केंद्र सरकार सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए कडे कदम उठाने जा रही है। जिसके तहत इस साल अक्टूबर से कारों में नए मानक लागू होंगे। इन मानकों के तहत सभी कारों और एसयूवी वाहन निर्मातों को अपनी गाड़ियों में पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाना अनिवार्य होगा।
इन सेफ्टी फीचर्स के बिना सड़कों पर नहीं उतरेंगी कारें, गाड़ी खरीदते वक्त आप भी रखें ध्यान!
2018 में शुरू हुई थी पहल
2018 की शुरुआत में सरकार ने आने वाली सभी नई कारों में इन बदलावों की सिफारिश की थी, जिनमें नए डिजाइन के बोनेट बनाने के लिए कहा गया था। ताकि सड़क पर पैदल चलने वालों के साथ अगर कोई हादसा घटता है, तो उन्हें कम से कम नुकसान पहुंचे।
1.5 लाख लोगों की मौत
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं। जिनमें 60 फीसदी पैदल यात्री होते हैं। जिसे देखते हुए दुनियाभर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं। पैदल यात्रियों को कम से कम चोट लगे इसके लिए गाड़ियों में अगले हिस्से में फ्रंट सेंसर्स लगाने का प्रावधान किया गया है, जो एक सॉफ्टवेयर से जुड़े होंगे।
अमेरिका, ब्रिटेन के मुकाबले भारत पीछे
वहीं गाड़ियों में खास एयरबैग्स यूनिट लगी होगी, जो इंफ्रारेड टेक्नोल़ॉजी की मदद से संभावित हादसे को भांपते हुए एक्यूटेटर्स इंजन हुड को ऊपर की तरफ उठा देंगे, ताकि पैदल यात्री कठोर चीजों जैसे इंजन के संपर्क में आने से बच जाए। अमेरिका और ब्रिटेन के मुकाबले भारत में फिलहाल ऑटोमोटिव सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अभी बेहद पीछे हैं।
पहले लग्जरी कारों में आते थे ये फीचर्स
लेकिन अब सरकार सक्रियता दिखाते हुए नए नियमों को लागू करने में जुट गई है। ताकि पैदल यात्रियों के जानोमाल की सुरक्षा की जा सके। इससे पहले पेडेस्ट्रियन सेफ्टी फीचर्स केवल लग्जरी गाड़ियों में आते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें सभी गाड़ियों में लागू किया जा रहा है। 2019 में वाहनों की सुरक्षा मानकों को लेकर सबसे ज्यादा सक्रियता दिखाई गई, जहां अक्टूबर से पहले ही सभी कंपनियों ने नए सुरक्षा मानकों के मुताबिक अपनी गाड़ियों को अपग्रेड कर दिया।