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इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये जरूरी टिप्स आ सकते हैं आपके काम

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Jan 2020 11:35 AM IST
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Must Read these Tips or guide before buying the Electric two wheeler Bike or Scooter in India
Hamara Bajaj is back with electric scooter Chetak - फोटो : Social

2019 में देश में तमाम ऑटो कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन लॉन्च कर चुकी हैं। हाल ही में बजाज ने भी अपने पुराने ब्रांड चेतक का इलेक्ट्रिक वर्जन फिर से लॉन्च किया है। एक अनुमान के मुताबिक अथर, ओकिनावा, एंपियर, हीरो इलेक्ट्रिक, रिवोल्ट समेत कई कंपनियों के एक दर्जन से ज्यादा इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन इन दिनों बाजार में हैं। वहीं ग्राहक भी उनमें दिलचस्पी ले रहे हैं। दक्षिण भारतीय शहरों में तो काफी संख्या में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सड़कों पर दिखाई पड़ रहे हैं। अगर आप भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं...


 

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परफॉरमेंस को ध्यान में रखें

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Ultraviolette F77 Electric Bike launch - फोटो : Social Media

रेंज

नई इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटर खरीदते समय ध्यान रखें कि वह फुल चार्ज में कितनी दूरी तय कर लेता है। अलग-अलग मॉडल की ड्राइविंग रेंज में अंतर होता है, जो 60 किमी से लेकर 150 किमी तक हो सकती है। वहीं कई इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में स्पोर्ट मोड, इको मोड होते है, हर मोड में परफॉरमेंस का अंतर होता है।

पिकअप

यह बात ध्यान रखनी जरूरी है कि इस बाइक या स्कूटर का पिकअप कितना है। इलेक्ट्रिक वाहनों में आने वाली मोटर्स जल्दी टॉर्क पकड़ती है, जिससे व्हीकल जल्दी पिकअप पकड़ता है। जैसे अथर कंपनी का दावा है कि उसका स्कूटर 0 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार मात्र 3.9 सेकंड में पकड़ लेता है।

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग

आजकल कई इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर निर्माता कंपनियां अपनी गाड़ियों में यह फीचर दे रही हैं। इस फीचर का फायदा यह है कि इससे बैटरी के चार्ज और डिस्चार्ज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इस मैकेनिज्म से ब्रेकिंग के दौरान व्हीकल की काइनेटिक एनर्जी इलेक्ट्रिसिटी में कनवर्ट हो जाती है। यह इलेक्ट्रिसिटी बैटरी में स्टोर हो जाती है, जिससे दोपहिया वाहन की एफिशिएंसी बढ़ जाती है।

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बैटरी का भी रखें ध्यान

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TVS Zapplin Hybrid Electric Cruser Bike

कैसी हो बैटरी

सभी लेटेस्ट दोपहिया वाहनों में लीथियम-आयन बैटरी लगी होती है। पुरानी पीढ़ी के वाहनों में लेड-एसिड वाली बैटरियां आती थीं, लेकिन अब उनकी जगह पर लीथियम बैटरियां लाई जा रही हैं। वहीं सरकार ने भी लेड-एसिड वाली बैटरियों को फेम-2 स्कीम से बाहर कर दिया है, यानी कि उन पर सरकार सब्सिडी नहीं देगी। इवोल्ट और एंपियर ने दो तरह के वेरियंट लॉन्च किए हैं। इनमें लेड-एसिड वाले वेरियंट 15 से 25 फीसदी तक सस्ते हैं। वहीं लीथियम आयन बैटरी की लाइफ जहां पांच साल तक होती है, तो लेड-एसिड बैटरी की लाइफ दो साल तक होती है।

कैपेसिटी

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने से पहले बैटरी की कैपेसिटी पर भी गौर करें। कुछ कंपनियां बैटरियों की क्षमता को एंपीयर-ऑवर्स Ah में मापती हैं, तो कुछ kWh किलोवॉट ऑवर्स में मापती हैं। बैटरी की कैपेसिटी जितनी ज्यादा होगी, उसकी ड्राइविंग रेंज उतनी ही ज्यादा होगी।

डेफ्थ ऑफ डिस्चार्ज (DoD)

कुछ ऑटो कंपनियां DoD परसेंटेज देती है, जो बैटरी में स्टोर एनर्जी को बताया है कि आप कितनी बैटरी इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे 80 फीसदी DoD का का मतलब है कि आपको दोपहिया वाहन बैटरी कैपेसिटी का 80 फीसदी ही प्रयोग कर सकता है। लीथियम आयन बैटरियों में 100 फीसदी DoD की उम्मीद की जाती है। इसका मतलब है कि बैटरी को 100 फीसदी तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

