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एमपी: मंत्री उदय प्रताप सिंह बोले-राहुल गांधी की राजनीति 30 साल पीछे चल रही, 26 की उम्र वाला काम 57 में कर रहे
Wed, 30 Sep 2026 06:17 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:17 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति करीब 30 साल पीछे चल रही है और अब वे पुरानी परिस्थितियों के हिसाब से राजनीति कर रहे हैं।
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मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राव उदय प्रताप सिंह।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में करीब 30 साल की देरी से चल रहे हैं। जो काम एक युवा राजनेता को 25 से 28 वर्ष की उम्र में करना चाहिए, वह राहुल गांधी 56-57 वर्ष की उम्र में कर रहे हैं। मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी हर काम विलंब से करते हैं और बालाघाट की मौजूदा परिस्थितियों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। 30 सितंबर को मीडिया से बातचीत में उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वह राहुल गांधी के बारे में कम बोलना पसंद करते हैं, क्योंकि उनके अनुसार राहुल गांधी के राजनीतिक कामकाज में समय का तालमेल नहीं दिखाई देता। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जब बोलने का समय होता है तो कांग्रेस के नेता नहीं बोलते और जब कुछ करने का समय आता है तो वे पीछे हट जाते हैं।
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'जब नक्सलवाद चरम पर था, तब बालाघाट क्यों नहीं पहुंचे'
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने वर्ष 1999 की नक्सली घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय बालाघाट में तत्कालीन सरकार के एक मंत्री की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। मंत्री के मुताबिक, उस समय राहुल गांधी राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन उन्होंने वहां जाकर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त नहीं की। उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जब बालाघाट समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार घटनाएं हो रही थीं और नक्सलवाद अपने प्रभाव में था, तब राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मिलने की चिंता नहीं की। अब बीमारी और मौसम की वजह से बनी अलग परिस्थितियों में उनका बालाघाट जाना और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
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अमित शाह और मोहन यादव के प्रयासों का किया जिक्र
मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से बालाघाट और आसपास के इलाकों में परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है। उनके मुताबिक, नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद ही सरकार और प्रशासन की पहुंच उन इलाकों तक बढ़ी। अधिकारी वहां पहुंचने लगे और दूरदराज के गांवों को कस्बों और शहरों से जोड़ने का काम तेज हुआ। मंत्री ने विशेष रूप से बैगा समाज के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का दावा किया।
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'राहुल का दौरा संवेदना नहीं, राजनीतिकरण के लिए'
उदय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बालाघाट दौरा संवेदना के लिए नहीं बल्कि राजनीतिकरण के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस और राहुल गांधी को वास्तव में वहां के लोगों की चिंता थी तो पहले भी नक्सल हिंसा के दौरान पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचना चाहिए था। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने गंभीरता से काम किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से हालात में बदलाव आया है। ऐसे समय में सकारात्मक बदलावों को स्वीकार करने के बजाय राजनीतिक कारणों से माहौल खराब करना उचित नहीं है।
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'जब नक्सलवाद चरम पर था, तब बालाघाट क्यों नहीं पहुंचे'
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने वर्ष 1999 की नक्सली घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय बालाघाट में तत्कालीन सरकार के एक मंत्री की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। मंत्री के मुताबिक, उस समय राहुल गांधी राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन उन्होंने वहां जाकर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त नहीं की। उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जब बालाघाट समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार घटनाएं हो रही थीं और नक्सलवाद अपने प्रभाव में था, तब राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मिलने की चिंता नहीं की। अब बीमारी और मौसम की वजह से बनी अलग परिस्थितियों में उनका बालाघाट जाना और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
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अमित शाह और मोहन यादव के प्रयासों का किया जिक्र
मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से बालाघाट और आसपास के इलाकों में परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है। उनके मुताबिक, नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद ही सरकार और प्रशासन की पहुंच उन इलाकों तक बढ़ी। अधिकारी वहां पहुंचने लगे और दूरदराज के गांवों को कस्बों और शहरों से जोड़ने का काम तेज हुआ। मंत्री ने विशेष रूप से बैगा समाज के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का दावा किया।
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'राहुल का दौरा संवेदना नहीं, राजनीतिकरण के लिए'
उदय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बालाघाट दौरा संवेदना के लिए नहीं बल्कि राजनीतिकरण के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस और राहुल गांधी को वास्तव में वहां के लोगों की चिंता थी तो पहले भी नक्सल हिंसा के दौरान पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचना चाहिए था। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने गंभीरता से काम किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से हालात में बदलाव आया है। ऐसे समय में सकारात्मक बदलावों को स्वीकार करने के बजाय राजनीतिक कारणों से माहौल खराब करना उचित नहीं है।
