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EV: 2032 तक 12 गुना बढ़ सकता है भारत का ईवी बाजार! IESA रिपोर्ट में 3.04 करोड़ यूनिट बिक्री का अनुमान

Mon, 13 Jul 2026 04:22 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 13 Jul 2026 04:22 PM IST
सार

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर नेशनल EV टारगेट के तहत उच्च विकास वाला परिदृश्य साकार होता है, तो 2032 तक देश का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार 12 गुना बढ़कर 3.04 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच सकता है।

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India's EV Market to Grow 12-Fold by 2032, Annual Sales May Touch 30.4 Million Units: IESA Report
Electric Vehicles Market Growth - फोटो : Amar Ujala

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का बाजार इस समय एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस द्वारा तैयार 'इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस' (IESA) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल ईवी टारगेट (NEV) के तहत साल 2032 तक भारत का ईवी बाजार 12 गुना बढ़कर 30.4 मिलियन (3.04 करोड़) यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान है।

बाजार में यह तेजी साफ देखी जा सकती है। साल 2024 में जहां देश में 2.0 मिलियन (20 लाख) इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.6 मिलियन (26 लाख) यूनिट्स पर पहुंच गया। यह सालाना बिक्री में लगभग 26 प्रतिशत का शानदार उछाल दर्शाता है। इस रफ्तार के पीछे ईंधन की बढ़ती कीमतें (जो ईवी को ज्यादा किफायती बनाती हैं) और नए-नए स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल और अन्य प्रोडक्ट्स का लॉन्च होना है, जिसने ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।

गाड़ियों की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी?

साल 2024 में भारत में बिकने वाले कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान 8.1 प्रतिशत था। लेकिन साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 9.5 प्रतिशत हो गया। यह बदलाव साफ दिखाता है कि देश का ऑटोमोबाइल बाजार अब स्थायी रूप से इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ रहा है। 

India's EV Market to Grow 12-Fold by 2032, Annual Sales May Touch 30.4 Million Units: IESA Report
Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

कौन से इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार पर है सबसे ज्यादा कब्जा?

साल 2025 में बिके कुल 2.5 मिलियन (25 लाख) इलेक्ट्रिक वाहनों में अलग-अलग श्रेणियों का योगदान कुछ इस तरह रहा:

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (E2W) - 60.1% हिस्सेदारी: भारत के ईवी बाजार पर सबसे बड़ा दबदबा इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइकों का रहा। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी आधे से भी अधिक यानी 60.1 प्रतिशत दर्ज की गई।

  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (E3W) - 31.6% हिस्सेदारी: तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहन (जैसे ई-रिक्शा और ऑटो) दूसरे सबसे बड़े खिलाड़ी रहे। अगर टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर को मिला दिया जाए, तो कुल ईवी बिक्री का 91 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ इन्हीं दो श्रेणियों से आता है।

  • इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स (E4W) - 7.7% हिस्सेदारी: पैसेंजर कारों के सेगमेंट में भी ग्राहकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। जिसके चलते चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

  • इलेक्ट्रिक बसें (0.2%) और ट्रक (0.4%): सार्वजनिक खरीद कार्यक्रमों और फ्लीट ऑपरेटरों (व्यावसायिक वाहन चलाने वाली कंपनियों) की प्रतिबद्धताओं के कारण बसों और ट्रकों ने भी बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 

India's EV Market to Grow 12-Fold by 2032, Annual Sales May Touch 30.4 Million Units: IESA Report
Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

बैटरी की डिमांड में कितना बड़ा उछाल आने वाला है?

