Nadi Dosh: कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या होता है? जानें वैवाहिक जीवन पर इसका असर और इससे बचने के उपाय
Nadi Dosh In Kundli: शादी से पहले वर-वधु के कुंडली मिलान में “नाड़ी दोष” को विशेष महत्व दिया गया है। आइए जानते हैं कि नाड़ी दोष असल में क्या है, इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है और क्या हर स्थिति में इससे डरना जरूरी है?
नाड़ी दोष को अशुभ क्यों माना जाता है?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नाड़ी दोष होने पर विवाह के बाद दांपत्य जीवन में समस्याएं आ सकती हैं। बुजुर्गों की मान्यता है कि इसका असर स्वास्थ्य, संतान सुख और आपसी सामंजस्य पर पड़ सकता है। कुछ लोग इसे आर्थिक परेशानियों और रिश्तों में तनाव से भी जोड़कर देखते हैं।
हालांकि आधुनिक ज्योतिषी इस बात पर भी जोर देते हैं कि केवल एक दोष के आधार पर पूरे रिश्ते को नकारना सही नहीं है। कुंडली में मौजूद अन्य योग, ग्रहों की स्थिति और संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। कई उदाहरण ऐसे भी हैं जहां नाड़ी दोष के बावजूद विवाह सुखद और स्थिर रहा है।
किन स्थितियों में नाड़ी दोष प्रभावी नहीं माना जाता?
अक्सर यह समझा जाता है कि समान नाड़ी होने पर दोष जरूर बनेगा, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में कुछ अपवाद भी बताए गए हैं>
- एक ही नक्षत्र, अलग चरण- यदि वर-वधु का नक्षत्र समान हो लेकिन चरण अलग-अलग हों, तो नाड़ी दोष का प्रभाव कम या समाप्त माना जाता है।
- एक ही राशि, अलग नक्षत्र- कुछ मान्यताओं के अनुसार जन्म राशि एक होने और नक्षत्र अलग होने पर भी दोष हल्का माना जाता है।
इसी कारण केवल नाड़ी दोष सुनकर घबराने के बजाय पूरी कुंडली का विश्लेषण जरूरी माना जाता है।
नाड़ी दोष के लिए उपाय
शास्त्रों में नाड़ी दोष के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ पारंपरिक उपाय बताए गए हैं।
- मंत्र जाप और पूजा- महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रमुख उपायों में शामिल है।
- दान-पुण्य- अनाज, वस्त्र, भोजन दान या गौ सेवा जैसे कार्य करने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि इन उपायों से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
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आखिर नाड़ी दोष से कितना डरना चाहिए?
आज की पीढ़ी ज्योतिष को आस्था के रूप में देखती है, लेकिन निर्णय लेते समय व्यावहारिक सोच भी रखती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कुंडली मिलान एक दिशा दिखा सकता है, लेकिन अंतिम सच नहीं होता। रिश्ते विश्वास, समझ और संवाद से मजबूत होते हैं। इसलिए नाड़ी दोष की जानकारी रखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है संतुलित और समझदारी भरा नजरिया।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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