महाकाल सवारी 2026: 'श्यामू' पर घमासान, हाथी की सेहत को लेकर वन विभाग और मालिक आमने-सामने
महाकाल की 10 अगस्त को निकलने वाली दूसरी शाही सवारी से पहले मादा हाथी श्यामू की सेहत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग और श्यामू के मालिक आमने-सामने हैं। मंदिर प्रबंध समिति ने स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी है, जबकि मालिक ने हाथी को पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए साजिश का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर
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श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी से ठीक पहले एक मामला काफी सुर्खियों में है। इस बार 10 अगस्त को होने वाली दूसरी सवारी में शामिल होने वाली मादा हाथी श्यामू की सेहत को लेकर उसके महावत और वन विभाग आमने-सामने आ गए हैं।
परंपरा के अनुसार श्रावण-भाद्रपद की दूसरी सवारी में भगवान महाकाल मनमहेश स्वरूप में हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस बार 10 अगस्त को श्यामू को यह जिम्मेदारी निभानी है। करीब एक माह पहले वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने श्यामू को बीमार बताते हुए उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच के नमूने जबलपुर स्थित लैब भेजे गए, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई है।
इसी बीच महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने श्यामू के मालिक श्रवण गिरि महाराज को पत्र लिखकर हाथी के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी मांगी है, ताकि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।
श्यामू को बीमार बताने की साजिश है: मालिक
श्यामू के मालिक श्रवण गिरि महाराज ने बीमारी की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि श्यामू पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी दिनचर्या सामान्य है। श्रवण गिरि ने आरोप लगाया कि गुजरात के एक एनजीओ की शिकायत के बाद यह विवाद खड़ा किया गया है। उनका दावा है कि कुछ लोग साजिश रचकर श्यामू को उज्जैन से बाहर भिजवाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि श्यामू मेरे बच्चे जैसा है। पिछले एक महीने से विभाग के कहने पर उसकी जांच करवा रहा हूं, लेकिन यहां के डॉक्टर रिपोर्ट देने के बजाय सिर्फ उसे अनफिट बताने में लगे हैं। उन्होंने मांग की कि उज्जैन के पशु चिकित्सकों के साथ-साथ बाहर के विशेषज्ञों से भी श्यामू की जांच कराई जाए।
46 साल पुरानी परंपरा पर संकट
गौरतलब है कि वर्ष 1980 से 2016 तक महाकाल की सवारी मादा हाथी रामू पर निकलती थी। वर्ष 2016 में रामू की मृत्यु के बाद से यह जिम्मेदारी श्यामू निभा रही है। यानी पिछले 46 वर्षों से महाकाल की सवारी हाथी के बिना नहीं निकली। यदि इस बार श्यामू सवारी में शामिल नहीं हुई, तो यह परंपरा टूट जाएगी।
श्रवण गिरि ने कहा कि मुझे भगवान महाकाल और प्रकृति के न्याय पर पूरा भरोसा है। एक दिन इस षड्यंत्र में शामिल लोगों को सजा जरूर मिलेगी। अब 10 अगस्त तक पूरे उज्जैन की निगाहें श्यामू के स्वास्थ्य और महाकाल की सवारी में उसकी भागीदारी पर टिकी हैं।
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प्रशासन अलर्ट पर
3 अगस्त- श्रावण मास की पहली सवारी
10 अगस्त-दूसरी सवारी, जिसमें श्यामू को शामिल होना है
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति लैब रिपोर्ट और स्वास्थ्य संबंधी अपडेट का इंतजार कर रही है।
