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Ujjain News: '2047 तक हमारे पास होंगे 80 करोड़ युवा मस्तिष्क', उज्जैन में बोले रक्षा वैज्ञानिक डॉ. मिश्रा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 17 Nov 2025 09:46 PM IST
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सार

डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि भारत के विकसित बनने की नींव रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता, क्वांटम तकनीक, मजबूत विनिर्माण और सौ नए औद्योगिक नगरों के निर्माण में है। उन्होंने सुरक्षा को विकास की अनिवार्य शर्त बताया। डॉ. मोहन गुप्त ने तकनीक के साथ नैतिक शिक्षा और प्रशासनिक क्षमता को समान रूप से आवश्यक बताया।

India's defense scientist Dr. Mishra said Ujjain - By 2047 we will have 80 crore young minds.
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विस्तार
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2047 तक हमारे पास 80 करोड़ युवा मस्तिष्क होंगे। यह कोई साधारण संख्या नहीं यह दुनिया की सबसे बड़ी बौद्धिक सेना है। पर केवल संख्या नहीं, दिशा भी चाहिए। जीडीपी में हम भले पांचवें स्थान पर हों, पर विकसित बनने का रास्ता जीडीपी से नहीं, प्रति व्यक्ति आय से तय होता है। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय का स्थान 142वां है और यह वह सच्चाई है जिसे समझे बिना विकास का दावा अधूरा है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा आज कई मोर्चों पर चुनौती बन चुकी है। तेल गैस जैसी जीवनरेखा जिन देशों पर निर्भर है, वे हमारे स्थायी मित्र नहीं। पड़ोसी देशों की अस्थिरता अलग खतरा है। हमारे प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं, पर 140 करोड़ बुद्धिमान भारतीय यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं और इसी शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। जिस राष्ट्र की सुरक्षा क्षमता उसके अपने हाथों में होती है, वही राष्ट्र आत्मविश्वास के साथ विश्व के बीच खड़ा होता है। यही विकसित भारत की नींव है।

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ये बात भारत के रक्षा वैज्ञानिक, पूर्व महानिदेशक ब्रह्मोस, डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय भारत, डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कही। वे भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा आयोजित कर्मयोगी स्व. कृष्ण मंगल सिंह कुलश्रेष्ठ की प्रेरणा से और पद्मभूषण डॉ शिवमंगल सिंह सुमन की स्मृति में रखी गई 23वीं अखिल भारतीय सद्भावना व्याख्यानमाला के शुभारंभ प्रसंग पर बोल रहे थे। 
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विकसित भारत की यात्रा में रक्षा प्रौद्योगिकी का योगदान विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि एक विकसित राष्ट्र तभी बनता है, जब नागरिकों को उत्तम भोजन मिले, शिक्षा सुदृढ़ हो, स्वास्थ्य सबके लिए उपलब्ध हो, आवास सुरक्षित हो, संचार और आवागमन विश्वस्तरीय हो, और लाइफ एक्सपेक्टेंसी निरंतर बढ़ती रहे। पर इन सबके साथ एक और शर्त है—रक्षा क्षमता मजबूत हो। बिना सुरक्षा के विकास केवल एक सुन्दर सपना है, वास्तविकता नहीं। ड्रोन, अंडरवॉटर वेपंस और स्मार्ट मिसाइलें हर कुछ साल में बदल रही हैं। यदि हम केवल खरीदते रहेंगे, तो कुछ साल में वही हथियार आउट ऑफ डेट हो जाते हैं और अरबों रुपये डूब जाते हैं। राष्ट्र खरीदकर नहीं, अपनी क्षमता बनाकर सुरक्षित होता है। इसलिए भारत को यह क्षमता बनानी होगी कि हर वर्ष अपने ड्रोन, अपने विमान और अपने हथियार स्वयं बना सके।

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उन्होंने चेतावनी दी की आने वाला दशक क्वांटम तकनीक का होगा। हमारे रडार, मिसाइलें, ड्रोन, हथियार प्रणाली—सब कुछ क्वांटम पर आधारित होगा। जो देश क्वांटम पर राज करेगा, वही तकनीक और सुरक्षा पर राज करेगा। रक्षा निर्यात बढ़ाना होगा। एक मजबूत विनिर्माण अर्थव्यवस्था खड़ी करनी होगी। रक्षा स्टार्टअप्स की एक नई पीढ़ी तैयार करनी होगी। सरकार की नीतियों को तकनीक की गति के बराबर तेज करना होगा। नीति धीमी और तकनीक तेज यह विरोधाभास हमें आगे नहीं बढ़ने देगा। उन्होंने कहा दुनिया का केवल 0.1 प्रतिशत इंटरनेट ही खुला है, बाकी सब डार्क नेट। वहां पारंपरिक सुरक्षा काम नहीं करती। भविष्य के युद्ध मैदान जमीन पर नहीं, साइबर स्पेस में बन रहे हैं। मिश्रा ने ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात का अनुभव भी साझा किया। हथियार खरीदने वाले देशों से संवाद आसान था। सबसे कठिन था अपनी ही नौकरशाही से लड़ना। रक्षा क्षमता की सबसे बड़ी बाधा बाहरी नहीं, अक्सर हमारी अपनी व्यवस्था होती है।

