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Damoh News: फिर खतरे में दमोह नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव पर रोक का एक साल पूरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Tue, 05 Aug 2025 10:16 AM IST
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सार

मोह नगर पालिका अध्यक्ष मंजू वीरेंद्र राय के खिलाफ एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू हो गई है। भाजपा पार्षद पहले भी यह प्रस्ताव ला चुके थे, लेकिन अगस्त 2023 में राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव कर प्रस्ताव लाने की अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी थी, जिससे मामला टल गया था। 

Damoh Nagar Palika president's chair in danger again
दमोह नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ फिर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मध्य प्रदेश के दमोह नगर पालिका में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष मंजू वीरेंद्र राय के खिलाफ भाजपा पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, पिछले वर्ष सरकार द्वारा नियमों में बदलाव कर अविश्वास प्रस्ताव लाने की न्यूनतम अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया था। अब अध्यक्ष का तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने को है, जिससे फिर से अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है।
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ज्ञात हो कि अगस्त 2022 में कांग्रेस की मंजू वीरेंद्र राय ने नगर पालिका अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने उन्हें हटाने के लिए कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, जिसकी वोटिंग के लिए तिथि भी निर्धारित की गई थी। लेकिन अगस्त 2023 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 43-क में संशोधन करते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने की न्यूनतम अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया था। साथ ही यह भी प्रावधान जोड़ा गया था कि अब प्रस्ताव लाने के लिए पार्षदों की संख्या तीन-चौथाई होनी चाहिए, जबकि पहले यह दो-तिहाई थी।
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इस संशोधन के चलते प्रस्ताव पर रोक लग गई थी और उच्च न्यायालय से भी स्थगन आदेश मिल गया था। इस कारण पिछले वर्ष प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं हो सकी थी और मामला एक साल के लिए टल गया था। अब जबकि अध्यक्ष का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने वाला है, भाजपा खेमे में फिर से हलचल शुरू हो गई है।

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दमोह नगर पालिका में कुल 39 वार्ड हैं। प्रारंभिक स्थिति में भाजपा के 14, कांग्रेस के 17, टीएसएम (सिद्धार्थ मलैया समर्थक) के 5, बसपा का 1 और 2 निर्दलीय पार्षद थे। लेकिन बाद में टीएसएम के पांचों पार्षद और दो निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गए, जिससे भाजपा के पार्षदों की संख्या बढ़कर 21 हो गई थी। इनमें से 20 पार्षदों ने पिछले वर्ष अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आवेदन दिया था। अब जबकि कार्यकाल की निर्धारित तीन साल की अवधि पूरी होने को है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाकर नगर पालिका की कमान अपने हाथों में लेने की कोशिश कर सकती है। आने वाले दिनों में दमोह नगर पालिका में बड़ी राजनीतिक उठापटक की संभावना है।
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