जैसे-जैसे सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे उनके दिल यानी 'बैटरी' की मांग भी आसमान छू रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में कुल बैटरी की मांग 19 GWh से बढ़कर 362 GWh होने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ईवी की संख्या तो बढ़ ही रही है, साथ ही गाड़ियों में लगने वाले बैटरी पैक का औसत आकार (कैपेसिटी) भी बड़ा हो रहा है।

अगर हम साल 2025 की बात करें, तो कुल बैटरी मांग 19 GWh तक पहुंच गई, जो 2024 में केवल 13 GWh थी।

बैटरी की इस कुल खपत (2025) को अगर हम वाहनों के हिसाब से समझें, तो इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • फोर-व्हीलर्स (40%): यूनिट्स की बिक्री भले ही कम हो, लेकिन बड़ी बैटरी लगने के कारण कुल बैटरी खपत में चार पहिया गाड़ियां सबसे आगे हैं।

  • थ्री-व्हीलर्स (27%): यह दूसरे स्थान पर रहे।

  • टू-व्हीलर्स (23%): यह तीसरे स्थान पर रहे।

  • बसें (7.8%): बसों की बिक्री यूनिट्स में भले ही सिर्फ 0.2% है, लेकिन उनके विशाल बैटरी पैक के कारण कुल बैटरी मांग में उनका हिस्सा बहुत बड़ा (7.8%) है।

  • ट्रक (1.9%): हल्के, मध्यम और भारी इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के धीरे-धीरे बढ़ने से ट्रकों का फुटप्रिंट 1.9 प्रतिशत रहा।

अहम बात: रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2029 के बाद बिजनेस-एज-यूज़ुअल (BAU) और नेशनल ईवी टारगेट (NEV) के बीच का अंतर और बड़ा होगा। यानी भारत में ईवी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी नीतियां कितनी मजबूत हैं, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से बनता है और स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को कितनी रफ्तार मिलती है।

 

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India's EV Market to Grow 12-Fold by 2032, Annual Sales May Touch 30.4 Million Units: IESA Report
Electric Vehicles - फोटो : AI

कितने हजार करोड़ का होने जा रहा है ईवी कंपोनेंट मार्केट?

भारत का इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट (पुर्जे) बाजार साल 2025 में 41,000 करोड़ रुपये का था। बिजनेस-एज-यूजुअल (BAU) परिदृश्य के तहत, इसके लगभग 38 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (CAGR) से बढ़ते हुए साल 2032 तक 3,02,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

साल 2025 में कंपोनेंट बाजार में अलग-अलग पुर्जों की हिस्सेदारी इस प्रकार थी:

  • बैटरी पैक: 52% (बाजार में सबसे बड़ा दबदबा)

  • मोटर्स: 22%

  • इनवर्टर: 12%

  • बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS): 11%

  • DC-DC कनवर्टर: 3% 

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India's EV Market to Grow 12-Fold by 2032, Annual Sales May Touch 30.4 Million Units: IESA Report
Electric Vehicles - फोटो : AI

भारतीय ईवी इंडस्ट्री के सामने इस समय क्या चुनौतियां हैं?

रिपोर्ट में भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को लेकर कुछ अहम और कड़वी सच्चाइयों का भी जिक्र किया गया है, जिन्हें सुधारना बेहद जरूरी है:

  • मोटर और कंट्रोलर का कम लोकलाइजेशन: भारत में मोटर और कंट्रोलर का स्थानीयकरण यानी घरेलू स्तर पर निर्माण अभी भी सिर्फ 30-40 प्रतिशत ही है।

  • आयात पर अत्यधिक निर्भरता: इनवर्टर की सप्लाई चेन के लिए भारत अभी भी पूरी तरह से आयात पर निर्भर है।

  • सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में अंतर: भारत की बीएमएस (BMS) सॉफ्टवेयर क्षमता तो बहुत बेहतरीन है, लेकिन उसका हार्डवेयर लोकलाइजेशन (घरेलू निर्माण) अभी भी काफी पीछे छूटा हुआ है।


भविष्य का मंत्र: साल 2025 से 2032 के बीच बनने वाले 2,61,000 करोड़ रुपये के इस नए बढ़ते बाजार का सबसे बड़ा फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा, जो मांग में बड़ा उछाल आने से पहले ही भारत के भीतर पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइवट्रेन इंटीग्रेशन में अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को गहराई से स्थापित कर लेंगी। 

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