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EV Subsidy: ईवी, हाइब्रिड या पेट्रोल-डीजल? उत्सर्जन पर बहस के बीच नीति आयोग कर रहा है सबसे साफ तकनीक की जांच

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 29 Jul 2025 01:59 PM IST
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Niti Aayog examining lifecycle emissions of electric, hybrid and conventional vehicles Claims Report
Hybrid and Electric Cars - फोटो : अमर उजाला
देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों को लेकर चल रही बहस के बीच नीति आयोग अब यह तय करने में जुटा है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), हाइब्रिड और पारंपरिक (पेट्रोल-डीजल) वाहनों - इन तीनों में से किस तकनीक से सबसे कम प्रदूषण होता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग इन सभी विकल्पों के लाइफसाइकल एमिशन यानी इनके बनने से लेकर खत्म होने तक के कुल प्रदूषण की जांच कर रहा है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि पर्यावरण के लिहाज से सबसे साफ तकनीक कौन सी है।


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Niti Aayog examining lifecycle emissions of electric, hybrid and conventional vehicles Claims Report
Electric Car - फोटो : FREEPIK
हाइब्रिड को सब्सिडी देने पर बंटा है उद्योग जगत
यह पहल ऐसे वक्त पर हो रही है जब ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि क्या हाइब्रिड गाड़ियों को भी उतनी ही सरकारी सब्सिडी मिलनी चाहिए जितनी ईवी को मिलती है। फरवरी 2024 में नीति आयोग के चेयरमैन बीवीआर सुब्रह्मण्यम के साथ हुई एक बैठक में ईवी कंपनियों ने मांग की थी कि राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वे ईवी के लिए परमिट की सीमा हटाएं, क्योंकि ये सीमाएं कंपनियों की बिक्री में रुकावट डाल रही हैं। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, उस बैठक में नीति आयोग प्रमुख ने उद्योग से कहा कि अब और सब्सिडी की उम्मीद न रखें।

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Niti Aayog examining lifecycle emissions of electric, hybrid and conventional vehicles Claims Report
Electric Car - फोटो : FREEPIK
नई स्कीम से मिल रही है सब्सिडी, लेकिन नहीं रहेगी हमेशा
1 अक्तूबर 2024 से केंद्र सरकार ने 'पीएम ई-ड्राइव स्कीम' की शुरुआत की है, जिसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी देने के लिए 10,900 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह योजना 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। वाहन निर्माताओं का कहना है कि 2026 के बाद दोपहिया और तिपहिया ईवी पर दी जाने वाली सब्सिडी को बंद किया जा सकता है। लेकिन राज्यों को परमिट की सीमाएं खत्म करने के लिए केंद्र को आगे आना चाहिए।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
ईवी का उत्पादन और स्क्रैपिंग भी करता है प्रदूषण
ईवी को लेकर आम धारणा है कि वे जीरो टेलपाइप एमिशन करते हैं यानी चलते वक्त धुआं नहीं छोड़ते। लेकिन 2023 में आईआईटी कानपुर के एक अध्ययन ने यह दिखाया कि ईवी के निर्माण, उपयोग और स्क्रैपिंग (जैसे-जैसे वे बेकार होती हैं) के दौरान कुल मिलाकर उनसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, बनिस्बत हाइब्रिड या पारंपरिक वाहनों के। यानी ईवी भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं।

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Electric Car - फोटो : FREEPIK
भारत में ईवी की स्थिति और भविष्य की योजना
पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्रांति का दौर चल रहा है, और भारत भी पीछे नहीं है। फिलहाल भारत में लगभग 7.5 लाख ईवी ही हैं, जो कुल वाहनों का एक छोटा हिस्सा है। लेकिन सरकार ने 2030 तक सभी गाड़ियों में 30 प्रतिशत बिक्री इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य पेरिस जलवायु समझौता के तहत तय किए गए कार्बन कटौती के प्रयासों से जुड़ा है, जिससे वैश्विक तापमान को सीमित किया जा सके।

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