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Indore:मुस्लिम समाज धार भोजशाला के सर्वे को हाईकोर्ट में देगा चुनौती, याचिका लगाने की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 25 Feb 2026 11:42 AM IST
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सार

धार की ऐतिहासिक भोजशाला में एएसआई के सर्वे पर विवाद गहरा गया है। मुस्लिम समाज ने सर्वे के उन निष्कर्षों को खारिज कर दिया है जिनमें मस्जिद के निर्माण में मंदिर के अवशेषों के उपयोग की बात कही गई है। इस सर्वे को वे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। 

Indore: Dhar's Muslim community challenges the survey of Dhar Bhojshala in the High Court, preparing to file a
धार भोजशाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोजशाला को लेकर एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर धार के मुस्लिम समाज ने एतराज जताया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए अलग से एक याचिका दायर करने की तैयारी की है। उनका कहना है कि सर्वे के  निष्कर्ष गलत हैं, जिनमें यह कहा गया है कि कमाल मौला मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था।

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मुस्लिम पक्ष ने 1903 के ब्रिटिश काल के एक एएसआई सर्वेक्षण का हवाला भी दिया है, जिसमें इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया था। इसे एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक मस्जिद थी, यह एक मस्जिद है और वहां नमाज जारी रहेगी। उनके अनुसार, मस्जिद का निर्माण निजामुद्दीन औलिया के खलीफा कमाल मौलाना द्वारा किया गया था, जो इस्लाम के प्रचार के लिए 1295 में धार आए थे। उन्हें मालवा शासक महमूद खिलजी द्वारा भूमि प्रदान की गई थी।

उस भूमि पर मदरसे और मस्जिदें स्थापित की गई थीं। इसके लिए राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया, क्योंकि भारी सामग्री का परिवहन कठिन था। निर्माताओं ने पास के राजा भोज के महल के पत्थरों का उपयोग किया।


उनका दावा है कि राजा भोज का महल चालुक्य-सोलंकी राजवंश के शासकों ने तोड़ा था और उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल यहां हुआ है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर दावे, आपत्तियां व सुझाव देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

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