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कैबिनेट:विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे 23,300 करोड़ रुपये से ज्यादा,जंगलों से लेकर सिंचाई तक बजट मंजूर
Tue, 03 Nov 2026 02:07 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 03 Nov 2026 02:07 PM IST
सार
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने 23,288 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को जारी रखने की मंजूरी दी है। साथ ही बैठक में जानकारी दी गई कि 18 नवंबर को गांधी सागर में कैबिनेट बैठक होगी।
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कैबिनेट बैठक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। सरकार ने जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा, सिंचाई परियोजनाओं, शहरों की सुविधाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी। सबसे बड़ी राशि वन विभाग की योजनाओं के लिए रखी गई है। वहीं, सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के लिए 4,103 करोड़ रुपये और शहरों में सड़क, पानी, सफाई जैसी सुविधाएं बढ़ाने के लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
कैबिनेट ने वन विभाग की नौ योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खर्च की जाएगी। इसमें सबसे ज्यादा 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये वन विभाग के कामकाज, मैदानी कार्यालयों और वन वृत्तों के संचालन पर खर्च होंगे। इसके अलावा क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख, राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख और लकड़ी उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के लिए 1,107 करोड़ 6 लाख रुपये रखे गए हैं। जू और रेस्क्यू सेंटर के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके तहत उज्जैन और जबलपुर में नए केंद्र भी बनाए जाएंगे। इन योजनाओं में जंगलों की सुरक्षा, बाघों की निगरानी, वनकर्मियों को प्रशिक्षण और वन्यजीवों के बचाव जैसे काम शामिल हैं। प्रदेश के नौ टाइगर रिजर्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों के संरक्षण पर भी राशि खर्च होगी।
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छह जिलों की सिंचाई परियोजनाओं को मिले 4,103 करोड़
कैबिनेट ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की चार सिंचाई परियोजनाओं को आगे जारी रखने के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इन परियोजनाओं से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ कुछ क्षेत्रों की पेयजल जरूरत भी पूरी होगी। - पन्ना की मझगांव परियोजना: इसके लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। परियोजना से 13,060 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई की सुविधा विकसित होगी।
- विदिशा की टेम मध्यम परियोजना: इसके लिए 277 करोड़ 52 लाख रुपये मिलेंगे। इससे 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा। आसपास के इलाकों की पेयजल जरूरत भी पूरी होगी।
- सीतापुर-हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना: मऊगंज, सीधी और सिंगरौली के लिए बन रही इस परियोजना पर 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये खर्च होंगे। सोन नदी पर बैराज बनाकर 1.20 लाख हेक्टेयर जमीन तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाने की योजना है।
- सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: उज्जैन में शिप्रा नदी में सालभर पानी बनाए रखने के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। बारिश के दौरान शिप्रा का पानी सिलारखेड़ी बांध में जमा किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक वापस नदी में छोड़ा जाएगा।
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शहरों में सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट के लिए 700 करोड़
शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो साल और जारी रखने का फैसला किया गया है। इसके लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना की अवधि 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक रहेगी। इस राशि से शहरों में पेयजल व्यवस्था, सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और सामुदायिक भवनों से जुड़े काम कराए जाएंगे। श्मशान घाट, रैन बसेरे और खेल मैदानों जैसी सुविधाओं पर भी खर्च किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े काम भी इस योजना में शामिल हैं।
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स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा
प्रदेश में अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार 610 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च करेगी। इसके लिए उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पूंजीगत सुविधाएं विकसित करने पर सब्सिडी दी जाती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी।
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लोकायुक्त संगठन के संचालन पर खर्च होंगे 573 करोड़
कैबिनेट ने लोकायुक्त संगठन के कामकाज के लिए अगले पांच साल में 573 करोड़ 85 लाख रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इसमें 553 करोड़ 85 लाख रुपये वेतन, कार्यालय संचालन और अन्य खर्चों के लिए हैं, जबकि 20 करोड़ रुपये विभाग की संपत्तियों के रखरखाव पर खर्च होंगे। यह राशि 2026 से 2031 की अवधि के लिए है।
