मध्य प्रदेश: रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ जल सत्याग्रह, आधी रात तालाब से निकाले गए प्रदर्शनकारी
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार देर रात प्रशासन ने तालाब में जल सत्याग्रह कर रहे प्रदर्शनकारियों को बाहर निकलवाया।
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मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सिरमौर तहसील के रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र (न्यूक्लियर पावर प्लांट) के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया था। मंगलवार देर रात प्रशासन ने तालाब में जल सत्याग्रह कर रहे प्रदर्शनकारियों को बाहर निकलवाया। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रीवा के संजय गांधी अस्पताल भेजा गया है। एसडीएम की ओर से अगले 10 दिनों तक परियोजना से जुड़ी गतिविधियां नहीं होने का मौखिक आश्वासन भी दिया गया है।
क्यों हो रहा है न्यूक्लियर प्लांट का विरोध?
विरोध का मुख्य कारण प्रस्तावित परियोजना से स्थानीय लोगों की जमीन, खेती, जलस्रोत, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता है। टाटा पावर कंपनी की ओर से यहां 2×220 मेगावाट क्षमता के परमाणु बिजली संयंत्र की योजना प्रस्तावित है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से आदिवासी और अन्य स्थानीय परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही ग्रामसभा की सहमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने कब शुरू किया विरोध?
नौ अक्टूबर को परियोजना स्थल पर भूवैज्ञानिक जांच के लिए ड्रिलिंग मशीनें पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विरोध करते हुए बोरहोल का काम रुकवा दिया था। प्रस्तावित जांच में आठ बोरहोल किए जाने की योजना बताई गई थी। ग्रामीणों का सवाल था कि जब ग्रामसभा में परियोजना को लेकर आपत्तियां दर्ज हैं, तो जांच की अनुमति किस आधार पर दी गई।
इसके बाद विरोध लगातार तेज होता गया और प्रदर्शनकारियों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। आंदोलन में स्थानीय ग्रामीणों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक प्रतिनिधि भी समर्थन में सामने आए।
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महिला की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश, उमंग सिंघार ने दिया समर्थन
जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद आंदोलन ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। हालांकि, जिला प्रशासन ने महिला की मौत को आंदोलन से सीधे जुड़ा मानने से इनकार किया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्रामीणों से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दिया और मृतका के परिवार को एक लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने ग्रामसभा की सहमति और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया की जांच की मांग भी उठाई है।
