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Jabalpur News: ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, कहा-जागरूकता भी जरूरी; डीजे की तेज आवाज यहां बनी खतरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 10 Apr 2026 10:14 AM IST
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सार

ध्वनि प्रदूषण और डीजे की तेज आवाज से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है कि केवल कानून नहीं, बल्कि नागरिकों का जागरूक होना भी जरूरी है। कोर्ट ने माना कि तेज ध्वनि अब गंभीर जनसमस्या बन चुकी है।

The ear-splitting loud sound of the DJ has become a public problem
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे की तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने और ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कान फाड़ देने वाली डीजे की तेज आवाज जनसमस्या बन गई है। कोलाहल एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।

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हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।

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नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 वर्ष), सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (उम्र 100 वर्ष) सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजनों के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। मानव शरीर 75 डेसिबल तक की आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है।


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डीजे की आवाज की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा लोग बहरेपन और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं।

याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जवाब में इसे जनसमस्या बताते हुए कहा गया कि कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है, जिसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से कई लोगों की मौत भी हुई है। केवल जुर्माने की कार्रवाई से इस समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

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