Burhanpur News: नेपानगर नागरिक बैंक घोटाला, 8.85 करोड़ की ठगी, पीड़ित जमाकर्ताओं ने विधायक से लगाई गुहार
नेपानगर नागरिक बैंक घोटाले के पीड़ित जमाकर्ताओं ने विधायक मंजू दादू से मुलाकात कर वर्षों से फंसी राशि वापस दिलाने की मांग की। 8.85 करोड़ के गबन में 16 आरोपी गिरफ्तार हैं, पर भुगतान नहीं हुआ। विधायक ने कोर्ट के जरिए संपत्ति कुर्क कर राशि दिलाने का आश्वासन दिया।
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बुरहानपुर जिले के नेपानगर स्थित बहुचर्चित नागरिक बैंक घोटाले के पीड़ित जमाकर्ताओं ने आखिरकार अपनी पीड़ा लेकर नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू से मुलाकात की। नेपा मिल गेस्ट हाउस में हुई इस मुलाकात में पीड़ितों ने वर्षों से फंसी अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की गुहार लगाई। पीड़ितों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व बैंक के कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से 8 करोड़ 85 लाख रुपये का गबन किया। पुलिस ने इस मामले में 16 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब तक जमाकर्ताओं की राशि की वसूली नहीं हो सकी।
पीड़ित रामचरण परमार ने बताया कि उनकी 6 लाख रुपये की राशि 7–8 वर्षों से जमा है, न तो मूलधन मिला और न ही ब्याज। वहीं नौशाद ने बताया कि उनकी 4 लाख और 1 लाख की एफडी में से आंशिक भुगतान हुआ है, लेकिन शेष राशि अब तक नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है, लेकिन पैसों के अभाव में इलाज अटका है। देवेंद्र कुमार जैन ने बताया कि उनकी 10 साल पुरानी एफडी में 1 लाख 36 हजार रुपये जमा थे। पहले बैंक द्वारा 500–1000 रुपये की आंशिक राशि दी जाती थी, लेकिन अब वह भी बंद कर दी गई है।
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बुजुर्ग कैलाश राजपूत ने बताया कि उन्होंने 2018 में 7 लाख 12 हजार की एफडी कराई थी, जो 2021 में क्लोज हो गई, लेकिन आज तक पूरी राशि नहीं मिली। उन्होंने कहा कि पुणे में इलाज चल रहा है और सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। सभी पीड़ितों ने एक स्वर में विधायक से न्याय और त्वरित समाधान की मांग की।
इस पर विधायक मंजू दादू ने पीड़ितों की बातें गंभीरता से सुनते हुए कहा कि इस मामले का समाधान आंदोलन से नहीं, बल्कि कानूनी और ठोस प्रक्रिया से ही संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोर्ट के माध्यम से आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर उसे बेचने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पीड़ित जमाकर्ताओं को उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जा सके। नागरिक बैंक घोटाले ने न सिर्फ आर्थिक भरोसे को तोड़ा है, बल्कि बुजुर्गों और बीमार जमाकर्ताओं को इलाज तक के लिए मोहताज कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था पीड़ितों को कब तक राहत दिला पाती है।

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