रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से मानी जाती है। रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है, रूद्र+अक्ष, जिसमें रूद्र अर्थात भगवान शंकर और अक्ष यानी अश्रु। धर्म शास्त्रों में मिलने वाली पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के आंसू जिन-जिन स्थानों पर गिरे वहां पर रूद्राक्ष के वृक्षों की उत्पत्ति हुई। रूद्राक्ष के वृक्ष में सर्वत्र मूल, त्वचा, शाखा, पत्ता, फल और फूल सभी में रूद्र अर्थात भगवान शिव का वास होता है। प्राचीन समय से ही ऋषि-मुनियों के द्वारा रूद्राक्ष की माला से जाप और धारण किया जाता है। रूद्राक्ष के धार्मिक महत्व के बारे में तो सभी जानते हैं। रूद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत होता है और भगवान शिव की कृपा से जातक की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी रूद्राक्ष की माला से जाप करना सबसे उत्तम माना जाता है। धार्मिक ज्योतिष महत्व होने के साथ ही स्वास्थ्य से भी गहरा संबंध है। तो चलिए जानते हैं कि रूद्राक्ष किस तरह से आपको लाभ पहुंचाता है।
धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी अद्भुत है रूद्राक्ष, बढ़ती है स्मरण शक्ति, हृदय रोग में भी फायदेमंद
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Mon, 01 Mar 2021 01:40 PM IST
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