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Non-EV Cars: 2035 के इंजन प्रतिबंध पर नरमी की तैयारी, यूरोपीय ऑटो उद्योग को मिल सकती है राहत
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 15 Dec 2025 07:07 PM IST
सार
EU 2035 के कम्बशन-इंजन बैन में ढील देने की योजना बना रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल कंपनियों को राहत मिलेगी। लेकिन इससे इलेक्ट्रिक वाहन की प्रगति धीमी हो सकती है, राजनीतिक विरोध हो सकता है और टेक्नोलॉजी का गैप बढ़ सकता है।
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Maserati MC Pura
- फोटो : Maserati
यूरोप का ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और उत्सर्जन-मुक्त परिवहन की ओर संक्रमण उसकी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच यूरोपीय संघ (ईयू) 2035 से नए कंबशन इंजन वाहनों पर लगने वाले प्रतिबंध को लेकर अपने सख्त रुख में नरमी लाने पर विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब यूरोप की बड़ी वाहन कंपनियां भारी निवेश, कमजोर मांग और संभावित जुर्मानों के दबाव से जूझ रही हैं।
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- फोटो : Mercedes-Benz
2035 के लक्ष्य में बदलाव की संभावना
यूरोपीय संघ के भीतर चल रही चर्चाओं से संकेत मिलते हैं कि 2035 में प्रस्तावित पूर्ण प्रतिबंध को लेकर कुछ छूट या लचीले प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। इन चर्चाओं से जुड़े लोगों के मुताबिक, पांच साल तक की संभावित समय-सीमा बढ़ाने या कुछ परिस्थितियों में इस प्रतिबंध को पूरी तरह टालने जैसे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है। इसके साथ ही नियामकीय बोझ कम करने और यूरोप में बने छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नए प्रोत्साहनों की योजना भी तैयार की जा रही है।
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उद्योग और सरकार का साझा दबाव
इस संभावित कदम के पीछे स्टेलांटिस और मर्सिडीज-बेंज जैसी बड़ी कंपनियों की तीव्र लॉबिंग रही है, जिन्हें आने वाले वर्षों में एक अरब यूरो से ज्यादा के जुर्माने का खतरा नजर आ रहा था। जर्मनी जैसे प्रमुख ऑटो-उत्पादक देशों ने भी बदलाव के लिए दबाव बनाया है, जहां मर्सिडीज, फॉक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसे दिग्गज ब्रांड स्थित हैं। इन देशों की चिंता केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार और राजनीतिक असंतोष का जोखिम भी इससे जुड़ा हुआ है।
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यूरोपीय संघ के भीतर चल रही चर्चाओं से संकेत मिलते हैं कि 2035 में प्रस्तावित पूर्ण प्रतिबंध को लेकर कुछ छूट या लचीले प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। इन चर्चाओं से जुड़े लोगों के मुताबिक, पांच साल तक की संभावित समय-सीमा बढ़ाने या कुछ परिस्थितियों में इस प्रतिबंध को पूरी तरह टालने जैसे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है। इसके साथ ही नियामकीय बोझ कम करने और यूरोप में बने छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नए प्रोत्साहनों की योजना भी तैयार की जा रही है।
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उद्योग और सरकार का साझा दबाव
इस संभावित कदम के पीछे स्टेलांटिस और मर्सिडीज-बेंज जैसी बड़ी कंपनियों की तीव्र लॉबिंग रही है, जिन्हें आने वाले वर्षों में एक अरब यूरो से ज्यादा के जुर्माने का खतरा नजर आ रहा था। जर्मनी जैसे प्रमुख ऑटो-उत्पादक देशों ने भी बदलाव के लिए दबाव बनाया है, जहां मर्सिडीज, फॉक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसे दिग्गज ब्रांड स्थित हैं। इन देशों की चिंता केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार और राजनीतिक असंतोष का जोखिम भी इससे जुड़ा हुआ है।
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2025 BMW 2 Series Gran Coupe
- फोटो : BMW
राहत के साथ जुड़े खतरे
हालांकि यह राहत उद्योग के लिए सुकून भरी हो सकती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। जरूरत से ज्यादा लचीलापन तकनीकी विकास की गति को धीमा कर सकता है और टेस्ला तथा चीन की बीवाईडी जैसी कंपनियों के मुकाबले यूरोप को पीछे छोड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ढील अस्थायी नहीं रही, तो यूरोप न केवल अपने जलवायु लक्ष्यों से चूक सकता है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक की दौड़ में भी पिछड़ सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए संक्रमण को आसान बनाने की कोशिश
2035 की समय-सीमा में बदलाव को यूरोपीय नेता उपभोक्ताओं के नजरिए से भी देख रहे हैं। अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का बोझ मुख्य रूप से निर्माताओं पर था, जबकि कई राष्ट्रीय सरकारों ने उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नीतियां नहीं अपनाईं। अतिरिक्त समय मिलने से सरकारों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और टैक्स राहत जैसे उपायों पर दोबारा काम करने का मौका मिल सकता है, हालांकि इसके लिए वित्तीय संसाधन सीमित हैं।
यह भी पढ़ें - December Car Deals: दिसंबर में कार खरीदना सही है या नहीं? समझें क्या है इसके गणित और मनोविज्ञान की असली कहानी
