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High Court News: आपराधिक अतीत के कारण दोषसिद्धि नहीं ठहरा सकते उचित, आर्म्स एक्ट मामले में सजा निरस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Thu, 28 Aug 2025 10:30 AM IST
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सार
जिला न्यायालय ने उसे एक साल की सजा सुनाई थी, जिसे एडीजे कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। पुनः निरीक्षण याचिका में गवाहों के बयान बदलने और विवेचना में खामियां सामने आने पर हाईकोर्ट ने कहा कि अभियुक्त का आपराधिक अतीत मात्र दोषसिद्धि का आधार नहीं हो सकता।
जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाईकोर्ट जस्टिस राम कुमार चौबे की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त का आपराधिक अतीत चरित होने कारण दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहरा सकते। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अपीलकर्ता को आर्म्स एक्ट के अपराध में दी गई सजा को निरस्त कर दिया।
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भोपाल निवासी करिया कंजर की तरफ से दायर अपराधिक पुनः निरीक्षण याचिका में कहा गया था कि जिला न्यायालय ने उसे 25 आर्म्स एक्ट के अपराध में एक साल की सजा से दंडित किया था। उसके खिलाफ उसने एडीजे कोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी। सजा के फैसले को बरकरार रखते हुए एडीजे कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को उसकी अपील खारिज कर दी थी। तभी से वह न्यायिक अभिरक्षा में है।
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पुनः निरीक्षण याचिका में कहा गया था कि जिला न्यायालय में दोनों स्वतंत्र गवाह अपने बयान से मुकर गये थे। उनका कहना था कि पुलिस ने गवाह तथा गिरफ्तारी पत्रक में उनसे हस्ताक्षर करवाये थे। उन्होंने पुलिस को आरोपी के पास से कट्टा और कारतूस जब्त करते हुए नहीं देखा था। इसके बावजूद सिर्फ विवेचना अधिकारी की गवाही के आधार पर न्यायालय ने अपना विवेकाधिकार का प्रयोग करते बिना साक्ष्य उसे सजा से दंडित किया है।
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एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि विवेचना अधिकारी के साथ गए दोनों पुलिसकर्मी भी गवाही के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए है। इसके अलावा मौके पर कट्टा और कारतूस को जब्त कर सीज करने के संबंध में भी गवाहों ने विरोधाभासी बयान दिए हैं।
पुलिस ने अनुसार आरोपी के खिलाफ सात आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उनके द्वारा अपीलकर्ता को एक भी प्रकरण में सजा से दंडित किये जाने का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सजा के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को रिहा करते के आदेश जारी किये हैं।

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