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उज्जैन: नारी शक्ति के सम्मान में महाआयोजन, 151 स्थानों पर एक साथ 35 हजार कन्याओं का पूजन, बनेगा नया रिकॉर्ड
Wed, 14 Oct 2026 12:27 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:27 PM IST
सार
17 अक्टूबर को उज्जैन में 151 स्थानों पर 35 हजार कन्याओं का एक साथ पूजन होगा। लोकमान्य तिलक महाआयोजन समिति के इस आयोजन की तैयारियां छह महीने से चल रही हैं। आयोजकों का लक्ष्य नारी शक्ति के सम्मान और सनातन संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना है।
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ऐसे चल रही महाआयोजन की तैयारी
विस्तार
महाकाल की नगरी उज्जैन इस नवरात्रि एक भव्य धार्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। नारी शक्ति के सम्मान और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से शहर के 151 स्थानों पर एक साथ 35 हजार कन्याओं का पूजन किया जाएगा। लोकमान्य तिलक महाआयोजन समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को दूसरे वर्ष और भी भव्य रूप दिया जा रहा है। 17 अक्टूबर को सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक पूरा शहर ‘जय माता दी’ के जयघोष से गूंजेगा।
इस आयोजन की अगुवाई विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा कर रहे हैं। उनकी टीम पिछले छह महीने से तैयारियों में जुटी हुई है। 13 वर्ष से कम उम्र की 35 हजार कन्याओं का पंजीयन 15 जुलाई से 10 अक्टूबर तक किया गया। अब प्रत्येक कन्या को प्रवेशिका के साथ आमंत्रण पत्र दिया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने के लिए शहर के विभिन्न जोन में पांच हजार से अधिक स्वयंसेवक जुटे हैं। धर्मशालाओं, बड़े हॉल और खुले परिसरों सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन के लिए मंडप तैयार किए जा रहे हैं।
ये भी पढ़ें: इंदौर: संगमरमर से बना इंदौर का अन्नपूर्णा मंदिर है आस्था का केंद्र, पर्यटकों के लिए है खास, हाथियों वाला गेट
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विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के अनुसार यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने का जनआंदोलन है। प्रत्येक पूजन स्थल पर कन्या पूजन के महत्व पर वक्ताओं के उद्बोधन भी होंगे। कार्यक्रम में समाजसेवियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। उज्जैन में पहले भी कई बड़े धार्मिक आयोजन हो चुके हैं लेकिन एक ही शहर में एक ही समय पर 151 स्थानों पर 35 हजार कन्याओं का पूजन इस आयोजन को विशेष बनाता है। आयोजकों के अनुसार इसके जरिए एक नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है।
क्यों विशेष है कन्या पूजन?
हिंदू धर्म में कन्या पूजन, कन्या भोज और कुमारी पूजा को अत्यंत पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन, करुणा और संस्कारों का आधार माना गया है। कन्या पूजन इसी विचार को जनमानस तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान है। यह परंपरा समाज को बालिकाओं के प्रति सम्मान, स्नेह और संवेदनशीलता का भाव रखने की प्रेरणा देती है।
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इस आयोजन की अगुवाई विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा कर रहे हैं। उनकी टीम पिछले छह महीने से तैयारियों में जुटी हुई है। 13 वर्ष से कम उम्र की 35 हजार कन्याओं का पंजीयन 15 जुलाई से 10 अक्टूबर तक किया गया। अब प्रत्येक कन्या को प्रवेशिका के साथ आमंत्रण पत्र दिया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने के लिए शहर के विभिन्न जोन में पांच हजार से अधिक स्वयंसेवक जुटे हैं। धर्मशालाओं, बड़े हॉल और खुले परिसरों सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन के लिए मंडप तैयार किए जा रहे हैं।
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विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के अनुसार यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने का जनआंदोलन है। प्रत्येक पूजन स्थल पर कन्या पूजन के महत्व पर वक्ताओं के उद्बोधन भी होंगे। कार्यक्रम में समाजसेवियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। उज्जैन में पहले भी कई बड़े धार्मिक आयोजन हो चुके हैं लेकिन एक ही शहर में एक ही समय पर 151 स्थानों पर 35 हजार कन्याओं का पूजन इस आयोजन को विशेष बनाता है। आयोजकों के अनुसार इसके जरिए एक नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है।
क्यों विशेष है कन्या पूजन?
हिंदू धर्म में कन्या पूजन, कन्या भोज और कुमारी पूजा को अत्यंत पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन, करुणा और संस्कारों का आधार माना गया है। कन्या पूजन इसी विचार को जनमानस तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान है। यह परंपरा समाज को बालिकाओं के प्रति सम्मान, स्नेह और संवेदनशीलता का भाव रखने की प्रेरणा देती है।

ऐसे चल रही महाआयोजन की तैयारी

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