मिश्रा ने स्पष्ट कहा भारत को केवल 10-12 औद्योगिक शहरों से नहीं चलना। 140 करोड़ लोगों के लिए सौ नए औद्योगिक नगर चाहिए—ऐसे नगर जो पुणे और बेंगलुरु को चुनौती दें और उनसे आगे निकलें। नए भारत के लिए नए शहर, नई तकनीक और नई सोच अनिवार्य है। और अंत में उनका संदेश—2047 का विकसित भारत कोई कल्पना नहीं यह एक प्रतिज्ञा है। यह प्रतिज्ञा तभी पूरी होगी जब हम सच बोलने का साहस रखें, छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें, और उन्हें पूरा करने का संयम रखें। भारत जितना रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर होगा, उतना ही विकसित भारत का सपना वास्तविकता में बदलेगा।

अतिथि स्वागत संस्थान प्रमुख युधिष्ठिर कुलश्रेष्ठ, पूर्व संयुक्त संचालक शिक्षा बृज किशोर शर्मा ने किया। दीप प्रज्वलन वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमनारायण नागर, स्वदेश शर्मा, विश्वास शर्मा, प्रो. बीके आंजना, नीलांजल कुलश्रेष्ठ ने किया। इस अवसर पर प्रमोद सूद, संजय कुलकर्णी, अतुल करंदीकर, एआर मेघवंशी, अशोक कुमार महाजन, संध्या महाजन, अद्विता श्रीवास्तव, पीके गार्गव, डॉ एसएन पांडे , डॉ. विनोद बैरागी श्याम कुमार सिकरवार, किशोर जोशी, डॉ. दिनेश जैन, डॉ. सीमा जोशी, महेश कानूनगो, प्रदीप शर्मा, सौरभ शर्मा, बी.एस. भार्गव, डॉ. गिरीश पंड्या सहित शहर के गणमान्य बौद्धिक जन उपस्थित थे।

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शिक्षा-व्यवस्था मनुष्य को कुशल बनाती है मानव नही - डॉ. गुप्त
वरिष्ठ शिक्षाविद, विचारक तथा महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कुलगुरु डॉ. मोहन गुप्त ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना तभी सार्थक होगी, जब हम लोगों को सामाजिक सरोकारों से गहरे रूप में जोड़ पाएं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में यदि तकनीकी प्रशिक्षण तो दे दिया जाए, परंतु उसे सही दिशा न दी जाए, तो वही तकनीक समाज के लिए विध्वंसक भी बन सकती है। इसलिए विकसित भारत के लिए आवश्यक है कि तकनीक के साथ-साथ उसके नैतिक उपयोग की संस्कृति भी विकसित हो। डॉ. गुप्त ने स्पष्ट किया कि हमारी शिक्षा-व्यवस्था अभी भी मनुष्य को केवल कुशल तो बनाती है, पर मानव बनाने के अपने मूल उद्देश्य को पूरा करती हुई दिखाई नहीं देती। केवल स्किल डेवलपमेंट किसी राष्ट्र को विकसित नहीं बनाता, बल्कि ऐसी शिक्षा चाहिए जो नागरिकों में कर्तव्य-बोध, संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्व को जागृत करे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रशासन-व्यवस्था सक्षम हो और दंड-व्यवस्था प्रभावी। बिना दंड के न तो व्यवस्था चलती है और न ही समाज अपनी मयार्दाएं बनाए रख पाता है। उन्होंने यह महत्वपूर्ण बात कही कि धर्म का अर्थ अपने दायित्व को पहचानने और निभाने में निहित है। यही धर्मबोध एक संस्कृतिमय, सशक्त और विकसित भारत की वास्तविक नींव है। कार्यक्रम का आरंभ संस्थान की शिक्षिकाओं द्वारा सद्भावना गीत की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। 

ऐसे हुआ आयोजन

आयोजन में उपस्थित श्रोता

 

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