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छिंदवाड़ा के स्कूल में हंगामा: प्रभारी प्राचार्य और अतिथि शिक्षक का वीडियो वायरल, छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
Wed, 19 Aug 2026 10:32 AM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 10:32 AM IST
सार
छिंदवाड़ा के बिचबरी स्थित मिडिल स्कूल का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने अतिथि शिक्षक दीपिका ठाकरे और प्रभारी प्राचार्य लोकेंद्र लोधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में भी मामले की शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।
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फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
छिंदवाड़ा जिले से करीब 100 किलोमीटर दूर भूरा भगत क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिचबरी स्थित मिडिल स्कूल इन दिनों एक कथित वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में है। वीडियो के आधार पर स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अतिथि शिक्षक दीपिका ठाकरे और प्रभारी प्राचार्य लोकेंद्र लोधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के बजाय दोनों के बीच कथित तौर पर प्रेम संबंधों जैसी स्थिति दिखाई देती है।
मामला सामने आने के बाद मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में भी संबंधित शिक्षकों के खिलाफ शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कराने और स्कूल में विद्यार्थियों के लिए उचित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की मांग की है।
छात्रों ने लगाए कई आरोप
वायरल वीडियो और शिकायत में छात्रों द्वारा कथित रूप से कहा जा रहा है कि स्कूल में अतिथि शिक्षक और प्रभारी प्राचार्य के बीच आपत्तिजनक नजदीकियां रहती हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों स्कूल परिसर में एक-दूसरे के साथ निजी समय बिताते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच भी मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक विद्यार्थियों के लिए अनुशासन और आदर्श व्यवहार का उदाहरण होते हैं। ऐसे में यदि वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मामला होगा।
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ये भी पढ़ें- MP Weather: मध्य प्रदेश में फिर बरसेंगे बादल, तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट; अगले चार दिन बढ़ेगा बारिश का दायरा
जनसुनवाई में भी पहुंची शिकायत
मामले को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही वायरल वीडियो की भी जांच कर वास्तविकता सामने लाने का अनुरोध किया गया है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, केवल वायरल वीडियो और छात्रों के आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पूरे मामले की विभागीय जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। अब सवाल यह है कि स्कूल परिसर में वास्तव में क्या हुआ और वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है? शिक्षा विभाग यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराता है तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस घटना ने स्कूलों में शिक्षकों के आचरण, अनुशासन और विद्यार्थियों को मिलने वाले शैक्षणिक माहौल को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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मामला सामने आने के बाद मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में भी संबंधित शिक्षकों के खिलाफ शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कराने और स्कूल में विद्यार्थियों के लिए उचित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की मांग की है।
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छात्रों ने लगाए कई आरोप
वायरल वीडियो और शिकायत में छात्रों द्वारा कथित रूप से कहा जा रहा है कि स्कूल में अतिथि शिक्षक और प्रभारी प्राचार्य के बीच आपत्तिजनक नजदीकियां रहती हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों स्कूल परिसर में एक-दूसरे के साथ निजी समय बिताते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच भी मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक विद्यार्थियों के लिए अनुशासन और आदर्श व्यवहार का उदाहरण होते हैं। ऐसे में यदि वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मामला होगा।
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जनसुनवाई में भी पहुंची शिकायत
मामले को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही वायरल वीडियो की भी जांच कर वास्तविकता सामने लाने का अनुरोध किया गया है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, केवल वायरल वीडियो और छात्रों के आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पूरे मामले की विभागीय जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। अब सवाल यह है कि स्कूल परिसर में वास्तव में क्या हुआ और वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है? शिक्षा विभाग यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराता है तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस घटना ने स्कूलों में शिक्षकों के आचरण, अनुशासन और विद्यार्थियों को मिलने वाले शैक्षणिक माहौल को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
