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Jabalpur: प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला, सड़क बदहाल होने से नहीं पहुंची एंबुलेंस; मां और गर्भस्थ शिशु की मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 21 Jun 2026 09:21 PM IST
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सार

जबलपुर में खराब सड़क और समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से एक गर्भवती महिला तथा उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। प्रसव पीड़ा के दौरान महिला को करीब एक किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ा, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

Due to the poor condition of the road, an ASHA worker had to walk a pregnant woman for one kilometer
गर्भवती महिला तथा उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जबलपुर में खराब सड़क का खामियाजा एक गर्भवती महिला को अपनी और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान देकर चुकाना पड़ा। प्रसव पीड़ा होने पर आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से गर्भवती महिला को करीब एक किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा। समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने और उपचार में देरी के कारण महिला की हालत गंभीर हो गई। बाद में उपचार के दौरान महिला और उसके गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई।

एपीजे अब्दुल कलाम आजाद वार्ड अंतर्गत ब्रजपुरी कॉलोनी निवासी 22 वर्षीय ममता कुशवाह साढ़े सात माह की गर्भवती थीं। शुक्रवार शाम उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे। लेकिन महिला के घर से मुख्य मार्ग तक जाने वाली सड़क अत्यंत खराब होने के कारण कोई भी किराये का वाहन अंदर आने को तैयार नहीं हुआ।

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गर्भ में पल रहे शिशु को भी नहीं बचाया जा सका
स्थिति में परिजनों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने महिला को लगभग एक किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से किराये के ऑटो की मदद से उन्हें एल्गिन अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने तक महिला को सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। हालत गंभीर होने पर एल्गिन अस्पताल से उन्हें शासकीय मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया। मेडिकल अस्पताल में महिला को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। गर्भ में पल रहे शिशु को भी नहीं बचाया जा सका।

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दो बार स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया था
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि मामला सामने आने के बाद जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला के कुछ समय तक सतना में रहने के कारण उसका पंजीयन गर्भावस्था के चौथे माह में हो पाया था। इस माह उसका दो बार स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया था।

सीएमएचओ के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा की मदद लेनी चाहिए थी। पूरे मामले की जांच के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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