चंबल में रेत माफियाओं का खूनी खेल: 15 साल में 35 से ज्यादा हत्याएं, छह अफसर भी बने शिकार; खौफनाक ये कहानियां
Chambal Sand Mafia Terror: चंबल के मुरैना में रेत माफिया का आतंक बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक आरक्षक को ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे कुचल दिया गया, जिसमें उसकी मौत हो गई। जबकि एक वन रेंजर को धमकाया गया है। दिन-ब-दिन ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जहां एक तरफ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों और अफसरों में खौफ भी पैदा हो रहा है। इस विशेष खबर में जानें अब तक कहां-क्या हुआ?
विस्तार
मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में रेत माफियाओं का बढ़ता आतंक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। बुधवार सुबह मुरैना जिले के दिमनी थाना क्षेत्र के रानपुर गांव चौराहे के पास वन विभाग की टीम पर हमला हुआ, जिसमें वन रक्षक हरकेश गुर्जर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सुबह करीब 6 बजे की है, जब छह सदस्यीय टीम नियमित गश्त पर निकली थी।
गश्त के दौरान टीम को अवैध रेत से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखाई दी। टीम ने वाहन को रोकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने रुकने के बजाय भागने की कोशिश की। इसी दौरान वन रक्षक हरकेश गुर्जर ने आगे बढ़कर वाहन को रोकने का प्रयास किया, तभी चालक विनोद ने उन्हें कुचल दिया और मौके से फरार हो गया।
रेत माफियाओं ने वनकर्मियों को बैरक में घुसकर धमकाया, मामला दर्ज
चंबल में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ वन विभाग की कार्रवाई से बौखलाए रेत माफियाओं ने खुली गुंडागर्दी शुरू कर दी। मुरैना के सबलगढ़ रेंज की बैरक में घुसकर आरोपियों ने कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी और गाली-गलौच की। बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम चंबल नदी के बगदिया घाट पर दबिश देकर लौटी थी। कर्मचारी बैरक में सरकारी कार्य और भोजन की तैयारी में लगे हुए थे, तभी माफियाओं ने मौके पर पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया।
बैरक में घुसकर दी धमकी
घड़ियाल रेंजर दीपक शर्मा के मुताबिक, आरोपियों ने जबरन बैरक में प्रवेश किया और वनकर्मियों को इलाका खाली करने की धमकी दी। साथ ही सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। वन विभाग ने इस मामले में शिव प्रकाश उर्फ सिब्बू जाट, रूप सिंह जाटव, नईम खान और महावीर जाटव को आरोपी बनाया। सभी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।
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कांग्रेस का सरकार पर माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप
कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा सरकार पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अवैध खनन माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में खनिज माफिया का शासन चल रहा है और माफिया सरकार के संरक्षण में जनता की संपत्ति को लूट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफियाओं ने चंबल और सिंध नदियों को खोखला कर दिया है और अब नदियों में रेत बहुत कम बची है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2012 में आईपीएस नरेंद्र सिंह की हत्या माफिया द्वारा की गई थी। अब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र में भी माफिया ने एक वनकर्मी को ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध ट्रैक्टर भाजपा नेताओं के हैं, जो मुरैना में युवा मोर्चा से जुड़े हुए हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि भिंड, मुरैना और दतिया जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। उनके अनुसार पिछले 10 वर्षों में मुरैना में 13, भिंड में 19 और दतिया में भी कई हत्याएं हुई हैं। माफिया पोकलेन मशीनों और अन्य साधनों से नदियों का दोहन कर रहे हैं, जिससे भिंड में सिंध नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भिंड जिले से उत्तरप्रदेश के जालौन, उरैया और इटावा जिलों में प्रतिदिन 200 से 300 ट्रैक्टर रेत भेजी जा रही है और प्रत्येक ट्रैक्टर से करीब 5 हजार रुपये की वसूली की जा रही है।
डॉ. गोविंद सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि भिंड में पुलिस के संरक्षण में 40 से 50 लाख रुपये तक की अवैध वसूली हो रही है और यह राशि भाजपा नेताओं व पुलिस तक पहुंच रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने क्षेत्र लहार के भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा ‘गुड्डू’ पर अवैध खनन कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में नए ट्रैक्टर बिना रॉयल्टी के रेत ला रहे हैं और पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। ये ट्रैक्टर 5 हजार रुपये की रेत को 12 से 15 हजार रुपये प्रति ट्रॉली तक बेच रहे हैं, लेकिन पुलिस आंखें बंद करके बैठी हुई है।
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लगातार बढ़ती हिंसा का लंबा इतिहास
चंबल क्षेत्र में रेत माफियाओं की हिंसा कोई नई बात नहीं है। पिछले एक दशक से अधिक समय में इस इलाके में पुलिस, वन विभाग और आम नागरिकों पर हमलों की लंबी श्रृंखला सामने आती रही है। 08 मार्च 2012 को आईपीएस नरेन्द्र कुमार की हत्या से लेकर 2014, 2015, 2016, 2017 और उसके बाद के वर्षों तक लगातार फायरिंग, पथराव, कुचलने और हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
इन घटनाओं में न केवल सरकारी अधिकारी और कर्मचारी निशाना बने, बल्कि आम नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए। सड़क हादसों के रूप में सामने आए कई मामलों में रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों ने लोगों की जान ली या उन्हें गंभीर रूप से घायल किया। 2018, 2019, 2022, 2023 और 2024 तक भी ऐसे मामलों का सिलसिला जारी रहा, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसकी चपेट में आए।
अब तक कितने अफसरों की गई जान?
