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Mandla News: इतिहास की पूरक परीक्षा में मिले जीरो, छात्राओं ने किया हंगामा, कॉलेज पर पढ़ाई न कराने का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला
Published by: मंडला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:18 AM IST
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सार
बीए सेकंड ईयर की पूरक परीक्षा के नतीजों ने शासकीय महिला महाविद्यालय में विवाद खड़ा कर दिया है। इतिहास विषय में कई छात्राओं के फेल होने और कुछ को शून्य अंक मिलने के बाद छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन पर पढ़ाई में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
शासकीय महिला महाविद्यालय में इतिहास की सप्लीमेंट्री परीक्षा में जीरो अंक
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विस्तार
जिले के शासकीय महिला महाविद्यालय में बीए सेकंड ईयर की पूरक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इतिहास विषय में कुछ छात्राओं को शून्य अंक मिलने से छात्राओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पढ़ाई की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
छात्राओं का कहना है कि पूरे सत्र के दौरान इतिहास विषय की नियमित कक्षाएं नहीं लगीं और उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त नोट्स या किताबें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनका आरोप है कि ठीक से पढ़ाई नहीं होने की वजह से ही पूरक परीक्षा में उन्हें ऐसे परिणाम देखने पड़े। छात्राओं का कहना है कि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
जानकारी के अनुसार बीए सेकंड ईयर की सप्लीमेंट्री परीक्षा में करीब 17 से 18 छात्राएं फेल हो गई हैं, जिनमें से 9 छात्राएं इतिहास विषय की हैं। इनमें से कुछ छात्राओं को जीरो अंक भी मिले हैं, जिससे कॉपियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ये भी पढ़ें: Indore News: प्रेस क्लब में 40 से अधिक महिलाओं को ‘नारी शक्ति सम्मान’, सुमित्रा महाजन बोलीं- जिम्मेदारी बढ़ी
वहीं कॉलेज के प्राचार्य शरदनारायण खरे ने छात्राओं के आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि कॉलेज में सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से कराई जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष करीब 250 छात्राओं ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 91 छात्राओं की सप्लीमेंट्री आई थी। सप्लीमेंट्री परीक्षा में इतिहास की 9 छात्राओं सहित कुल 17-18 छात्राएं फेल हुई हैं, जिनमें से केवल 3 से 4 छात्राओं को ही शून्य अंक मिले हैं।
प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि कॉपियों की जांच और परिणाम जारी करने का कार्य यूनिवर्सिटी का होता है। जिन छात्राओं को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके आवेदन ले लिए गए हैं और उन्हें यूनिवर्सिटी भेजा जा रहा है, ताकि कॉपियों की दोबारा जांच कराई जा सके। कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दे दी है। अब सबकी नजर यूनिवर्सिटी की जांच पर टिकी है कि दोबारा जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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छात्राओं का कहना है कि पूरे सत्र के दौरान इतिहास विषय की नियमित कक्षाएं नहीं लगीं और उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त नोट्स या किताबें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनका आरोप है कि ठीक से पढ़ाई नहीं होने की वजह से ही पूरक परीक्षा में उन्हें ऐसे परिणाम देखने पड़े। छात्राओं का कहना है कि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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जानकारी के अनुसार बीए सेकंड ईयर की सप्लीमेंट्री परीक्षा में करीब 17 से 18 छात्राएं फेल हो गई हैं, जिनमें से 9 छात्राएं इतिहास विषय की हैं। इनमें से कुछ छात्राओं को जीरो अंक भी मिले हैं, जिससे कॉपियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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वहीं कॉलेज के प्राचार्य शरदनारायण खरे ने छात्राओं के आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि कॉलेज में सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से कराई जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष करीब 250 छात्राओं ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 91 छात्राओं की सप्लीमेंट्री आई थी। सप्लीमेंट्री परीक्षा में इतिहास की 9 छात्राओं सहित कुल 17-18 छात्राएं फेल हुई हैं, जिनमें से केवल 3 से 4 छात्राओं को ही शून्य अंक मिले हैं।
प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि कॉपियों की जांच और परिणाम जारी करने का कार्य यूनिवर्सिटी का होता है। जिन छात्राओं को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके आवेदन ले लिए गए हैं और उन्हें यूनिवर्सिटी भेजा जा रहा है, ताकि कॉपियों की दोबारा जांच कराई जा सके। कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दे दी है। अब सबकी नजर यूनिवर्सिटी की जांच पर टिकी है कि दोबारा जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

शासकीय महिला महाविद्यालय में इतिहास की सप्लीमेंट्री परीक्षा में जीरो अंक

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