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पाकिस्तान से ज्यादा हिन्दू आज एमपी में खतरे में: सिंघार बोले-भाजपा-आरएसएस सिर्फ वोट की राजनीति में व्यस्त

Mon, 07 Sep 2026 03:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 07 Sep 2026 03:47 PM IST
सार

सागर जहरीली शराब कांड पर उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के बाद हिंदू सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में खतरे में हैं और भाजपा-आरएसएस सिर्फ वोट की राजनीति कर रहे हैं। सिंघार ने जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की।

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Hindus in MP are in greater danger today than in Pakistan: Singhar says BJP-RSS are preoccupied solely with vo
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में लगातार लोगों की जान जा रही है, लेकिन भाजपा हिंदुओं के नाम पर सिर्फ वोट की राजनीति कर रही है। सिंघार ने कहा कि पाकिस्तान से ज्यादा आज हिन्दू मध्यप्रदेश में खतरे में है। उन्होंने इंदौर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और सागर की घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि हिंदुओं की मौत पर भाजपा और हिंदू संगठनों के नेता कहां हैं। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के पीड़ित परिवारों के बीच नहीं पहुंचने का आरोप भी लगाया। 
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सागर में 15 मौतों का दावा
सिंघार के मुताबिक सागर में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हुई है और 100 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। ताजा रिपोर्टों में भी मौतों का आंकड़ा 15 और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या करीब 109 बताई गई है। हालांकि शुरुआती सरकारी अपडेट में अलग-अलग समय पर मौतों का आंकड़ा 11-12 बताया गया था। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने युवा बेटे, पिता या परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य को खो दिया। ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी है।
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जहर बांटो योजना का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की शराब व्यवस्था पर हमला बोलते हुए इसे मोहन सरकार की जहर बांटो योजना करार दिया। उनका आरोप है कि अवैध और नकली शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था और शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
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हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बंडा क्षेत्र में कुछ जगहों पर शराब लाइसेंसी दुकानों से 40-50 रुपए तक सस्ती बेचे जाने का दावा किया गया है। सिंघार ने कहा कि जांच केवल शराब बेचने वाले छोटे लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह पता लगाया जाए कि जहरीला रसायन कहां से आया, शराब कहां तैयार हुई और उसे बोतल में भरने, लेबल लगाने, ढाबों और दुकानों तक पहुंचाने वाला पूरा नेटवर्क कौन चला रहा था।

सागर गोल्ड पर भी सरकार से सवाल
सिंघार ने सागर गोल्ड और दूसरी संदिग्ध शराब की जांच को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पहले शराब को रोकने और नमूने जांच के लिए भेजने की कार्रवाई की गई, लेकिन बाद में आदेश बदल दिया गया। उन्होंने पूछा कि एक ही दिन में ऐसा क्या बदल गया कि पहले शराब को सील-जप्त करने की जरूरत पड़ी और बाद में कार्रवाई की जरूरत नहीं बताई गई? सिंघार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। 

यूपी कनेक्शन पर भी सवाल
शराब की आपूर्ति को लेकर सामने आए उत्तर प्रदेश के ललितपुर कनेक्शन पर भी सिंघार ने सवाल उठाए। वहीं एक ताजा रिपोर्ट में सिंघार के हवाले से दावा किया गया है कि शराब उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के धार से आई थी। इन अलग-अलग दावों के बीच शराब की वास्तविक आपूर्ति श्रृंखला जांच का अहम हिस्सा बन गई है। 

अधिकारियों पर कार्रवाई, फिर भी सियासत तेज
घटना के बाद सरकार ने आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की है। तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित और एक अधिकारी को मुख्यालय से संबद्ध किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने भी मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके बावजूद सिंघार का कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शराब बनाने वाले से लेकर सप्लाई करने वाले और संरक्षण देने वाले तक पूरी कड़ी सामने आनी चाहिए।


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25 लाख रुपए मुआवजे की मांग
सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए सिंघार ने हर मृतक के परिवार को 25 लाख रुपए देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतकों में गरीब मजदूर और परिवार चलाने वाले लोग शामिल हैं। सरकार को उनके परिवारों के भविष्य की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। सिंघार ने कहा कि सागर की घटना सिर्फ जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला नहीं है, बल्कि यह अवैध शराब के पूरे नेटवर्क, प्रशासन की निगरानी और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।



 
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