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Ujjain Mahakal: छोटी माला से खुश होंगे महाकाल, मोटी हुई तो रह जाएगी बाहर; जानें क्या है मंदिर की नई व्यवस्था

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 06 Dec 2025 02:39 PM IST
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सार

अब केवल छोटी और सामान्य आकार की मालाएं ही चढ़ाई जा सकेंगी। गेट पर सुरक्षा जांच में बड़ी मालाएं रोक दी जाएंगी। वर्ष 2019 में एएसआई और जीएसआई की टीम ने ज्योतिर्लिंग के संरक्षण हेतु कम मात्रा में फूल और छोटी माला चढ़ाने का सुझाव दिया था, जिसे अब लागू किया गया है।

Ujjain Mahakal: The system for offering garlands to Mahakal in the temple has been changed.
ऐसी मालाओं को चढ़ाने पर लगी रोक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को अब फूलों की बड़ी और भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई गई है। देखा जा रहा था कि बड़ी मालाओं के कारण गर्भगृह में भी अव्यवस्था होती थी, जिसके बाद मंदिर समिति ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
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श्री महाकालेश्वर मंदिर में बड़े आकार की फूल-मालाओं को अर्पित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंदिर समिति ने व्यवस्थाओं को अधिक सुव्यवस्थित रखने और सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि मंदिर प्रशासन के अनुसार विशाल मालाओं के कारण गर्भगृह और परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होती थी और व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई आती थी। नये नियम के चलते अब केवल छोटी और सामान्य आकार की मालाएं ही भगवान महाकाल को अर्पित की जा सकेंगी। प्रशासक प्रथम कौशिक ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर में आते समय निर्धारित आकार की ही मालाएं लेकर आएं और मंदिर की नई व्यवस्था में सहयोग करें।
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फूलों की छोटी माला चढ़ाने का भी था सुझाव
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था।

ऐसी मालाओं को चढ़ाने पर लगी रोक

10 से 15 किलो वजनी माला
याद रहे कि पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी और बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था।

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प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश
नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी और भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी।

 
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