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मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड : संपत्तियों को नियम विरुद्ध दिया किराए पर, दो करोड़ से ज्यादा का नुकसान, FIR दर्ज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 03 Jan 2026 06:39 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की 185 संपत्तियों को नियमों की अनदेखी कर कम किराए पर दिए जाने और बिना अनुमति निर्माण कराने के मामले में EOW ने FIR दर्ज की। इस वजह से बोर्ड को करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये की आर्थिक हानि हुई है।

MP News: Waqf Board properties illegally leased, causing a loss of ₹2.54 crore; FIR registered with EOW.
वक्फ बोर्ड, एमपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों को नियमों की अनदेखी कर किराए पर देने और बोर्ड को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बाद वक्फ बोर्ड के तत्कालीन पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। इस पूरे मामले में वक्फ बोर्ड को करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक हानि होने की बात सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव की शिकायत पर कार्रवाई की है। उप सचिव ने 27 जुलाई 2023 को भेजी शिकायत के साथ वक्फ बोर्ड से संबंधित दस्तावेज और पूर्व जांच समिति की रिपोर्ट भी संलग्न थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि वक्फ बोर्ड की औकाफ आम्मा संपत्तियों को वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 का उल्लंघन करते हुए लीज पर दिया गया और कई स्थानों पर बिना अनुमति स्थायी निर्माण की स्वीकृति दी गई।
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शिकायत के आधार पर EOW ने 3 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक जांच क्रमांक 03/2023 दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच गठित “इंतजामिया कमेटी औकाफ आम्मा, भोपाल” के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। इस 11 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष शौकत मोहम्मद थे, जबकि फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर सचिव पद पर कार्यरत थे। जांच में यह सामने आया कि समिति को गठन आदेश में ही यह शर्त दी गई थी कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना किसी भी संपत्ति को लीज पर नहीं दिया जा सकता और न ही कोई स्थायी निर्माण कराया जा सकता है। इसके बावजूद करीब 185 वक्फ संपत्तियों में किरायेदारी परिवर्तन कर दिए गए। इन मामलों में पुराने किरायेदारों को हटाकर नए लोगों को बिना पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए संपत्तियां दे दी गईं।

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EOW की जांच में पाया गया कि इन संपत्तियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 83,390 वर्गफुट था, जिनकी कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार कीमत 59 करोड़ रुपये से अधिक थी। नियमों के अनुसार इनसे हर साल करीब 2 करोड़ 76 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था, लेकिन वास्तव में केवल 21 लाख रुपये के आसपास ही किराया वसूला गया। इससे वक्फ बोर्ड को हर साल करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

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जांच में यह भी सामने आया कि संपत्तियां देने से पहले न तो सार्वजनिक सूचना जारी की गई, न ही विज्ञापन या बोली प्रक्रिया अपनाई गई। कई मामलों में बिना अनुमति स्थायी निर्माण भी कराया गया। जांच पूरी होने के बाद EOW ने शौकत मोहम्मद, फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
  
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