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MP Ratlam Election 2024: भाजपा जीत कायम रखेगी या कांग्रेस अपना गढ़ फिर करेगी फतह, नतीजे का बेसब्री से इंतजार
Mon, 03 Jun 2024 08:31 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, रतलाम
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, रतलाम
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 03 Jun 2024 08:31 PM IST
सार
रतलाम लोकसभा सीट पर भाजपा को सिर्फ 2014 और 2019 के चुनाव में ही जीत मिली है, जबकि कांग्रेस का यह सीट परंपरागत गढ़ रही है। इस लोकसभा सीट पर 4 जून को ही नतीजा सामने आएगा कि भाजपा अपनी जीत कायम रखती है या कांग्रेस फिर से भाजपा के हाथ से इस सीट को छीन लेगी।
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रतलाम झाबुआ लोकसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट कांग्रेस की परम्परागत सीट रही है। इस बार मध्यप्रदेश के वनमंत्री नागरसिंह चौहान की धर्मपत्नी अनिता चौहान भाजपा से मैदान में हैं तो उन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस के दिग्गज कांतिलाल भूरिया चुनाव लड़ रहे हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गुमानसिंह डामोर ने कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया को पराजित किया था। ग्राउंड पर जो स्थिति नजर आती है, उसके मुताबिक जीत-हार जिसकी भी हो, पर हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि 4 जून को मतगणना के बाद स्थिति स्पष्ट होगी की किसकी जीत होती है और किसकी हार।
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी अनिता नागरसिंह चौहान पर भाजपा की सीट को कायम रखने की चुनौती है, क्योंकि भाजपा ने गुमान सिंह डामोर का टिकट काटकर अनिता चौहान को उतारा है। 2019 में भाजपा के गुमान सिंह डामोर ने कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया को हराया था। इस लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में ही है। इस सीट पर जीत हासिल करना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस सीट के अंतर्गत रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर जिले की आठ विधानसभा सीटें हैं। इनमें चार पर भाजपा, तीन पर कांग्रेस तो एक पर बाप पार्टी का कब्जा है। रतलाम - झाबुआ लोकसभा सीट आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। मुख्यतः झाबुआ और अलीराजपुर क्षेत्र का वोटिंग प्रतिशत आदिवासी बाहुल्य है। यहां पर अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या अच्छी खासी है। 73.54 फीसदी आबादी रतलाम की अनुसूचित जतजाति की है, जबकि 4.51 फीसदी की आबादी अनुसूचित जाति की है।
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इस लोकसभा सीट की सीमा राजस्थान व गुजरात से लगी हुई है। चौथे चरण में 13 मई को यहां वोटिंग हुई थी। इस बार यहां 72.94 प्रतिशत वोटिंग हुई है। 2019 की बात करें तो इस सीट पर 75.66 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 2.64% काम वोटिंग हुई है। इसका एक कारण डामोर का टिकट काटना भी माना जा रहा है। रतलाम लोकसभा सीट पर भाजपा को सिर्फ 2014 और 2019 के चुनाव में ही जीत मिली है, जबकि कांग्रेस का यह सीट परंपरागत गढ़ रही है। इस लोकसभा सीट पर 4 जून को ही नतीजा सामने आएगा कि भाजपा अपनी जीत कायम रखती है या कांग्रेस फिर से भाजपा के हाथ से इस सीट को छीन लेगी।
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2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गुमानसिंह डामोर ने कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया को पराजित किया था। ग्राउंड पर जो स्थिति नजर आती है, उसके मुताबिक जीत-हार जिसकी भी हो, पर हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि 4 जून को मतगणना के बाद स्थिति स्पष्ट होगी की किसकी जीत होती है और किसकी हार।
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रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी अनिता नागरसिंह चौहान पर भाजपा की सीट को कायम रखने की चुनौती है, क्योंकि भाजपा ने गुमान सिंह डामोर का टिकट काटकर अनिता चौहान को उतारा है। 2019 में भाजपा के गुमान सिंह डामोर ने कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया को हराया था। इस लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में ही है। इस सीट पर जीत हासिल करना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस सीट के अंतर्गत रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर जिले की आठ विधानसभा सीटें हैं। इनमें चार पर भाजपा, तीन पर कांग्रेस तो एक पर बाप पार्टी का कब्जा है। रतलाम - झाबुआ लोकसभा सीट आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। मुख्यतः झाबुआ और अलीराजपुर क्षेत्र का वोटिंग प्रतिशत आदिवासी बाहुल्य है। यहां पर अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या अच्छी खासी है। 73.54 फीसदी आबादी रतलाम की अनुसूचित जतजाति की है, जबकि 4.51 फीसदी की आबादी अनुसूचित जाति की है।
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इस लोकसभा सीट की सीमा राजस्थान व गुजरात से लगी हुई है। चौथे चरण में 13 मई को यहां वोटिंग हुई थी। इस बार यहां 72.94 प्रतिशत वोटिंग हुई है। 2019 की बात करें तो इस सीट पर 75.66 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 2.64% काम वोटिंग हुई है। इसका एक कारण डामोर का टिकट काटना भी माना जा रहा है। रतलाम लोकसभा सीट पर भाजपा को सिर्फ 2014 और 2019 के चुनाव में ही जीत मिली है, जबकि कांग्रेस का यह सीट परंपरागत गढ़ रही है। इस लोकसभा सीट पर 4 जून को ही नतीजा सामने आएगा कि भाजपा अपनी जीत कायम रखती है या कांग्रेस फिर से भाजपा के हाथ से इस सीट को छीन लेगी।