हालांकि यह राहत उद्योग के लिए सुकून भरी हो सकती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। जरूरत से ज्यादा लचीलापन तकनीकी विकास की गति को धीमा कर सकता है और टेस्ला तथा चीन की बीवाईडी जैसी कंपनियों के मुकाबले यूरोप को पीछे छोड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ढील अस्थायी नहीं रही, तो यूरोप न केवल अपने जलवायु लक्ष्यों से चूक सकता है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक की दौड़ में भी पिछड़ सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए संक्रमण को आसान बनाने की कोशिश
2035 की समय-सीमा में बदलाव को यूरोपीय नेता उपभोक्ताओं के नजरिए से भी देख रहे हैं। अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का बोझ मुख्य रूप से निर्माताओं पर था, जबकि कई राष्ट्रीय सरकारों ने उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नीतियां नहीं अपनाईं। अतिरिक्त समय मिलने से सरकारों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और टैक्स राहत जैसे उपायों पर दोबारा काम करने का मौका मिल सकता है, हालांकि इसके लिए वित्तीय संसाधन सीमित हैं।
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BYD Sealion 7
- फोटो : BYD India
छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस
यूरोपीय आयोग अगले सप्ताह छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नए कदमों का प्रस्ताव रखने वाला है। इनमें कुछ सुरक्षा और उत्सर्जन नियमों से 10 साल की छूट, आरक्षित पार्किंग और सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर बने किफायती ईवी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां
हरित संक्रमण की लागत अब एक राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। बढ़ते पॉपुलिज्म के बीच कई सरकारें आशंकित हैं कि ईंधन की कीमतों और नए करों से मतदाताओं का विरोध बढ़ सकता है। इसी वजह से 2040 के नए जलवायु लक्ष्य पर सहमति बनने के साथ-साथ ईंधन पर कार्बन कीमत लागू करने को 2028 तक टाल दिया गया है।
यह भी पढ़ें - Yamaha: भारत में यामाहा ने वाईजेडएफ आर-2 नाम कराया दर्ज, नई सुपरसपोर्ट की तैयारी के संकेत
यूरोपीय आयोग अगले सप्ताह छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नए कदमों का प्रस्ताव रखने वाला है। इनमें कुछ सुरक्षा और उत्सर्जन नियमों से 10 साल की छूट, आरक्षित पार्किंग और सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर बने किफायती ईवी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां
हरित संक्रमण की लागत अब एक राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। बढ़ते पॉपुलिज्म के बीच कई सरकारें आशंकित हैं कि ईंधन की कीमतों और नए करों से मतदाताओं का विरोध बढ़ सकता है। इसी वजह से 2040 के नए जलवायु लक्ष्य पर सहमति बनने के साथ-साथ ईंधन पर कार्बन कीमत लागू करने को 2028 तक टाल दिया गया है।
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Porsche Panamera GTS
- फोटो : Porsche
उद्योग के लिए सीमित राहत
ऑटो निर्माताओं के लिए यह देरी निवेश योजनाओं पर दोबारा विचार करने का मौका देती है, लेकिन इससे रोजगार में बड़े सुधार की गारंटी नहीं मिलती। बैटरी संयंत्रों की कई योजनाएं पहले ही धीमी या स्थगित हो चुकी हैं और सप्लायर कंपनियां सबसे ज्यादा दबाव में हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर संक्रमण बाजार की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता, तो हजारों छोटे पुर्जा निर्माता संकट में आ सकते हैं।
संतुलन की कठिन परीक्षा
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यूरोपीय नीति-निर्माता किस तरह संतुलन बनाते हैं। चुनौती यह है कि ऑटो उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखा जाए, बिना 25 वर्षों में नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य से भटके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा लागत, बैटरी उत्पादन और परमिट प्रक्रियाओं जैसी बुनियादी समस्याओं पर प्रगति नहीं हुई, तो समय-सीमा में बदलाव केवल दर्द को टालने जैसा होगा, समाधान नहीं।
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ऑटो निर्माताओं के लिए यह देरी निवेश योजनाओं पर दोबारा विचार करने का मौका देती है, लेकिन इससे रोजगार में बड़े सुधार की गारंटी नहीं मिलती। बैटरी संयंत्रों की कई योजनाएं पहले ही धीमी या स्थगित हो चुकी हैं और सप्लायर कंपनियां सबसे ज्यादा दबाव में हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर संक्रमण बाजार की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता, तो हजारों छोटे पुर्जा निर्माता संकट में आ सकते हैं।
संतुलन की कठिन परीक्षा
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यूरोपीय नीति-निर्माता किस तरह संतुलन बनाते हैं। चुनौती यह है कि ऑटो उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखा जाए, बिना 25 वर्षों में नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य से भटके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा लागत, बैटरी उत्पादन और परमिट प्रक्रियाओं जैसी बुनियादी समस्याओं पर प्रगति नहीं हुई, तो समय-सीमा में बदलाव केवल दर्द को टालने जैसा होगा, समाधान नहीं।
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