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Dhar Bhojshala: भोजशाला मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने रखा आदेश सुरक्षित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 12 May 2026 06:21 PM IST
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सार

धार भोजशाला मामले में लंबे समय से चल रही सुनवाई अब पूरी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।  अब सभी की नजरें कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।

Dhar Bhojshala: After the completion of hearing in Bhojshala case, the court reserved the order.
धार भोजशाला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से चल रही सुनवाई अब पूरी हो गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब सभी को कोर्ट के आदेश का बेसब्री से इंतजार है। मंगलवार को हाईकोर्ट में इस केस की अंतिम बहस थी। लंबी चली बहस में सभी पक्षों ने मजबूती से अपने तर्क रखे हैं।
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भोजशाला के मालिकाना हक को लेकर वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ से इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। विवादित परिसर भोजशाला है या कमाल मौला मस्जिद, इसे तय करने के लिए हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सर्वे करने के लिए कहा था। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे कर दो हजार से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि भोजशाला एक मंदिर था और उसे 12वीं शताब्दी में बनाया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराई थी और सर्वे की वीडियोग्राफी भी मुहैया कराने की मांग की थी। कोर्ट के निर्देश पर सभी पक्षकारों को वीडियोग्राफी भी मुहैया कराई गई थी।


सुनवाई में हिंदू पक्ष की ओर मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भोजशाला के मंदिर होने के तर्क रखे थे। उनका कहना था कि हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज़ बंद हो। इसके अलावा भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त करने की मांग भी रखी गई। वहीं ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को फिर भोजशाला में लाकर स्थापित करने की बात कही गई। सुनवाई के दौरान एएसआई ने भी अपना पक्ष रखा और कहा था कि वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था।

धार भोजशाला मामले में जारी सुनवाई में हाईकोर्ट ने एएसआई को अपना पक्ष रखने का मौका दिया। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे किया था। एएसआई के वकील ने कहा कि वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था। एएसआई की दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्राप्त स्थापत्य अवशेष, मूर्तियों के खंड, साहित्यिक ग्रंथों वाले बड़े शिलालेख, स्तंभों पर नागकर्णिका अभिलेख आदि इस बात का संकेत देते हैं कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा एक बड़ा ढांचा मौजूद था। वैज्ञानिक जांच और उत्खनन में मिले पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर इस पूर्ववर्ती संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।

उधर मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि जमीन का मालिकाना हक तय करने के लिए जो खसरे और ऋण पुस्तिका होती हैं, उसमें भोजशाला का उल्लेख है और जब देश स्वतंत्र हुआ था, तब परिसर में मस्जिद थी और वहां नमाज़ भी होती थी। मुस्लिम पक्ष ने इस केस को सिविल मामला भी बताया है।
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