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अधिकमास समापन: 15 जून से पहले जरूर कर लें ये काम, भांजे और भांजी की सेवा से मिलता है 100 यज्ञों का पुण्य

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Thu, 11 Jun 2026 01:18 PM IST
सार

Adhikmaas 2026: पुरुषोत्त मास या मलमास के दौरान किए गए जप, तप, दान, सेवा और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। मान्यता है कि इस माह में भांजे और भांजी की सेवा का खास महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि भांजे-भांजी की सेवा का महत्व क्या है और आप इन्हें कैसे सम्मान दे सकते हैं।

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Purushottam Maas 2026 bhanje bhanji ki seva ka mahatva 15 june se pahle punya kaam
भांजे-भांजी की सेवा का महत्व - फोटो : AI

Purushottam Maas 2026: हिंदू परंपरा में अधिक मास, जिसे पुरुषोत्त म मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है, अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विशेष महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान, सेवा और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास 17 मई से प्रारंभ हो चुका है, जो 15 जून तक रहेगा। ऐसे में इसके समापन से पहले कुछ विशेष धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है, जिनमें भांजे और भांजी की सेवा का खास महत्व बताया गया है।



क्यों महत्वपूर्ण है अधिक मास
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 महीने में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस माह को अपना स्वरूप प्रदान किया, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है, लेकिन पूजा-पाठ, दान और सेवा को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।

Purushottam Maas 2026 bhanje bhanji ki seva ka mahatva 15 june se pahle punya kaam
भांजे-भांजी की सेवा का विशेष महत्व - फोटो : AI

भांजे-भांजी की सेवा का विशेष महत्व
सनातन धर्म में भांजे और भांजी को बहुत आदर का स्थान प्राप्त है। लोक मान्यताओं में कहा जाता है कि एक भांजा सौ ब्राह्मणों के बराबर होता है। यही कारण है कि अधिक मास में मामा-मामी द्वारा भांजे-भांजी की सेवा करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह भी मान्यता है कि बहन के बच्चे ईश्वरीय कृपा और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक होते हैं। उनकी सेवा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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कैसे करें भांजे-भांजी का सम्मान - फोटो : adobe stock

कैसे करें भांजे-भांजी का सम्मान
अधिक मास समाप्त होने से पहले, यानी 15 जून तक, भांजे-भांजी को घर बुलाना या उनके घर जाकर उनका सम्मान करना शुभ माना जाता है। पारंपरिक रूप से उन्हें आदरपूर्वक बैठाकर तिलक करें, आरती उतारें और प्रेम से भोजन कराएं। इसके बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार उन्हें फल, वस्त्र, मिठाई या उपहार भेंट करें। यह छोटा सा प्रयास रिश्तों में मिठास घोलता है और आध्यात्मिक रूप से भी फलदायी माना जाता है।
 

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क्या मिलता है इसका फल - फोटो : Amar Ujala

परिक्रमा करने की परंपरा
सेवा और सम्मान के बाद मामा-मामी द्वारा भांजे-भांजी की 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं। हालांकि, यह परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न रूप में निभाई जाती है।

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क्या मिलता है इसका फल - फोटो : freepik

क्या मिलता है इसका फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का फल कई गुना बढ़ जाता है। भांजे-भांजी का सम्मान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, साथ ही परिवार में प्रेम, सौहार्द और खुशहाली बढ़ती है। कुछ मान्यताओं में इसे सौ यज्ञों के बराबर पुण्यदायी भी माना गया है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।



 

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