जबलपुर के जनजातीय संग्रहालय में एक नया पद
जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के बेहतर संचालन के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी का एक नियमित पद मंजूर किया गया है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी संग्रहालय की देखरेख, प्रशासनिक कामकाज और दूसरे विभागों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके संचालन और रखरखाव पर सालाना 83 लाख 18 हजार रुपये खर्च होंगे।
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कैबिनेट ने वन विभाग की नौ योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खर्च की जाएगी। इसमें सबसे ज्यादा 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये वन विभाग के कामकाज, मैदानी कार्यालयों और वन वृत्तों के संचालन पर खर्च होंगे। इसके अलावा क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख, राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख और लकड़ी उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के लिए 1,107 करोड़ 6 लाख रुपये रखे गए हैं। जू और रेस्क्यू सेंटर के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके तहत उज्जैन और जबलपुर में नए केंद्र भी बनाए जाएंगे। इन योजनाओं में जंगलों की सुरक्षा, बाघों की निगरानी, वनकर्मियों को प्रशिक्षण और वन्यजीवों के बचाव जैसे काम शामिल हैं। प्रदेश के नौ टाइगर रिजर्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों के संरक्षण पर भी राशि खर्च होगी।
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छह जिलों की सिंचाई परियोजनाओं को मिले 4,103 करोड़
कैबिनेट ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की चार सिंचाई परियोजनाओं को आगे जारी रखने के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इन परियोजनाओं से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ कुछ क्षेत्रों की पेयजल जरूरत भी पूरी होगी। - पन्ना की मझगांव परियोजना: इसके लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। परियोजना से 13,060 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई की सुविधा विकसित होगी।
- विदिशा की टेम मध्यम परियोजना: इसके लिए 277 करोड़ 52 लाख रुपये मिलेंगे। इससे 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा। आसपास के इलाकों की पेयजल जरूरत भी पूरी होगी।
- सीतापुर-हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना: मऊगंज, सीधी और सिंगरौली के लिए बन रही इस परियोजना पर 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये खर्च होंगे। सोन नदी पर बैराज बनाकर 1.20 लाख हेक्टेयर जमीन तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाने की योजना है।
- सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: उज्जैन में शिप्रा नदी में सालभर पानी बनाए रखने के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। बारिश के दौरान शिप्रा का पानी सिलारखेड़ी बांध में जमा किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक वापस नदी में छोड़ा जाएगा।
ये भी पढ़ें- माफी के बाद भी निशाने पर बाबा बागेश्वर: दिग्विजय ने कसा तंज, भूपेश बोले- केमिकल लोचा है, इनकी रेबीज की जांच हो
शहरों में सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट के लिए 700 करोड़
शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो साल और जारी रखने का फैसला किया गया है। इसके लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना की अवधि 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक रहेगी। इस राशि से शहरों में पेयजल व्यवस्था, सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और सामुदायिक भवनों से जुड़े काम कराए जाएंगे। श्मशान घाट, रैन बसेरे और खेल मैदानों जैसी सुविधाओं पर भी खर्च किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े काम भी इस योजना में शामिल हैं।
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स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा
प्रदेश में अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार 610 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च करेगी। इसके लिए उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पूंजीगत सुविधाएं विकसित करने पर सब्सिडी दी जाती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी।
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लोकायुक्त संगठन के संचालन पर खर्च होंगे 573 करोड़
कैबिनेट ने लोकायुक्त संगठन के कामकाज के लिए अगले पांच साल में 573 करोड़ 85 लाख रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इसमें 553 करोड़ 85 लाख रुपये वेतन, कार्यालय संचालन और अन्य खर्चों के लिए हैं, जबकि 20 करोड़ रुपये विभाग की संपत्तियों के रखरखाव पर खर्च होंगे। यह राशि 2026 से 2031 की अवधि के लिए है।
जबलपुर के जनजातीय संग्रहालय में एक नया पद
जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के बेहतर संचालन के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी का एक नियमित पद मंजूर किया गया है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी संग्रहालय की देखरेख, प्रशासनिक कामकाज और दूसरे विभागों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके संचालन और रखरखाव पर सालाना 83 लाख 18 हजार रुपये खर्च होंगे।
