{"_id":"686fd6ad30df3b3fd20a3710","slug":"a-case-was-registered-for-not-getting-married-jabalpur-news-c-1-1-noi1229-3153733-2025-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jabalpur News: शादी नहीं करने पर दर्ज करवाया था प्रकरण, हाईकोर्ट ने बालिग मानते हुए सजा को किया निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jabalpur News: शादी नहीं करने पर दर्ज करवाया था प्रकरण, हाईकोर्ट ने बालिग मानते हुए सजा को किया निरस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 10:51 PM IST
विज्ञापन
सार
हाईकोर्ट ने पॉक्सो, दुष्कर्म व अपहरण के मामले में दोषी ठहराए गए दीपक लोनी को दोषमुक्त किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी और उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ संबंध बनाए थे। जन्मतिथि संबंधी प्रमाण न होने व माता-पिता के बयानों के आधार पर सभी सजा निरस्त की गई।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
पॉक्सो, दुष्कर्म तथा अपहरण के अपराध में दोषी करार देते हुए दी गई सजा के खिलाफ अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने पाया कि पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया कि आरोपी द्वारा शादी से इनकार करने पर उसने एफआईआर दर्ज करवाई थी। पीड़िता की जन्मतिथि से संबंधित कोई प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया था। उसके माता-पिता के अनुसार वह घटना के समय बालिग थी। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने अपीलकर्ता की सभी सजाएं निरस्त कर दीं।
Trending Videos
यह अपील सतना जिले के नौगांव निवासी दीपक लोनी द्वारा दायर की गई थी, जिसे जिला न्यायालय द्वारा पॉक्सो, दुष्कर्म व अपहरण के आरोपों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अपील में कहा गया कि पीड़िता बिना किसी दबाव के स्वयं आरोपी के घर गई थी और पांच दिनों तक वहीं रही। बाद में जब आरोपी ने विवाह से इनकार किया, तो पीड़िता ने मामला दर्ज करवाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी, महाधिवक्ता कार्यालय ने पहली बार किया प्रयोग
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि स्कूल स्कॉलर रजिस्टर के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि मार्च 2006 दर्ज है, जबकि घटना जुलाई 2021 की है। लेकिन दाखिले के समय उसके माता-पिता द्वारा कोई जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। वे स्वयं निरक्षर हैं और उनके अनुसार पीड़िता का जन्म वर्ष 2003 के पूर्व हुआ था। उनके अनुसार घटना के समय पीड़िता बालिग थी।
कोर्ट ने माना कि पीड़िता बालिग थी और उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, इसलिए आरोपी पर अपहरण, बलात्कार या पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध सिद्ध नहीं होता। इस आधार पर हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए अपीलकर्ता दीपक लोनी को दोषमुक्त कर दिया।

कमेंट
कमेंट X