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MP News: राजगढ़ के जिला अस्पताल में पीआईसीयू में बिजली गुल, डेढ़ घंटे तक बाधित रही ऑक्सीजन आपूर्ति
Mon, 11 Mar 2024 09:02 AM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Mon, 11 Mar 2024 09:02 AM IST
सार
मध्य प्रदेश के राजगढ़ के जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर हैं। पीआईसीयू में डेढ़ घंटे बिजली बाधित रही, जिससे ऑक्सीजन आपूर्ति भी प्रभावित हुई। जनरेटर से पीआईसीयू को कनेक्शन तक नहीं दिया है।
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राजगढ़ के जिला अस्पताल का पीआईसीयू।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजगढ़ जिला अस्पताल में एक बार फिर बड़ी लापरवाही देखने को सामने आई है। पीआईसीयू वार्ड में डेढ़ घंटे तक बिना ऑक्सीजन सप्लाई के सीरियस बच्चे भर्ती रहे। अस्पताल में बिना बिजली के ऑक्सीजन सप्लाई बाधित रही। बड़ा सवाल यह है कि जो पीआईसीयू वार्ड करोड़ों रुपये की लागत से बना, वहां बिजली के बिना ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था नहीं की गई। इतना ही नहीं इस पीआईसूयी को जनरेटर तक से नहीं जोड़ा गया है। इससे डेढ़ घंटे तक बच्चों को बिना वेंटिलेटर और ऑक्सीजन के रहना पड़ा।
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पीआईसीयू वार्ड में छोटे बच्चों को गंभीर अवस्था में भर्ती किया जाता है। वेंटिलेटर पर बच्चों को रखा जाता है। ऐसे में इस वार्ड की ऑक्सीजन सप्लाई रुक जाना एक बड़ी लापरवाही है। यहां के सिविल सर्जन लगातार अवयवस्थाओं के कारण जनप्रतिनिधियों के निशाने पर हैं और इन्हें हटाने की मांग की जा रही है। राजगढ़ जिला अस्पताल में नाम के लिए 10 जनरेटर रखे हैं। उसके बाद भी पीआईसीयू वार्ड में जनरेटर से बिजली सप्लाई नहीं हो सकती। जिला अस्पताल के प्रबंधक दीपक जामरे का कहना है कि ऐसी स्थिति में हमने पेशेंट को रेफर करने का इंतजाम करके रखा है। पीआईसीयू वार्ड में जनरेटर से बिजली सप्लाई के लिए कनेक्शन करने के लिए कई बार लिखित में आवेदन भी दे चुके हैं। इंजीनियर का अब तक कोई अता-पता ही नहीं है। जामरे का कहना है कि जब पीआईसीयू वार्ड बनाया जा रहा था तो ठेकेदार को जनरेटर से विद्युत सप्लाई कनेक्शन करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। आज तक जनरेटर से पीआईसीयू वार्ड में कनेक्शन नहीं किया गया। उसके बाद भी ठेकेदार के पेमेंट रिलीज कर दिए गए।
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पीआईसीयू की डॉक्टर चंदा दांगी शिशु रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यहां पर पहले भी ऐसी चीजे हो चुकी है। उस टाइम पर भी हमने लिखित में आवेदन भी दिया है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। ऐसे में कई बच्चे ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर के सहारे ही एडमिट है। उन्हें बड़ी हानि भी हो सकती है। डॉ. चंदा दांगी ने कहा कि हमने बीते सोमवार को ही इसके लिए आवेदन दिया लेकिन छह दिन बीत जाने पर भी किसी तरह की कोई सूचना अभी तक हमें नहीं मिली है।
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