हर-हर महादेव से गूंजा ओंकारेश्वर: शिवमय हुई नगरी, सुगंधित फूलों से सजा ज्योतिर्लिंग; आज निकलेगी भव्य पालकी
श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान का भव्य पुष्प शृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। नर्मदा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। दोपहर में पालकी यात्रा, पंचामृत अभिषेक और नौका विहार सहित धार्मिक आयोजन हुए।
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श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में आस्था, भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। पूरी रात चले विशेष फूलों के शृंगार के बाद सोमवार सुबह मंदिर के पट खुले तो भगवान के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भगवान ओंकारेश्वर के विशेष पुष्प शृंगार के लिए महेश्वर और उज्जैन से पंडितों के साथ फूलों की सजावट में दक्ष कारीगर भी पहुंचे थे। कई क्विंटल सुगंधित फूलों से गर्भगृह और मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। सुबह पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
नर्मदा घाटों पर गूंजे हर-हर महादेव के जयघोष
श्रावण सोमवार के अवसर पर देशभर से हजारों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पहले मां नर्मदा में स्नान किया। नर्मदा घाटों से लेकर मंदिर परिसर तक दिनभर 'हर-हर महादेव', 'बोल बम' और 'नर्मदे हर' के जयघोष गूंजते रहे। इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु विशेष रूप से भगवान के भव्य पुष्प शृंगार के दर्शन करने पहुंचे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए।
अलग-अलग दर्शन व्यवस्था, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सामान्य, शुल्क और वीआईपी दर्शन की अलग-अलग व्यवस्था की गई। कांवड़ यात्रियों के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक आगम जैन सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी पूरे नगर में व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। मंदिर और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इस बार दर्शन व्यवस्था में बदलाव करते हुए श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि पहले प्रवेश के लिए उपयोग होने वाले चांदी गेट को निकासी मार्ग बनाया गया है। श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन लगभग 10 फीट की दूरी से कराए जा रहे हैं।
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नई व्यवस्था से पंडित-पुजारियों में नाराजगी
ओंकारेश्वर के पंडित-पुजारियों और स्थानीय नागरिकों के लिए सुबह 5 बजे से 9 बजे तक ही जलाभिषेक और दर्शन की व्यवस्था रखी गई है। इसके बाद उन्हें भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन करने होंगे। इस व्यवस्था पर कुछ पंडित-पुजारियों ने नाराजगी जताई। पंडित पवन शर्मा ने कहा कि मंदिर में पूजा-अभिषेक से अनेक ब्राह्मण परिवारों की आजीविका जुड़ी है, इसलिए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
बड़े वाहनों पर प्रतिबंध से नहीं लगा जाम
श्रावण मास की शुरुआत से ही इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसका असर सोमवार को स्पष्ट दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद कहीं भी बड़े जाम की स्थिति नहीं बनी। प्रशासन ने अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए हैं। बड़े वाहनों को नवीन बस स्टैंड तक ही जाने की अनुमति है। वहां से श्रद्धालुओं को टेंपो के माध्यम से नर्मदा घाट, कुबेर भंडारी मंदिर और पुराने बस स्टैंड तक पहुंचाया जा रहा है।
दोपहर 2 बजे निकलेगी भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की पालकी
श्रावण के दूसरे सोमवार पर दोपहर 2 बजे भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव की भव्य पालकी मंदिर से निकलेगी। इस अवसर पर भगवान ओंकारेश्वर के रजत पंचमुखी मुखौटे का मां नर्मदा के कोठी तीर्थ घाट पर 251 लीटर पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। आचार्य पंडित राजराजेश्वरी दीक्षित के आचार्यत्व में विद्वान पंडित और पुरोहित विधि-विधान से अभिषेक संपन्न कराएंगे। अभिषेक के बाद दोनों ज्योतिर्लिंगों की सवारी मां नर्मदा में नौका विहार करेगी। इसके बाद पालकी नगर भ्रमण पर निकलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
मठ-मंदिरों और आश्रमों में होगा भव्य स्वागत
पालकी यात्रा के दौरान मार्ग में पड़ने वाले मठों, मंदिरों, आश्रमों और अखाड़ों में भगवान का भव्य स्वागत किया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर गुलाब सहित सुगंधित फूलों की वर्षा की जाएगी। देर रात तक चलने वाली इस यात्रा के रात करीब 10:30 बजे मंदिर लौटने की संभावना है। इसके बाद आरती होगी और भगवान को विश्राम के लिए गर्भगृह में विराजित किया जाएगा। श्रावण के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर में सुबह से देर रात तक पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। एक ओर भगवान का अलौकिक पुष्प श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा, वहीं दूसरी ओर पालकी यात्रा, नर्मदा नौका विहार और हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरी तीर्थनगरी को भक्तिमय बना दिया।
