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महेश्वर के काशी विश्वेश्वर मंदिर पर कोर्ट का बड़ा फैसला: खासगी ट्रस्ट का दावा खारिज, सबको पूजा का अधिकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर Published by: Sabahat Husain Updated Mon, 30 Mar 2026 08:55 AM IST
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सार

महेश्वर के काशी विश्वेश्वर मंदिर को लेकर कोर्ट ने खासगी ट्रस्ट का दावा खारिज कर दिया। न्यायालय ने मंदिर को सार्वजनिक घोषित करते हुए सभी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया। ट्रस्ट अपना स्वामित्व प्रमाणित करने में असफल रहा।

Major Court Verdict on Maheshwar' Kashi Vishweshwar Temple Khasgi Trust's Claim Dismissed
काशी विश्वेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

तीर्थनगरी महेश्वर स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने खासगी ट्रस्ट के स्वामित्व के दावे को खारिज करते हुए मंदिर को सार्वजनिक घोषित किया है।

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द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश महेश्वर, यशमी अग्रवाल ने 25 मार्च को इस संबंध में आदेश जारी किया। अपने निर्णय में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नगर के प्राचीन विश्वेश्वर महादेव मंदिर पर खासगी ट्रस्ट का स्वामित्व और आधिपत्य प्रमाणित नहीं होता, इसलिए ट्रस्ट का दावा निरस्त किया जाता है।

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मामले में देवी अहिल्याबाई होलकर चेरिटीज ट्रस्ट, इंदौर द्वारा दयालु गुरु, हेमंत जैन, चेतन यादव और कपिल श्रीमाली के खिलाफ वाद दायर किया गया था। प्रतिवादी पक्ष के वकील संजीव एस. मोयदे के अनुसार, खासगी ट्रस्ट न्यायालय में अपना पक्ष प्रमाणित करने में असफल रहा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि काशी विश्वेश्वर मंदिर एक सार्वजनिक मंदिर है, जहां सभी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार है।


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खासगी ट्रस्ट पर आरोप
दयालु गुरु ने बताया कि मंदिर की जर्जर स्थिति को देखते हुए महेश्वर के श्रद्धालुओं ने जनसहयोग से इसका जीर्णोद्धार कराया। भक्तों ने चांदी का मुखौटा और जलाधारी दान में दी तथा समय-समय पर मंदिर का रखरखाव भी किया जा रहा है। त्योहारों पर शाही सवारी, भजन प्रतियोगिता और हरिहर मिलन समारोह जैसे आयोजन भी किए जाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि खासगी ट्रस्ट को सहयोग करना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत उसने श्रद्धालुओं पर दीवानी दावा कर उन्हें परेशान किया। नर्मदे हर भक्त मंडल के प्रमोद गुरु ने कहा कि मंदिर की सेवा, पूजा और रखरखाव आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। वहीं चेतन यादव ने बताया कि नगर के कई प्राचीन मंदिरों और धरोहरों का संरक्षण स्थानीय श्रद्धालु अपने संसाधनों से कर रहे हैं।

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