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सिवनी हवाला कांड: तीन करोड़ की रकम में फंसी एसडीओपी पूजा पांडे सहित पूरी टीम, अब तक दस गिरफ्तार, एक फरार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिवनी
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Wed, 15 Oct 2025 02:21 PM IST
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सार
सिवनी जिले में तीन करोड़ रुपये के हवाला कांड में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 में से 10 आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सस्पेंड एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम और कई आरक्षक शामिल हैं। जबलपुर रेंज के आईजी ने एएसपी आयुष गुप्ता को जांच सौंपी है।
अब तक दस अधिकारी गिरफ्तार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में तीन करोड़ रुपये के हवाला कांड में बड़ी कार्रवाई हुई है। एसआईटी ने अब तक 11 में से 10 आरोपी पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसडीओपी पूजा पांडे सहित कई पुलिस अफसरों पर डकैती, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
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छिंदवाड़ा रेंज के डीआईजी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिन 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें सस्पेंड एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, प्रधान आरक्षक माखन इनवाती, आरक्षक योगेंद्र चौरसिया, आरक्षक नीरज राजपूत, आरक्षक जगदीश यादव, गनमैन केदार बघेल, आरक्षक रितेश वर्मा (चालक), प्रधान आरक्षक रविंद्र उइके और सुभाष सदाफल शामिल हैं। वहीं, प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला अब भी फरार बताया जा रहा है।
जबलपुर रेंज आईजी ने दिए जांच के आदेश
डीआईजी सिंह के मुताबिक, जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा ने निलंबित पुलिसकर्मियों के संदिग्ध आचरण को लेकर एएसपी आयुष गुप्ता को शुरुआती जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इस जांच में जबलपुर क्राइम ब्रांच की टीम को हवाला की रकम की बरामदगी और स्रोत की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। सूत्रों के अनुसार हवाला के तीन करोड़ रुपये किसके हैं, कहां से आए और नागपुर क्यों भेजे जा रहे थे, यह अब तक साफ नहीं हो सका है।
एसआईटी जांच में तेजी
एसआईटी की जांच टीम में एएसपी जितेन्द्र सिंह, तीन अन्य कर्मचारी और लखनवाड़ा थाना प्रभारी चंद्रकिशोर सिरामे शामिल हैं। टीम रकम के स्रोत, लेन-देन के चैन और सभी पुलिसकर्मियों की भूमिका खंगाल रही है।
ये भी पढ़ें- सिवनी हवाला कांड : सीएम के निर्देश के बाद 11 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, एसडीओपी पूजा पांडेय समेत पांच गिरफ्तार
हाईकोर्ट के वकील भी हुए सक्रिय
इस मामले ने कानूनी मोर्चे पर भी हलचल मचा दी है। हाईकोर्ट जबलपुर के वकील आशीष त्रिवेदी सिवनी पहुंचे और उन्होंने एफआईआर को जल्दबाजी में की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।
“अधिकारियों के कहने पर ड्यूटी की थी”
नाम न छापने की शर्त पर एक आरक्षक ने बताया कि उसे रात में फोन आया कि संदिग्ध वाहन की चेकिंग करनी है। वह घर पर था लेकिन अधिकारी के आदेश पर मौके पर पहुंच गया।
आरक्षक ने बताया, “एसडीओपी मैडम ने कहा था कि नगझर में खड़े रहो। रात करीब 12:30 बजे फोन आया कि सिलादेही आओ। वहां जंगल के पास कुछ वाहन खड़े थे। उसके बाद क्या हुआ, हमें नहीं बताया गया।”
पूजा पांडे पर गंभीर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह बात सामने आई है कि एसडीओपी पूजा पांडे ने रकम का आधा हिस्सा दबाने की कोशिश की और कार्रवाई में देरी की। यही वजह रही कि अन्य पुलिसकर्मियों पर भी केस दर्ज किया गया, जिन्होंने केवल आदेश पालन किया था।
अब एसआईटी जांच में हर पुलिसकर्मी की भूमिका, रकम की आवाजाही और हवाला नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। मामला जितना पुलिसिया है, उतना ही रहस्यमय भी क्योंकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह रकम किसकी थी और इसे नागपुर क्यों भेजा जा रहा था।

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