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Dewas: प्रति रजिस्ट्री लेती थी डेढ़ हजार घूस, लोकायुक्त पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, हो सकती है चार साल की सजा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 13 Dec 2024 10:02 PM IST
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सार
देवास पंजीयन कार्यालय में प्रदेश उप पंजीयक अंजली मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति पर प्रति रजिस्ट्री 1,500 रुपये की वसूली करने के आरोप लगाए गए हैं। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देवास जिले में उप पंजीयक अंजली मिश्रा और प्राइवेट व्यक्ति राहुल प्रजापत के विरुद्ध धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध डीजी लोकायुक्त जयदीप प्रसाद के निर्देशन में अभियान जारी है।
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बता दें कि इसी क्रम में आवेदक शीतल गहलोत पार्षद वॉर्ड 30 और एमआईसी सदस्य प्रभारी शहरी गरीबी उपशमन विभाग निवासी बजरंग नगर देवास ने दिनांक 11/12/24 को लोकायुक्त में शिकायत की थी कि मेरे द्वारा बालाजी सर्विस प्रोवाइडर के नाम से रजिस्ट्री का कार्य किया जाता है। मेरे कार्यालय से की गई रजिस्ट्री लेने गया तो अंजली मिश्रा ने 1500 रुपये रिश्वत की मांग की।
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शिकायत का सत्यापन प्रभारी SP राजेश पाठक ने डीएसपी सुनील तालान से कराया तो शिकायत सही पाई गई। इसलिए धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) एवं 61(2) भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत अंजली मिश्रा एवं राहुल प्रजापत के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर विवेचना जारी है।
आरोप सिद्ध हो जाने पर चार साल तक की सजा
लोकायुक्त डीएसपी ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उसमें आरोप सिद्ध हो जाने पर चार साल तक की सजा हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि लोकायुक्त पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस सारे सबूत न्यायालय के समक्ष पेश करेगी।
पुलिस ने नाबालिग को बचाया
देवास जिले में कन्नौद थाना क्षेत्र के डोकाकुई में एक नाबालिग लड़की कुएं पर खुदकुशी करने के लिए पहुंच गई। जब वह कुएं की पाल पर बैठ गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दिया। पुलिस मौके पर पहुंची, बालिका को सुरक्षित बचाने के लिए एक महिला आरक्षक को लड़की के पास भेजा। जहां महिला आरक्षक ने लड़की से संवाद किया और बालिका को जिंदगी कीमत समझाई, फिर उसे सुरक्षित तरीके से कुएं की पाल से हटा दिया, परिजनों के साथ मारपीट के चलते बालिका नाराज थी।
बालिका की मां के साथ में कुछ लोगों ने की थी मारपीट
मामले में बालिका की मां के साथ मारपीट करने के मामले में लड़की इतनी परेशान हो गई थी कि उसने अपनी जान देने की स्थिति बना ली थी, जिसके बाद में पुलिस ने आरोपियों पर प्रकरण दर्ज किया है। नाबालिग बालिका को बचाने में कन्नौद थाना प्रभारी तहजीब काजी, उनि दीपक भोंडे, आरक्षक निकेतन परमार, शैलेंद्र करमोदिया, आरक्षक मुस्कान चौहान का सराहनीय योगदान रहा। एसपी पुनीत गेहलोद ने टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
बालिका को बचाने में महिला आरक्षक टीआई की रही मुख्य भूमिका
लड़की को बचाने वाली वाली आरक्षक मुस्कान चौहान ने बताया, टीआई के निर्देश पर मैं धीरे-धीरे बालिका के पास पहुंची। वह एक पतली मुंडेर पर कुएं में पैर लटका कर बैठी थी। मैंने कुछ दूर पहुंचकर उससे कहा कि तुम्हारी मदद करने आई हूं। लेकिन कुछ नहीं बोली। मैंने कहा, मुझसे बात करो, मैं तुम्हारी बहन जैसी हूं। इस दौरान दो-तीन बार बालिका ने कहा कि दीदी आगे आए तो मैं कूद जाऊंगी। इस पर मैं कुछ दूरी पर बैठ गई। उसका कहना था कि मैं मरना चाहती हूं और मुझे मदद की कोई जरूरत नहीं है, दीदी आप चलो जाओ। बातचीत करते-करते में उसके पास पहुंची और दो-तीन फीट दूर से छलांग लगाकर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे जमीन पर गिरा दिया। उसने छूटने का प्रयास भी किया। लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। इसके बाद सभी आ गए और में उसे गले लगाकर कुएं से दूर ले गई। अधिकारी अगर साथ नहीं होते तो मुझमें भी इतनी हिम्मत नहीं आती।

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