{"_id":"686d4a33c682dcdc7602774f","slug":"for-the-first-time-the-advocate-generals-office-issued-advertisements-for-the-appointment-of-government-advocates-jabalpur-news-c-1-1-noi1229-3147111-2025-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jabalpur: शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी, महाधिवक्ता कार्यालय ने पहली बार किया प्रयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jabalpur: शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी, महाधिवक्ता कार्यालय ने पहली बार किया प्रयोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jul 2025 08:20 AM IST
विज्ञापन
सार
1956 में स्थापना के बाद पहली बार महाधिवक्ता कार्यालय ने सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रक्रिया को अपारदर्शी बताते हुए विरोध जताया है और आरक्षित वर्गों को प्रतिनिधित्व न देने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय ने 1956 में स्थापना के बाद पहली बार सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय ने 1956 में स्थापना के बाद पहली बार सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए हैं। महाधिवक्ता कार्यालय की अधिकृत वेबसाइट पर उक्त विज्ञापन जारी किए गए हैं। नोटिस जारी कर एडिशनल एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल, गवर्नमेंट एडवोकेट तथा डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट के पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
Trending Videos
विज्ञापन में निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 18 जुलाई नियत की गई है। विज्ञान में रिक्त पदों की संख्या नहीं दी गई है। इसे लेकर विरोध का सिलसिला शुरू हो गया है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रक्रिया पारदर्शी न होने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- नियमों को ताक में रखकर संचालित अस्पतालों पर हाईकोर्ट सख्त, स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि विज्ञापन में ओबीसी, एससी, एसटी व महिलाओं को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दिए जाने का प्रावधान नहीं किया गया है। प्राप्त आवेदनों में से किस प्रक्रिया के माध्यम से चयन किया जाएगा, इसका उल्लेख नियमों में नहीं है। मौजूदा नियम यह है कि महाधिवक्ता एक पद के विरुद्ध विधि विभाग को तीन नामों की पेनल प्रेषित करेंगे। विधि विभाग, किस प्रक्रिया को अपनाकर तीन नामों में से एक नाम का चयन करेगा, इसका उल्लेख कानून में नहीं है। प्रेषित तीन नामों की पेनल में जिस अधिवक्ता का चयन व नियुक्ति की जानी है, उस अधिवक्ता का नाम प्रथम कॉलम में उल्लिखित किए जाने की प्रथा है। उक्त तथ्य की जानकारी ओबीसी एडवोकेट्स द्वारा तत्कालीन महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव के समय सूचना के अधिकार के तहत ली गई है।
ये भी पढ़ें- आरक्षित वर्ग को नए नियम के तहत प्रमोशन नहीं, राज्य सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में पेश की गई जानकारी
एसोसिएशन मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कई बार मांग कर चुका है कि प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर तथा नई दिल्ली सहित प्रदेश के समस्त निगम मंडलों, शासकीय तथा अर्धशासकीय निकायों, वित्तीय संस्थानों, बैंको सहित में की जाने वाली नियुक्तियों में प्रदेश के ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं को अनुपातिक प्रतिनिधित्व दिए जाने का स्पष्ट रूप से क़ानून बनाया जाए। इस संबंध में एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में 2022 से विचाराधीन है। इसमें मध्य प्रदेश सरकार शपथ पत्र दाखिल करके शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में ओबीसी, एससी, एसटी तथा महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिए जाने से साफ इंकार किया है।

कमेंट
कमेंट X