भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) (CAG) (सीएजी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में टोल वसूली को लेकर गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है।
CAG: सीएजी रिपोर्ट में खुलासा- NHAI की चूक से टोल पर ₹180 करोड़ का अतिरिक्त बोझ, आम लोगों की जेब पर पड़ा भारी
कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा संचालित टोल कार्यों में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया।
आम लोगों पर कितना असर पड़ा?
इस नियम का पालन न होने के कारण:
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सड़क उपयोगकर्ताओं पर लगभग 180 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ा
यानी लोगों को तय सीमा से ज्यादा टोल देना पड़ा।
क्या सरकार को भी नुकसान हुआ?
हां, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि:
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गलत तरीके से नीतियों को लागू करने के कारण राजस्व का नुकसान हुआ
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कुछ मामलों में भुगतान में देरी से भी टोल आय पर असर पड़ा
इससे सरकारी एजेंसी को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
किन राज्यों में सामने आई गड़बड़ी?
यह अनियमितताएं खासतौर पर:
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गुजरात
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महाराष्ट्र
में टोल संचालन की समीक्षा के दौरान सामने आईं।
सिस्टम में क्या कमी पाई गई?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि:
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टोल मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) में एकरूपता की कमी है
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अलग-अलग सिस्टम के कारण डेटा ट्रांसफर में दिक्कतें आती हैं
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इससे संचालन में अक्षमता बढ़ती है
क्या सुधार की जरूरत बताई गई है?
CAG ने सुझाव दिया है कि:
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टोल मैनेजमेंट सिस्टम को मानकीकृत किया जाए
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डेटा और संचालन में पारदर्शिता बढ़ाई जाए
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नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए
टोल वसूली में हुई लापरवाही का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है।
अब जरूरी है कि सिस्टम में सुधार लाकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।