नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) (एनएचएआई) ने योग्य टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों के सफर को आसान और झंझट-मुक्त बनाने के लिए अपने आधिकारिक 'राजमार्गयात्रा' (RajmargYatra) एप पर एक नया डिजिटल लोकल पास फीचर लॉन्च किया है। अब पात्र स्थानीय निवासी इस एप के जरिए पास के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे टोल प्लाजा पर जाकर आवेदन करने या कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
Toll Pass: राजमार्गयात्रा एप पर डिजिटल लोकल टोल पास लॉन्च, जानें किसे मिलेगा फायदा और कैसे करें ऑनलाइन आवेदन
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यात्रा को आसान बनाने की दिशा में एक नई डिजिटल सुविधा शुरू की है। मोबाइल एप के जरिए पास के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इससे टोल प्लाजा पर जाकर आवेदन करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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कौन-कौन कर सकता है इस डिजिटल लोकल पास के लिए आवेदन?
यह नई सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो टोल प्लाजा के आसपास के इलाकों में रहते हैं:
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20 किमी के दायरे वाले निजी वाहन मालिक:
यह लोकल पास उन प्राइवेट व्हीकल यूजर्स के लिए है, जो किसी योग्य टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। -
दैनिक यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा:
रोजाना काम के सिलसिले में एक ही टोल प्लाजा से गुजरने वाले निवासियों को अब टोल पर लंबी लाइनों में लगने या बार-बार मैन्युअल वेरिफिकेशन कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। -
बिना किसी कागजी कार्रवाई के आवेदन:
NHAI के अनुसार, पात्र निवासी टोल प्लाजा पर जाए बिना और बिना कोई भौतिक दस्तावेज जमा किए, सीधे राजमार्गयात्रा ऐप के जरिए कुछ ही मिनटों में पास खरीद सकते हैं।
डिजिटल जांच की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
कागजी कार्रवाई को खत्म करने और अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए इस सिस्टम को सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा गया है:
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यूजर कंसेंट:
वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले आवेदक की स्पष्ट सहमति ली जाती है। -
डिजीलाकर से पता वेरिफिकेशन:
आवेदक वास्तव में पात्रता क्षेत्र में रहता है या नहीं, इसके लिए डिजीलाकर (DigiLocker) के जरिए पते की ऑटोमैटिक जांच की जाती है। -
'वाहन' डेटाबेस से व्हीकल डिटेल्स:
गाड़ी से जुड़ी पूरी जानकारी की पुष्टि केंद्र सरकार के 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस से की जाती है। -
फास्टैग और जीआईएस (GIS) वेरिफिकेशन:
इसमें गाड़ी से लिंक FASTag की डिटेल्स और भौगोलिक स्थिति की पुष्टि के लिए GIS-आधारित लोकेशन वेरिफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है। जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आवेदक वास्तव में 20 किमी के योग्य क्षेत्र का ही निवासी है।
'मार्गमित्र हेल्प सेंटर' क्या है और यह यूजर्स की कैसे मदद करेगा?
NHAI ने राजमार्गयात्रा एप के भीतर एक डिजिटली इनेबल्ड 'मार्गमित्र हेल्प सेंटर' (MargMitra Help Centre) भी जोड़ा है। यह एक सिंगल-विंडो सपोर्ट सिस्टम है, जो एक संवादात्मक इंटरफेस के जरिए काम करता है:
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22 भारतीय भाषाओं में सपोर्ट:
यह हेल्प सेंटर भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में यूजर के सवालों और शिकायतों को समझकर सहायता प्रदान करने में सक्षम है। -
टोल और पास से जुड़ी सेवाएं:
इसके जरिए यूजर्स फास्टैग रीचार्ज, केवाईसी आवश्यकताएं, रिफंड स्टेटस, एनुअल पास और लोकल पास सेवाओं से जुड़ी पूछताछ या शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। -
सड़क सुरक्षा और लीगल ट्रैकिंग:
इसके अलावा, यूजर्स अपनी गाड़ी की ब्लैकलिस्टिंग स्थिति चेक कर सकते हैं, लंबित ई-नोटिस देख सकते हैं, अपील दायर कर सकते हैं। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर फंसी हुई गाड़ियों या अतिक्रमण जैसी सड़क सुरक्षा संबंधी समस्याओं की रिपोर्ट भी दर्ज करा सकते हैं।