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MP High Court: सीधी में फर्जी नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर पर लगाया 10 हजार का जुर्माना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी/जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Sun, 11 Feb 2024 04:22 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीधी के जनपद रामपुर नैकिन में फर्जी नियुक्ति मामले में सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। 2019 में सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ था। 
 

MP High Court: High Court is strict in the case of fake appointment in Sidhi, imposed a fine of Rs 10 thousand
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य बैंच ने अवमानना के मामले में कलेक्टर सीधी पर जुर्माना ठोंका है। न्यायालय के इस आदेश की प्रति मुख्यालय में पहुंचते ही प्रशासनिक अमले में हड़कम्प मच गया है।

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पूरा मामला रामपुर नैकिन जनपद क्षेत्र अन्तर्गत नियमविरुद्ध तरीके से शिक्षकों की भर्ती का है। वर्ष 2019 में रामपुर नैकिन जनपद के तत्कालीन सीईओ ने शिकायत के बाद जांच कर नियमविरुद्ध तरीके से सेवारत चार शिक्षकों की सेवा समाप्ति कर नियुक्ति दिनांक से सेवा निरस्तगी दिनांक तक समस्त वेतन भत्ते मय व्याज वसूली के आदेश दिए थे। यह आदेश जनपद सीईओ रामपुर नैकिन कमिश्रर न्यायालय रीवा संभाग रीवा द्वारा पारित निर्णय के अनुसार किया गया था। इतना ही नहीं, कमिश्रर न्यायालय के पारित निर्णय पर तत्कालीन कलेक्टर अभिषेक सिंह ने फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी जारी किया था।
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कमिश्रर एवं कलेक्टर के आदेश को शिक्षा विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। शिकायतकर्ता ने मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल ने मामले की सुनवाई के बाद 8 फरवरी को कड़ा निर्णय पारित किया। कलेक्टर साकेत मालवीय पर 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। एक सप्ताह के भीतर न्यायालय के मांगे गए दस्तावेजों की पूर्ति न करने के संबंध में शपथ पत्र भी मांगा है। निर्धारित समयावधि के भीतर कलेक्टर ने शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया तो कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश समूचे प्रशासनिक अमले में हड़कम्प मचा हुआ है।  

इन शिक्षकों की नियुक्ति का है मामला  
जिले के रामपुर नैकिन जनपद अन्तर्गत नियमविरुद्ध तरीके से चार शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इनमें सतीश कुमार पाण्डेय पिता श्यामसुन्दर पाण्डेय निवासी सगौनी तहसील रामपुर नैकिन, दीपा पाण्डेय पिता राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय निवासी ममदर,राजेश कुमार साहू पिता राम दुलारे साहू निवासी कोष्टा बड़ोखर, विभा शर्मा पिता तुलसीराम शर्मा निवासी गड़हरा राघोवान सिंह का नाम शामिल है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी रामपुर नैकिन जनपद द्वारा कार्यालयीन आदेश क्रमांक 459-461/ शिक्षा/स्थापना/ संविदाशाला शिक्षक/श्रेणी 02 एवं 03/ नियोजन 2019 में जारी दिनांक 4 मार्च 2011 एवं 710-713/ शिक्षा संविदा शाला शिक्षक/श्रेणी 2 एवं 3/ नियोजन 2009 में जारी दिनांक 15 अप्रैल 2011 अनुसार तीन वर्ष का काला अवधि के लिए उपरोक्त को संविदा शाला शिक्षक वर्ग 3 के पद पर नियुक्त किया गया था। 

पांच वर्ष से लंबित था मामला
रामपुर नैकिन जनपद में नियमविरुद्ध नियुक्ति पाने वाले उपरोक्त चारों शिक्षकों के खिलाफ आयुक्त न्यायालय रीवा संभाग द्वारा प्रकरण क्रमांक 9/निगरानी/2019-20 में पारित आदेश दिनांक 27 मई 2019 के द्वारा उक्त नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर आवेदकगणों से नियुक्ति से अब तक भुगतान किए गए समस्त वेतन भत्ते मय व्याज राजस्व वसूली की भांति वसूल करने का आदेश दिया गया था। पांच वर्ष बाद भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। 

तत्कालीन कलेक्टर अभिषेक सिंह का आदेश रहा बेअसर
जिले के तत्कालीन कलेक्टर रहे अभिषेक सिंह ने आयुक्त न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं जनपद सीईओ रामपुर नैकिन के पत्र अनुसार नियमविरुद्ध नियुक्ति पाने वाले उपरोक्त चारों शिक्षकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420,467,468 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश जून 2019 में जारी किया था। साथ ही अन्य वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिये गए थे लेकिन पांच वर्ष बाद भी उक्त शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नही की गई। 

डीईओ ने जारी कर दिया था वेतन
आयुक्त न्यायालय रीवा के पारित निर्णय एवं जनपद पंचायत रामपुर नैकिन सीईओ के आदेश तथा तत्कालीन कलेक्टर द्वारा सेवा समाप्ति सहित आपराधिक मामला पंजीबद्ध करने के आदेश को धता बताते हुए डीईओ डॉ प्रेमलाल मिश्रा ने सरकार को किरकिरी करा दी। डीईओ प्रेमलाल मिश्रा ने न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी होने के बाद भी 16 जनवरी 2024 को सतीश पाण्डेय एवं दीपा पाण्डेय को चार वर्ष की वेतन एक साथ थमा दी गई। सवाल उठ रहा है कि डीईओ द्वारा यह निर्णय किस अधिकार के तहत लिया गया है।  

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