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Indore News: क्या बेटियां बदलेंगी विज्ञान की दुनिया? स्टूडेंट्स के पोस्टर और क्विज में दिखा नया भारत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 25 Feb 2026 06:57 AM IST
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सार
Indore News: एसजीएसआईटीएस में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर विज्ञान सप्ताह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में पोस्टर मेकिंग और क्विज जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को वैज्ञानिक नवाचार के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. वंचना सिंह परिहार ने छात्रों को दिया मार्गदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई है। संस्थान के एप्लाइड केमिस्ट्री विभाग द्वारा मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भोपाल के सहयोग से इस आयोजन का भव्य शुभारंभ किया गया।
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विज्ञान और विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका बताई
उद्घाटन सत्र के दौरान विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र में विज्ञान के क्रमिक विकास और भारत की सर्वांगीण प्रगति में महिलाओं द्वारा निभाए जा रहे निर्णायक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश के विकास की गति को तेज करने के लिए वैज्ञानिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
प्रेरणादायी किस्सों से छात्रों को दिया मार्गदर्शन
संस्थान के निदेशक ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विश्व की महान महिला वैज्ञानिकों के जीवन और उनके संघर्षों की कहानियां साझा कीं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इन वैज्ञानिक विभूतियों का जीवन प्रेरणा का स्रोत है और छात्रों को उनके पदचिन्हों पर चलते हुए नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. वंचना सिंह परिहार थीं, जो मध्य प्रदेश शासन के वन स्टॉप सेंटर (सखी) में महिला सशक्तिकरण अधिकारी एवं प्रशासक के रूप में कार्यरत हैं। विद्या गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित डॉ. परिहार जल्द ही सिंगापुर के SASS सम्मेलन में इंजीनियरिंग क्षेत्र में व्याप्त लैंगिक रूढ़ियों पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने वाली हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया।
लक्ष्य को पाने के लिए सही अवसर मिलना जरूरी
अपने संबोधन में डॉ. परिहार ने कहा कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सही अवसर और एक्सपोजर मिलना बहुत जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, वास्तुकला और सिविल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता की सराहना की। उन्होंने छात्राओं को पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर चुनौतीपूर्ण करियर चुनने के लिए प्रेरित किया और कल्पना चावला एवं सुनीता विलियम्स जैसी दिग्गजों का उदाहरण दिया। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बेहतर एक्सपोजर ही आत्मविश्वास और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. नितीश गुप्ता और डॉ. उर्मिला रघुवंशी ने आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विज्ञान सप्ताह के दौरान वाद-विवाद प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, पोस्टर निर्माण और क्विज जैसी विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम में भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. जे. टी. एंड्रयूज सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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उद्घाटन सत्र के दौरान विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र में विज्ञान के क्रमिक विकास और भारत की सर्वांगीण प्रगति में महिलाओं द्वारा निभाए जा रहे निर्णायक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश के विकास की गति को तेज करने के लिए वैज्ञानिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
प्रेरणादायी किस्सों से छात्रों को दिया मार्गदर्शन
संस्थान के निदेशक ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विश्व की महान महिला वैज्ञानिकों के जीवन और उनके संघर्षों की कहानियां साझा कीं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इन वैज्ञानिक विभूतियों का जीवन प्रेरणा का स्रोत है और छात्रों को उनके पदचिन्हों पर चलते हुए नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. वंचना सिंह परिहार थीं, जो मध्य प्रदेश शासन के वन स्टॉप सेंटर (सखी) में महिला सशक्तिकरण अधिकारी एवं प्रशासक के रूप में कार्यरत हैं। विद्या गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित डॉ. परिहार जल्द ही सिंगापुर के SASS सम्मेलन में इंजीनियरिंग क्षेत्र में व्याप्त लैंगिक रूढ़ियों पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने वाली हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया।
लक्ष्य को पाने के लिए सही अवसर मिलना जरूरी
अपने संबोधन में डॉ. परिहार ने कहा कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सही अवसर और एक्सपोजर मिलना बहुत जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, वास्तुकला और सिविल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता की सराहना की। उन्होंने छात्राओं को पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर चुनौतीपूर्ण करियर चुनने के लिए प्रेरित किया और कल्पना चावला एवं सुनीता विलियम्स जैसी दिग्गजों का उदाहरण दिया। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बेहतर एक्सपोजर ही आत्मविश्वास और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. नितीश गुप्ता और डॉ. उर्मिला रघुवंशी ने आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विज्ञान सप्ताह के दौरान वाद-विवाद प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, पोस्टर निर्माण और क्विज जैसी विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम में भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. जे. टी. एंड्रयूज सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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