जी, मसाले, फूल और औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। अभी चार जिलों में शुरू हुई मखाना की खेती को बढ़ाकर 10 जिलों तक ले जाने की योजना बनाई गई है।
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मुख्यमंत्री भोपाल में स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में आयोजित कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला समेत कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और एफपीओ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में कृषि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 5 लाख रुपये उपलब्ध कराएगा। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन आयोजित कर सकेंगे, जिससे किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और उद्योगों को साथ जोड़कर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कृषक कल्याण वर्ष के माध्यम से मध्यप्रदेश कृषि विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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लघु किसानों को किराए पर मिलेंगे कृषि यंत्र
सरकार छोटे किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा क्षेत्रों में कृषि यंत्रों की दुकानें खोली जाएंगी, जहां से छोटे किसान किराये पर कृषि यंत्र ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है।
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दूध उत्पादन में तेजी से वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश में दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर हो गया है। सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाना है। दूध के दाम में भी 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जिससे दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसा बनाने की मशीनें उपलब्ध करा रही है। साथ ही स्कूली बच्चों को पोषण देने के लिए माता यशोदा योजना के तहत नि:शुल्क दूध वितरण की पहल भी की जा रही है।
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सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए लगातार काम हो रहा है। आने वाले वर्षों में इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से सौर ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील भी की।
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दलहन उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभर रहा है। प्रदेश मसाले और दलहन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में वर्तमान में 4 हजार से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हो रही हैं। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 47 कंपनियों ने 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश के प्रस्ताव दिए हैं। प्रदेश का एग्री निर्यात अभी 18 हजार करोड़ रुपये है, जिसे वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।
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मछुआ समृद्धि योजना में 100 करोड़ का प्रावधान
कार्यशाला में मत्स्य विभाग ने बताया कि मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के तहत केज कल्चर योजना लागू की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग ने जानकारी दी कि किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
मखाने की खेती अब 10 और जिलों में होगी
ऊर्जा विभाग ने बताया कि एक हेक्टेयर तक भूमि वाले अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को पांच हॉर्सपावर तक के कृषि पंप पर मुफ्त बिजली दी जा रही है। साथ ही बकाया भुगतान पर सरचार्ज में छूट देने के लिए समाधान योजना भी चलाई जा रही है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार करने की योजना है। फल, सब्जी, मसाले, फूल और औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। अभी चार जिलों में शुरू हुई मखाना की खेती को बढ़ाकर 10 जिलों तक ले जाने की योजना बनाई गई है।

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