बैटरी लाइफ

कंपनियां अपनी बैटरी स्पेसिफिकेशंस के साथ बैटरी की लाइफ साइकिल भी बताती हैं। इससे  पता लगाया जा सकता है कि बैटरी की लाइफ कितनी है यानी कि बैटरी को कितनी बार चार्ज किया जा सकता है। हालांकि यह आपके इस्तेमाल पर निर्भर करता है, जैसे किसी बैटरी की चार्जिंग साइकिल 1000 है और आप दिन में दो बार फुल चार्ज करते हैं, तो सालभर में 730 बार चार्जिंग कर लेते हैं। इसका मतलब ये है कुछ समय बाद आपको बैटरी बदलने की जरूरत पड़ेगी।                

बैटरी वारंटी

किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन के लिए बैटरी सबसे जरूरी और कीमती हिस्सा होता है। कई कंपनियां बैटरी पैक पर अतिरिक्त वारंटी भी देती हैं। बैटरी पर वारंटी समय और दूरी के हिसाब से दी जाती है। जैसे कंपनियां पांच साल या एक लाख किमी की वारंटी देती हैं। अगर बैटरी पांच साल पहले से 100 फीसदी चार्ज होने की बजाय 80 फीसदी होती है, तो उसे वारंटी के तहत बदला जा सकता है। अगर आपके वाहन की रेंज 100 किमी है, तो आपकी बैटरी 80 किमी तक ही दूरी तय करेगी।
 

चार्जर से संबंधित जानकारियां

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Ather Electric Scooter

चार्जर रेंटिग

खरीदने से पहले चार्जर की रेटिंग चेक कर लें। उसे कितने वोल्टेज और एंपीयर की जरूरत है जांच लें। ताकि उसके लिए सही सॉकेट चुन सकें।

चार्जिंग टाईम

पूरी तरह से डिस्चार्ज बैटरी को चार्ज होने में कितना वक्त लगता है यह जानने बेहद जरूरी है। साथ ही जांचे कि उसमें फास्ट चार्जिंग की सुविधा है या नहीं। आमतौर पर
फास्ट चार्जिंग की मदद से बैटरी 80 फीसदी तक चार्ज होने में 30 से 40 मिनट का वक्त लेती है। वहीं यह भी देखें कि क्या कंपनी फास्ट चार्जिंग के लिए इक्विपमेंट भी दे रही है नहीं।

पोर्टेबिलिटी

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने से पहले देख लें कि क्या बैटरी को पोर्ट किया जा सकता है। यानी बैटरी स्वैपेबल या नहीं। बैटरी को निकाल कर किसी और जगह चार्जिंग की सुविधा है या नहीं।

चार्जर वारंटी

कुछ वाहन निर्माता कंपनियां बैटरी चार्जर पर अलग से वारंटी देती हैं। अगर उनमें कोई खऱाबी आ जाए तो उन्हें बदलने का ऑप्शन रहता है। कुछ कंपनियां चार्जर पर दो साल तक की वारंटी देती हैं।
 

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मोटर से संबंधित जानकारियां

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Ampere Zeal Electric scooter - फोटो : ampere vehicles

कैसी हो मोटर

आमतौर पर कंपनियां ब्रशलेस डीसी और तीन फेज वाली एसी इंडक्शन मोटर देती हैं। दोनों मोटर्स के अपने फायदे हैं। जहां ब्रशलेस डीसी मैंटिनेंस फ्री और ज्यादा टॉर्क वाली होती हैं और उनकी क्षमता 95 से 98 फीसदी तक होती है। वहीं इंडक्शन मोटर 92 से 95 पीसदी तक की क्षमता वाली होती हैं। वहीं ये सस्ती भी होती हैं।

पीक पावर

टू-व्हीलर की इलेक्ट्रिक मोटर कितना आउटपुट दे सकती है। इस आउटपुट एनर्जी का इस्तेमाल वाहन को चलाने में होता है और इसे kW (किलोवॉट) में मापा जाता है। वाहन की टॉप स्पीड भी इसी पर निर्भर होती है।

टॉर्क

पिकअप को जानने के लिए इसे समझना बेहद जरूरी है। टॉर्क जितना ज्यादा होगा, गाड़ी का पिकअप उतना ही बेहतर होगा। इसs न्यूटन मीटर (NM) आरपीएम में मापा जाता है। ज्यादा टॉर्क और कम आरपीएम का मतलब है बेहतर पिकअप।

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