- 08 मार्च 2012 को आईपीएस नरेंद्र कुमार की माफिया द्वारा टैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी
- 31 मार्च को देवरी घड़ियाल केंद्र पर SAF के हवलदार विश्वनाथ को माफिया ने गोली मारी थी
- 05 अप्रैल 2015 को धनेला रोड पर डंपर से कुचलकर पुलिस आरक्षक धर्मेंद्र चौहान को मौत के घाट उतारा
- 03 मार्च 2016 को देवरी के पास हाइवे पर अधीक्षक, डिप्टी रेंजर और वन आरक्षक पर लाठी-डंडों से हमला
- 07 मार्च 2016 को बानमोर व ग्वालियर के बीच ट्रैक्टर से कुचलकर वनरक्षक की मौत
- 07 मार्च रेत माफिया ने वन आरक्षक नरेंद्र शर्मा को ट्रैक्टर से कुचलकर मारा
- 09 अगस्त को रेंजर और SAF को घेरा, ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ा ले गए माफिया
- 27 मार्च 2017 को बरवासिन चंबल घाट पर पुलिस पर माफिया ने की फायरिंग
- 25 जून को रेत का ट्रैक्टर-ट्रॉली रोका तो माता बसैया थाना प्रभारी पर हमला
- 06 सितंबर 2018 में रेत माफिया से वन नाके पर ट्रैक्टर से कुचलकर डिप्टी रेंजर की हत्या की
अवैध खनन से वन्यजीवों का कैसे नुकसान हो रहा है?
चंबल नदी में अवैध रेत खनन का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण और जैव विविधता पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय चंबल डॉल्फिन घड़ियाल सेंचुरी, जो 1980 के दशक में स्थापित की गई थी, आज माफियाओं के कब्जे में बताई जा रही है। 435 किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस सेंचुरी का उद्देश्य विलुप्त होती प्रजातियों का संरक्षण था, लेकिन अवैध खनन के चलते जलीय जीवों के अंडे बड़ी संख्या में नष्ट हो रहे हैं।
घड़ियाल और अन्य जीव चंबल नदी के किनारे रेत में अंडे देते हैं, ऐसे में लगातार खनन उनकी प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेंचुरी क्षेत्र में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद अवैध गतिविधियां जारी हैं।
कानूनी हस्तक्षेप के बावजूद नियंत्रण नहीं
अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक हस्तक्षेप कर चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात काबू में नहीं दिखते। चंबल नदी में खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका को ग्वालियर हाईकोर्ट ने एनजीटी को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। याचिका में बताया गया कि अनियंत्रित रूप से चल रहे रेत से भरे वाहनों के कारण अब तक करीब 75 लोगों की मौत हो चुकी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है और यह मुद्दा उठाया गया है कि सेंचुरी क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। राज्य सरकार ने भी माना है कि इस मामले से जुड़ा एक प्रकरण पहले से एनजीटी में लंबित है।
प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक संरक्षण पर सवाल
मुरैना पुलिस अधीक्षक सौरभ समीर का कहना है कि समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है और हाल ही में राजघाट पुल पर भी बड़ी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, पूर्व में जिले में पदस्थ रहे रिटायर्ड आईएएस विनोद शर्मा का मानना है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उन्हें पुलिस या प्रशासन का कोई भय नहीं है।
सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते वाहन
चंबल क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई नेशनल हाईवे सहित कई प्रमुख मार्गों पर अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर तेज रफ्तार में चलते हैं। इन्हें रोकने या इनके सामने आने वालों के लिए जान का खतरा बना रहता है। बारिश के बाद रेत की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही यह गतिविधियां और तेज हो जाती हैं, जिससे पूरे इलाके में भय का माहौल बना रहता है।
बेलगाम गाड़ियों के कारण कितने लोग हुए हादसे का शिकार?
- 03 जुलाई 2015 को रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर एक की मौत
- 02 मार्च 2016 को टेंटरा में रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर चार माह के मासूम बच्चे की मौत
- 08 नवंबर 2016 को रामपुरकलां में रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर पत्नी की मौत और पति हुआ था घायल
- 15 नवंबर 2016 को गंजरामपुर मोड़ पर रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक में टक्कर मारी थी, जिसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई, दो गंभीर घायल हुए थे
- 17 नवंबर 2016 की सुबह हाईवे पर रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली ने छात्रा को कुचला, मौके पर हुई मौत
- 20 फरवरी 2017 को रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक में टक्कर मारी, जिससे बच्चे की मौत और मां सहित तीन हुए घायल
- 18 जून 2017 को रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर दो सगे भाइयों की मौत
- 25 जून 2017 को रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर महिला की मौत
- 25 दिसंबर 2017 को अंबाह में रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर खिलाड़ी की मौत
- 21 जून 2018 को अंबाह मुरैना मार्ग पर रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से 15 मरे और छह घायल हुए
- 09 नवंबर 2022 को बड़ोखर चौराहे पर रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर नरेश (50) पुत्र रतीराम जाटव निवासी बड़ोखर की मौत
- 2023 में रेत माफियाओ ने चार मजदूरों को कुचला, जिसमें एक की मौत हो गई और चार गंभीर घायल हुए
- 13 दिसंबर 2024 को रेत माफिया ने एक बाइक सवार को कुचला, मौके पर मौत
- 17 दिसंबर 2024 को घर के बाहर खेल रहे मासूम धनंजय तोमर को रेत माफिया ने कुचल दिया था

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