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Auto Industry: ऑटो इंडस्ट्री के लिए वित्त वर्ष 26 होगा 'सुधार का साल', फाडा का बयान, जानें इसके मायने
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 09 Apr 2025 05:57 PM IST
सार
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) भारत की ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक 'सुधार' या 'करेक्शन' का साल होगा।
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- फोटो : PTI
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) भारत की ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक 'सुधार' या 'करेक्शन' का साल होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में लगातार ग्रोथ देखने को मिली है। और अब बाजार को थोड़े ठहराव की जरूरत है ताकि इंडस्ट्री लंबी दौड़ में स्थिर रह सके।
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FY25 में रहा सीमित विकास
वित्त वर्ष 2025 में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने कुल मिलाकर 6.46 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। इसमें पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट ने 4.87 प्रतिशत, टू-व्हीलर्स ने 7.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाई। लेकिन कमर्शियल व्हीकल्स के लिए यह साल कुछ खास नहीं रहा, जिसमें 0.17 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
यह भी पढ़ें - Ampere Reo 80: एम्पीयर रीओ 80 ईवी लॉन्च, लाइसेंस और आरसी की नहीं है जरूरत, जानें रेंज, कीमत और फीचर्स
FY23 और FY24 में जबरदस्त उछाल
इसके मुकाबले FY23 और FY24 में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली थी - क्रमशः 10 प्रतिशत और 21 प्रतिशत। जो दिखाता है कि उस समय डिमांड भी ज्यादा थी और सप्लाई चेन भी मजबूत बनी हुई थी। खासकर कोरोना महामारी के बाद लोगों में गाड़ियों को लेकर दबा हुआ खर्च एक साथ बाहर आया था।
यह भी पढ़ें - Used Cars: भारत के सेकंड हैंड कार बाजार में बदल रहे रुझान, ऑटोमैटिक और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ी मांग
वित्त वर्ष 2025 में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने कुल मिलाकर 6.46 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। इसमें पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट ने 4.87 प्रतिशत, टू-व्हीलर्स ने 7.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाई। लेकिन कमर्शियल व्हीकल्स के लिए यह साल कुछ खास नहीं रहा, जिसमें 0.17 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
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FY23 और FY24 में जबरदस्त उछाल
इसके मुकाबले FY23 और FY24 में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली थी - क्रमशः 10 प्रतिशत और 21 प्रतिशत। जो दिखाता है कि उस समय डिमांड भी ज्यादा थी और सप्लाई चेन भी मजबूत बनी हुई थी। खासकर कोरोना महामारी के बाद लोगों में गाड़ियों को लेकर दबा हुआ खर्च एक साथ बाहर आया था।
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बाजार की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय असर
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) (सियाम) ने पहले ही वित्त वर्ष 26 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में सिर्फ 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत ग्रोथ की संभावना जताई है। फाडा को भी लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ, वैश्विक बाजार में अस्थिरता, और लोगों की घटती अतिरिक्त आय वित्त वर्ष 26 में ऑटो सेक्टर को चुनौती दे सकती है।
यह भी पढ़ें - VVIP Cars: भारत में कौन सी गाड़ियां बिना नंबर प्लेट चल सकती हैं, किन वाहनों पर होता है तीर का निशान?
ग्राहक कर रहे हैं इंतजार
विग्नेश्वर का कहना है कि "स्टॉक मार्केट पिछले कुछ महीनों से ठीक प्रदर्शन नहीं कर रहा। ऐसे में बहुत से ग्राहक अपनी निवेश की रकम वापस आने तक कार जैसे बड़े खर्चों से बच रहे हैं।"
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सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) (सियाम) ने पहले ही वित्त वर्ष 26 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में सिर्फ 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत ग्रोथ की संभावना जताई है। फाडा को भी लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ, वैश्विक बाजार में अस्थिरता, और लोगों की घटती अतिरिक्त आय वित्त वर्ष 26 में ऑटो सेक्टर को चुनौती दे सकती है।
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ग्राहक कर रहे हैं इंतजार
विग्नेश्वर का कहना है कि "स्टॉक मार्केट पिछले कुछ महीनों से ठीक प्रदर्शन नहीं कर रहा। ऐसे में बहुत से ग्राहक अपनी निवेश की रकम वापस आने तक कार जैसे बड़े खर्चों से बच रहे हैं।"
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चुनौतियों को अवसर में बदलने की कोशिश
फाडा का मानना है कि इन चुनौतियों को अगर सही तरीके से निपटा जाए तो ये इंडस्ट्री के लिए नए मौके बन सकते हैं। संगठन ग्राहकों से लगातार बातचीत कर रहा है ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से सही गाड़ी चुन सकें।
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इन्वेंटरी का बोझ बना सिरदर्द
ऑटो सेक्टर की एक और बड़ी परेशानी है बढ़ती इन्वेंटरी। डीलर्स के पास गाड़ियों का स्टॉक जरूरत से ज्यादा है। फाडा का सुझाव है कि कार निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इसे हल करना चाहिए। आमतौर पर इन्वेंटरी 21 दिन की होनी चाहिए, लेकिन कई कंपनियों के पास 50 दिन तक का स्टॉक जमा है।
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फाडा का मानना है कि इन चुनौतियों को अगर सही तरीके से निपटा जाए तो ये इंडस्ट्री के लिए नए मौके बन सकते हैं। संगठन ग्राहकों से लगातार बातचीत कर रहा है ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से सही गाड़ी चुन सकें।
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इन्वेंटरी का बोझ बना सिरदर्द
ऑटो सेक्टर की एक और बड़ी परेशानी है बढ़ती इन्वेंटरी। डीलर्स के पास गाड़ियों का स्टॉक जरूरत से ज्यादा है। फाडा का सुझाव है कि कार निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इसे हल करना चाहिए। आमतौर पर इन्वेंटरी 21 दिन की होनी चाहिए, लेकिन कई कंपनियों के पास 50 दिन तक का स्टॉक जमा है।
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भविष्य को लेकर भरोसा बरकरार
विग्नेश्वर कहते हैं, "हमने 2008 की मंदी, 2013 की चुनौती और कोविड जैसी बड़ी मुश्किलों का सामना किया है, और हर बार पहले से मजबूत होकर उभरे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि वित्त वर्ष 26 के बाद भी ऑटो इंडस्ट्री पूरी ताकत से वापसी करेगी।"
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विग्नेश्वर कहते हैं, "हमने 2008 की मंदी, 2013 की चुनौती और कोविड जैसी बड़ी मुश्किलों का सामना किया है, और हर बार पहले से मजबूत होकर उभरे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि वित्त वर्ष 26 के बाद भी ऑटो इंडस्ट्री पूरी ताकत से वापसी करेगी।"
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